Madhya Pradesh News: सागर (नवदुनिया प्रतिनिधि )। शासकीय नियमों के मकड़जाल में अधिकारी नैतिकता भूलते जा रहे हैं। ऐसा ही एक मामला बीना के सिविल अस्पताल में सामने आया है। कटनी निवासी एक ग्राम कोटवार ट्रेन से गिरकर गंभीर रूप घायल हो गया। उसे जीआरपी ने सिविल अस्पताल में भर्ती कराया। सिर में गंभीर चोट होने के कारण डाक्टरों ने उसे सागर रेफर कर दिया, लेकिन अटेंडर न होने से 108 एम्बुलेंस के स्टाफ ने सागर ले जाने से मना कर दिया तो वहीं जीआरपी अटेंडर देने तैयार नहीं है। इसके चलते घायल ग्राम कोटवार दो दिन से अस्पताल में जिंदगी और मौत से जूझ रहा है।

अस्पताल से मिली जानकारी के मुताबिक ग्राम करेला, थाना बरही, जिला कटनी निवासी आशाराम पिता राम विशाल दाहिया (49) 1 दिसंबर को भोपाल में आयोजित ग्राम कोटवारों की रैली में शामिल होने गया था। वह अगले दिन भोपाल से वापस कटनी जा रहा था।

रात करीब 12 बजे वह ट्रेन से गिरकर घायल हो गया। उसे सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया था। सिर में गंभीर चोट होने के कारण वह बेहोश था। डाक्टर ने उसे सागर कर दिया, लेकिन 108 एम्बुलेंस के स्टाफ ने बिना अटेंडर घायल को सागर से जाने मना कर दिया। जीआरपी ने भी अटेंडर नहीं भेजा।

दूसरे दिन शनिवार को वह बेहोश हालत में अस्पताल में पड़ा रहा। रविवार को घायल को होश आने पर उसने स्टाफ नर्स को अपने बेटे का मोबाइल फोन नंबर दिया। स्टाफ नर्स ने मोबाइल फोन से उसके स्वजन को कोटवार के घायल होने की सूचना दी।

इस संबंध में बीना जीआरपी थाना प्रभारी नितिन पटले का कहना है कि हमारा काम घायलों को इलाज के लिए अस्पताल पहुंचाना है। ग्राम कोटवार को भी अस्पताल में भर्ती करा दिया गया था। डाक्टरों को घायलों को सागर भेजने का इंतजाम करना चाहिए। इस संबंध में हम डाक्टर से बात भी करेंगे।

दूसरी ओर सिविल अस्पताल प्रभारी डा. संजीव अग्रवाल का कहना है कि नियम से तो 108 एम्बुलेंस वालों को अडेंटर मांगना ही नहीं चाहिए, क्योंकि एम्बुलेंस में 2 का स्टाफ होता है। इसके बाद भी वह बिना अटेंडर घायलों को ले जाने से मना कर देते हैं। वहीं दूसरी ओर अस्पताल में स्टाफ की इतनी कमी है कि हम चाहकर भी अस्पताल से कर्मचारी नहीं भेज सकते।

Posted By: Hemant Kumar Upadhyay

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