ओम द्विवेदी, सागर Madhya Pradesh Cabinet : मध्यप्रदेश में सागर ही एकमात्र ऐसा जिला है, जहां से प्रदेश सरकार में तीन कैबिनेट मंत्री हैं। सागर के राजनीतिक इतिहास में भी ऐसा पहली बार हुआ है जब तीन-तीन नेताओं को एक साथ कैबिनेट मंत्री की जिम्मेदारी दी गई है। कांग्रेस सरकार के पतन के बाद जब भाजपा ने सरकार बनाई उसी समय गोविंद सिंह राजपूत मंत्रिमंडल में शामिल हो गए थे। गुरुवार को प्रदेश के वरिष्ठ नेता गोपाल भार्गव और भूपेंद्र सिंह भी कैबिनेट मंत्री बना दिए गए हैं। बुंदेलखंड से ताल्लुक रखने वाले तीनों ताकतवर नेताओं के कंधे पर अब सागर के विकास की जिम्मेदारी होगी। सुरखी विधानसभा उप चुनाव जीतना इन मंत्रियों के पास पहली चुनौती है।

23 मार्च को जब शिवराज सिंह चौहान ने कमलनाथ का सिंहासन अपने कब्जे में लिया था, तभी से यह माना जा रहा था कि सरकार में सागर का दबदबा बढ़ेगा। गोपाल भार्गव और भूपेंद्र सिंह दोनों का कद प्रदेश भाजपा की सियासत में इतना बड़ा है कि इनकी अनदेखी मुमकिन नहीं है।

भार्गव कभी-कभार अपने गृह ग्राम गढ़ाकोटा से ही ऐसा कंकर फेक देते थे कि भोपाल की शांत झील की लहरें मुख्यमंत्री निवास से टकराने लगती थीं। उनके समर्थक सालों से उन्हें मुख्यमंत्री का दावेदार मान रहे हैं, ऐसे में भला चौहान इस ब्राह्मण नेता की प्राण प्रतिष्ठा प्रमुखता से कैसे नहीं करते? इसी तरह की सत्ता शक्ति भूपेंद्र सिंह के पास भी है।

वे मुख्यमंत्री शिवराज सिंह के बाल सखा ही नहीं, राजनीति में भी अभिन्न मित्र हैं। भरोसा इतना कि पिछले सियासी सफर में गृह मंत्रालय इनके पास था। राजनीति की प्राथमिक पाठशाला में पढ़ने वाला भी जानता था कि जब भी विस्तार होगा, ये दोनों तो मंत्री बनेंगे ही। शपथ ग्रहण समारोह ने केवल उस भरोसे पर मुहर लगाई है।

गोविंद से कम कैसे मिलता गोपाल को

गोविंद सिंह राजपूत कांग्रेस सरकार का सर्वनाश कर भाजपा में आए थे। उन्हें इसका पुरस्कार इस रूप में मिला कि गोपाल भार्गव और भूपेंद्र सिंह के पहले मंत्रिमंडल में मंगल प्रवेश हो गया। वे सरकार का दबदबा लेकर सागर आते रहे और ये दोनों अपनी बारी का इंतजार करते रहे।

हालांकि भूपेंद्र सिंह को सुरखी उपचुनाव का प्रभारी बनाया गया तो सियासी हलके में यह चर्चा शुरू हो गई कि इन्हें संगठन की जिम्मेदारी दी जाएगी। गोपाल भार्गव को विधानसभा अध्यक्ष बनाए जाने का भी बाजार गर्म रहा, लेकिन ऐसा होता तो सिंधिया अर्थात महाराज की जय-जय रहती। कांग्रेस से आए गोविंद अगर कैबिनेट मंत्री थे तो अपने-अपने इलाके में कांग्रेस को धूल चटाने वाले इन नेताओं को उनसे कम भला कैसे मिलता?

अब प्रदीप लारिया पर कयास

मंत्री बनने की कतार में नरयावली विधायक प्रदीप लारिया भी थे, लेकिन सवाल यही था कि सागर से कितने? इसलिए इस सूची से वे बाहर हो गए हैं, लेकिन चर्चाओं से बाहर नहीं हैं। कहा जा रहा है कि लारिया को विधानसभा उपाध्यक्ष बनाया जा सकता है। विंध्य और महाकोशल से मंत्री नहीं बनाए गए हैं, इसलिए विधानसभा अध्यक्ष की कुर्सी इन दोनों इलाकों में से किसी एक के हिस्से जा सकती है। सागर विधायक शैलेंद्र जैन को फिलहाल इंतजार ही करना पड़ेगा।

सुरखी उपचुनाव पहली चुनौती

गोविंद राजपूत के कांग्रेस से भाजपा में आने के कारण सुरखी विधान सभा में उपचुनाव होने वाले हैं। यह चुनाव जीतना भाजपा के लिए न केवल प्रतिष्ठा का प्रश्न है, बल्कि सरकार का भविष्य भी बहुत कुछ इस उपचुनाव पर निर्भर करेगा। वैसे भाजपा अगर तन, मन, धन से यह चुनाव लड़ेगी तो जीतना कोई मुश्किल काम नहीं है, लेकिन एक मंत्री को जिताने में बाकी दोनों मंत्री कितनी ताकत झोंकते हैं, यह भी देखने वाली बात होगी। सत्ता और संगठन के निर्देश के बाद पुनारी अदावत याराने में बदली या नहीं, यह सुरखी उपचुनाव का परिणाम ही बताएगा।

सागर के विकास को गति मिलेगी

तीन कैबिनेट मंत्री बनने से सागर के विकास को और गति मिलेगी। सागर स्मार्ट सिटी के रूप में विकसित होगा। तीनों वरिष्ठ नेताओं के कैबिनेट मंत्री बनने से सुरखी की राह पूरी तरह से आसान हो गई है। किसी प्रकार का संतुलन बनाने के लिए नहीं, बल्कि तीनों नेताओं को उनके अनुभव और वरिष्ठता के आधार पर मंत्रिमंडल में जिम्मेदारी दी गई है। - गौरव सिरोठिया, भाजपा जिलाध्यक्ष, सागर

Posted By: Nai Dunia News Network

नईदुनिया ई-पेपर पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करे

नईदुनिया ई-पेपर पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करे

डाउनलोड करें नईदुनिया ऐप | पाएं मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और देश-दुनिया की सभी खबरों के साथ नईदुनिया ई-पेपर,राशिफल और कई फायदेमंद सर्विसेस

डाउनलोड करें नईदुनिया ऐप | पाएं मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और देश-दुनिया की सभी खबरों के साथ नईदुनिया ई-पेपर,राशिफल और कई फायदेमंद सर्विसेस

ipl 2020
ipl 2020