International Women's Day 2021 बीना (नईदुनिया प्रतिनिधि)। प्रदेश में बुंदेलखंड के ऐरण में पाए गए पुरावशेष महिलाओं के पराक्रम की अनूठी दास्तान कह रहे हैं। यूं तो पूरे देश में महिलाओं की वीरता की गाथाएं गंूज रही हैं लेकिन प्राचीन एतिहासिक स्थल ऐरण के पुरावशेष उनके पराक्रम के साथ त्याग की कहानी भी सुना रहे हैं। पुरातत्व के जानकार बताते हैं कि शक संवत् 1314 (1392 ईसवी) में महिलाओं ने बाहरी आक्रमणकारियों से लड़ते हुए राज्य की रक्षा की। यह पुरावशेष महिलाओं के अदम्य साहस का परिचय देते हैं।

सागर जिले में बीना तहसील से महज 20 किलोमीटर दूर ऐरण का पुरातात्विक दृष्टि से खासा महत्व है। इसी प्राचीन ऐरण स्थल पर अमरकंटक विश्वविद्यालय में पदस्थ डॉ मोहन लाल चढ़ार ने पीएचडी की है। वे बताते हैं कि ऐरण में एक से ज्यादा सती स्तंभ मिले हैं। इनमें से एक शक संवत् 1314 (1392ईसवी) का है। इस सती स्तंभ के एक दृश्य में दो स्त्रियां चबूतरे पर विराजमान शिवलिंग की पूजा करती दिखाई गई हैं। दोनों जूड़ा बांधे हुए हैं। दूसरे दृश्य में स्त्रियों को युद्ध करते दिखाया गया है। एक स्त्री हाथी व दूसरी स्त्री घोड़े पर सवार है।

दोनों तलवार-भाले का उपयोग कर रही हैं। रण कौशल के दृश्य के बीच एक स्त्री खड़ग लिए नजर आ रही है। इस स्तंभ की लंबाई 2.28 मीटर, चौड़ाई 46 सेंटीमीटर और मोटाई 15 सेंटीमीटर है। डॉ मोहन लाल बताते हैं कि यहां युद्ध में पति की मृत्यु के बाद पत्नी ने युद्ध का संचालन किया और युद्ध में विजय पताका लहराने के बाद जब वापस अपने महल में लौटी तो उनका भव्य स्वागत किया गया। इसके बाद वे पति वियोग में सती हो गईं। ऐसे पुरावशेष युद्ध कौशल में निपुण उस दौर की महिलाओं की वीरता की गवाही देते हैं।

महिला सम्मान था सर्वोपरि

डॉ मोहन लाल भारत में स्त्री सम्मान की सर्वोच्चता का एक उदाहरण ऐरण से जोड़ते हुए बताते हैं कि करीब 1700 वर्ष पूर्व (लगभग 380 ईसवी) समुद्रगुप्त ने अपने बेटे रामगुप्त को मध्यभारत का राजा नियुक्त किया था। अभिलेख के मुताबिक लगभग इसी समय शक शासक रुद्रसिंह द्वितीय ने ऐरण पर आक्रमण कर अपना दूत रामगुप्त के पास भेजा और उससे पत्नी धुव्रस्वामिनी को देने को कहा। रामगुप्त ने यह प्रस्ताव स्वीकार कर लिया था। जैसे ही इसकी खबर रामगुप्त के छोटे भाई चंद्रगुप्त द्वितीय को लगी तो उन्होंने रानी के वेश में रुद्रसिंह के शिविर में घुसकर उसकी हत्या कर दी थी। स्त्री सम्मान का यह बड़ा उदाहरण है।

मां के आदेश का होता था सम्मान

डॉ मोहन लाल बताते हैं कि गुप्तवंश में महिला को देवी का दर्जा देने के साथ-साथ उनकी आज्ञा का पालन भी किया जाता था। चीनी बौद्ध भिक्षु हेनसांग ने अपनी किताब में ऐरण की एक घटना का उल्लेख किया है। विवरण के अनुसार मिहिरकुल ने गुप्त नरेश नरसिंहगुप्त बालादित्य पर आक्रमण किया था। एक भयंकर युद्ध में बालादित्य ने ऐरण में मिहिरकुल को हराकर बंदी बना लिया। बाद में मां की आज्ञा पर बालादित्य ने मिहिरकुल को मुक्त कर दिया था।

Posted By: Hemant Kumar Upadhyay

नईदुनिया ई-पेपर पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करे

नईदुनिया ई-पेपर पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करे

डाउनलोड करें नईदुनिया ऐप | पाएं मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और देश-दुनिया की सभी खबरों के साथ नईदुनिया ई-पेपर,राशिफल और कई फायदेमंद सर्विसेस

डाउनलोड करें नईदुनिया ऐप | पाएं मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और देश-दुनिया की सभी खबरों के साथ नईदुनिया ई-पेपर,राशिफल और कई फायदेमंद सर्विसेस

 
Show More Tags