दुर्घटना की आशंका : हादसे होने के बाद भी रेलवे अधिकारी आवास नहीं करा रहे खाली

लापरवाही

एक खंडहर क्वार्टर की दीवार गिरने से दो कर्मियों की हो चुकी है मौत

दुर्घटना होने के बाद भी आवासों को तोड़ा नहीं जा रहा है

बीना (नवदुनिया न्यूज)।

रेलवे ने जिन आवासों को सालों पहले खंडर घोषित किया था, उनमें से कई आवासों में बाहरी लोगों ने कब्जा जमा लिया है। पूरी तरह से जर्जर हो चुके कुछ आवासों में बाहरी लोग परिवार के साथ रह रहे हैं। अधिकारियों को भी इसकी जानकारी है, लेकिन वह इन आवासों को खाली नहीं करा रहे हैं। वहीं रेलवे के एक खंडहर क्वार्टर की दीवार गिरने से दो रेलवे कर्मचारियों की मौत हो चुकी है। चार दिन पहले ही दीवार गिरने से एक रेलवे कर्मचारी गंभीर रूप से घायल हुआ है। दुर्घटना की आशंका होने के बाद भी रेलवे अधिकारी बाहरी लोगों से आवास खाली कराकर तुड़वाने में रुचि नहीं दिखा रहे हैं।

पश्चिमी रेलवे कॉलोनी में रहने वाले एक रेलवे कर्मचारी ने बताया कि वर्तमान में रेलवे के खंडहर घोषित हो चुके आवासों में कई बाहरी लोग रह रहे हैं। इन आवासों की स्थिति बहुत ही दयनीय है। इन आवासों की छत या दीवार कभी गिर सकती है। अगर ऐसा हुआ तो दर्दनाक हादसा हो सकता है। बावजूद इसके रेलवे अधिकारी इन आवासों को न तो खाली करा रहे हैं। खंडहर क्वार्टर तुड़वाने में रुचि दिखा रहे हैं। एक अन्य कर्मचारी ने बताया कि पूरी कॉलोनी में दर्जनों आवास खंडहर पड़े हुए हैं। इनके आसपास से रेलवे कर्मचारियों और उनके परिजनों का आना-जाना रहता है। इससे दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। रेलवे जिम्मेदार अधिकारियों को इसकी जानकारी है, लेकिन वह इन्हें तुड़वाने में रुचि नहीं दिखा रहे हैं। दूसरा नुकसान यह भी है कि शाम होते ही आसामाजिक तत्व को लोग पहुंच जाते है। देर शाम तक शराब पार्टियां चलती हैं, जिससे कर्मचारियों के साथ आपराधिक घटना होने की आशंका रहती है, इसके बाद भी इन आवासों को नहीं तोड़ा जा रहा है।

एक साथ हुई दो कर्मचारियों की मौत

करीब पांच साल पहले लोको शेड के पास रेलवे के कुछ कर्मचारी खड़े हुए थे। इसी दौरान रेलवे के खंडहर आवास की दीवार गिर गई थी। दीवार में दब कर मौके पर ही दो कर्मचारियों की मौत हो गई थी। इस समय तत्कालीन डीआरएम ने सारे रेलवे आवास तोड़ने के निर्देश दिए थे, लेकिन अब तक सारे आवास तोड़े नहीं गए हैं। इसी तरह नानक वार्ड निवासी एक युवक की खंडहर क्वार्टर में हत्या की गई थी। इस घटना के बाद तत्कालीन डीएसपी रेल क्यूआर जैदी खंडहर क्वार्टर तोड़ने के लिए ने डीआरएम को पत्र लिखा था, लेकिन खंडहर क्वार्टर तोड़ने की कार्रवाई नहीं की गई।

चार दिन पहले कर्मचारी हुआ घायल

पूर्वी रेलवे कॉलोनी में खंडहर क्वार्टर की बल्लियां निकालते समय दीवार ढह गई थी। इसमें दबने से एक कर्मचारी गंभीर रूप से घायल हो गया है। कर्मचारी को इलाज के लिए भोपाल में भर्ती कराया गया है। इस तरह एक के बाद एक कई घटनाएं हुई हैं, लेकिन रेलवे अधिकारी खंडहर क्वार्टरों की नीलामी कर उन्हें तुड़वाने में जरा भी रुचि नहीं दिखा रहे हैं। खाली क्वार्टर मिलने पर बाहरी लोग इनमें कब्जा जमा लेते हैं। इससे दुर्घटना की आशंका बनी रहती है।

