चैतन्य सोनी, सागर। नईदुनिया। Madhya Pradesh News फ्राइंस सिंड्रोम नाम की बीमारी का सागर में अब तक का पहला मामला सामने आया है। बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज में पांच माह की नवजात बच्ची को भर्ती कराया गया था। उसके शरीर में पेट और फेफड़ों को अलग करने वाली झिल्ली ही नहीं बनी थी। सबसे दुर्लभ बात उसका लीवर दिल के ठीक विपरीत हिस्से दाहिने फेफड़े के स्थान पर विकसित हुआ था।

फ्राइंस सिंड्रोम के कारण उसके शरीर में जन्मजात कई विकृतियां एक साथ पैदा हो गई थीं। बच्ची का मलद्वार ही नहीं बना, बल्कि बच्चादानी के द्वार से उसे लेट्रिन आती थी। दुनिया में अब तक इस तरह के महज 120 केस सामने आए हैं, खास बात यह है कि उन बच्चों में एक भी जीवित नहीं बचा, जबकि सागर में बच्ची ऑपरेशन के बाद डिस्चार्ज कर दी गई है। तीन महीने बाद उसकी दूसरी सर्जरी की जाएगी।

एक 5 माह की बच्ची को पिछले महीने मेडिकल कॉलेज की सर्जरी ओपीडी में डॉ. सुनील सक्सेना को दिखाया था। बच्ची की जांचें, एक्सरे के बाद सामने आया कि उसे फ्राइंस सिंड्रोम अर्थात जन्मजात विकृति की दुर्लभ बीमारी है। बच्ची के शरीर में लीवर दाहिने फेफड़े की जगह था। मलद्वार बच्चेदानी के हिस्से से जुड़ा था। बाथरूम और मलद्वार एक साथ जुड़े थे। दोनों हाथों के अंगूठे तर्जनी अंगुली से जुड़े हुए थे। आंखों के कॉर्निया बहुत ही छोटी साइज में विकसित हुए थे।

करीब एक घंटे चले ऑपरेशन के दौरान बच्ची के लीवर को खींचकर सही जगह पर फिट किया गया है। उसके लंग्स सही काम कर रहे हैं। वहीं मलद्वार का रास्ता अस्थाई रूप से उसके पेट में बाएं तरफ बनाकर जाली लगाई गई है। बच्ची को सोमवार को डिस्चार्ज किया गया है। अगले तीन महीने बाद उसके दो और ऑपरेशन किए जाएंगे।

तीन माह बाद फिर ऑपरेशन करेंगे

फ्राइंस सिंड्रोम का मेरे जीवन का यह पहला केस है। बीएमसी में पहली दफा ही दुर्लभ केस सामने आया है। दुनिया में मेडिकल साइंस में अब तक ऐसे 120 केस सामने आए हैं। हमने बच्ची का ऑपरेशन कर करीब 15 दिन ऑब्जर्वेशन पर रखा था। वह फिलहाल ठीक है। मलद्वार सहित अन्य विकृतियों के लिए तीन महीने बाद ऑपरेशन करेंगे।

- डॉ. सुनील सक्सेना, चाइल्ड सर्जन एवं एसो. प्रोफेसर, बीएमसी, सागर

Posted By: Hemant Upadhyay

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