तोड़ने की प्रक्रिया चल रही है

खंडहर क्वार्टर तोड़ने की प्रक्रिया चल रही है। खाली पड़े आवासों को तोड़ने के लिए प्रस्ताव बनाकर भेजा गया है। एक-एक करके सारे क्वार्टर तोड़े जाएंगे। इसके अलावा क्वार्टरों में अगर कोई बाहरी लोग रह रहे हैं तो उनसे आवास खाली कराए जाएंगे।

डीसी द्विवेदी, एडीईएन, बीना

0607 एसजीआर 141 बीना। रेलवे कॉलोनी में खड़े खंडहर आवास।

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लीड

चार एकड़ में बोया था सोयाबीन, फसल नहीं उगने से किसान की सदमे से हुई मौत

किसान की मौत- मृतक के बेटे ने बताया कि फसल न उगने से दो दिन से परेशान थे पिता

बीना (नवदुनिया न्यूज)।

बोवनी के बाद लगातार बारिश होने चार एकड़ में बोया गया सोयाबीन का बीज खेत में ही सड़ गया। इसका किसान को गहरा सदमा पहुंचा और उसकी खेत पर ही हार्ट अटैक से मौत हो गई। मृतक किसान का सिविल अस्पताल में पोस्टमार्टम कराया गया है। वहीं दूसरी ओर किसान की मौत पर पूर्व जनपद अध्यक्ष इंदर सिंह ने तहसीलदार को ज्ञापन देकर पूरे मामले की जांच कर मृतक किसान के परिजनों को मुआवजा दिलाने की मांग की है।

मृतक किसान पल्टूराम पिता लक्ष्मण चढ़ार (62) पंधव के रहने वाले थे। किसान के बेटे सुरेश ने बताया कि उनकी भैंसवाहा हल्का में चार एकड़ जमीन है। इसमें इनके पिता ने सोयाबीन की बोवनी की थी, लेकिन बोवनी के बाद लगातार दो दिन तेज बारिश होने से बीज जमीन में ही सड़ गया। खेत में सोयाबीन का एक भी पौधा नहीं दिख रहा है। उनके पिता 4 जुलाई को खेत पर गए थे। हजारों रुपये खर्च करने के बाद भी खेत में सोयाबीन का एक भी पौधा नहीं दिख रहा था। इससे उनके पिता बेहद दुखी थे। उन्होंने घर पर आकर चर्चा की थी कि अपना खेत छोड़कर सभी के खेतों में फसल दिखने लगी है। सोयाबीन न उगने का उन्हें गहरा सदमा लगा था। रविवार को फिर वह खेत पर गए थे, लेकिन देर शाम तक घर नहीं पहुंचे। इसके चलते पिता की तलाश में घर वाले खेत पर गए। उन्होंने देखा कि पिता खेत में मृत अवस्था में पड़े हुए हैं। सूचना पर पुलिस ने शव का पंचनामा कर पोस्टमार्टम के लिए शव सिविल अस्पताल पहुंचा दिया। सोमवार को पोस्टमार्टम के बाद पुलिस ने मर्ग कायम कर लिया है।

किसानों ने दिया ज्ञापन

सदमे से किसान की मौत की खबर लगने पर पूर्व जनपद अध्यक्ष इंदर सिंह सिविल अस्पताल पहुंचे। उन्होंने किसान के बेटे से चर्चा कर कुछ किसानों के साथ तहसीलदार को ज्ञापन दिया। इसमें कहा गया है कि बोवनी के बाद तेज बारिश होने से कई किसानों का बीज खेत में भी सड़ गया है। इसलिए खेतों का सर्वे किया जाए और जिन किसानों की फसल नहीं उगी है उन्हें मुआवजा दिया जाए। इसकी शुरूआत मृतक किसान केे खेत से की जाए। उन्होंने मांग की है कि अधिकारी खुद मौके पर जाकर जांच करें और देखें कि किसान को कितना नुकसान हुआ है। इसका मुआवजा किसान के परिजनों को दिया जाए।

अटैक से मौत हुई है

किसान पर खेत पर गया था इसी दौरान उसकी अटैक से मौत हो गई। मैंने पटवारी को मौका मुआयना करने भेजा है। बाकी सुनने में आया है कि किसान अभी सिर्फ बोवनी की थी। नुकसान जैसी कोई बात नहीं।

संजय जैन, तहसीलदार, बीना

0607 एसजीआर 142 बीना। किसान की मौत पर पूर्व जनपद अध्यक्ष इंदरसिंह के साथ किसानों ने ज्ञापन देकर मुआवजा दिलाने की मांग की।

0607 एसजीआर 143 बीना। सिविल अस्पताल में मृतक किसान का पोस्टमार्टम करने पहुंचे परिजन।

Posted By: Nai Dunia News Network

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