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- शैलेंद्र जैन के समर्थकों ने झील में उतरकर तो प्रदीप लारिया के समर्थकों ने राजधानी में मांगा इंसाफ

ओम द्विवेदी, सागर

सागर जिले के इतिहास में पहली बार एकसाथ तीन मंत्री बनाए गए हैं। प्रदेश में सागर ही एक मात्र ऐसा जिला है, जहां से मंत्रिमंडल में तीन मंत्री हैं, इसके बाद भी सबसे ज्यादा असंतोष के स्वर यहीं से फूट रहे हैं। दो वरिष्ठ विधायकों के समर्थक सागर से भोपाल तक विरोध का झंडा उठाए हुए हैं। शिकायत यही कि उनके नेता की वरिष्ठता को दरकिनार किया गया है। दूसरे दलों से आए लोग विधायक नहीं होते हुए भी मंत्री बना दिए गए हैं और अपने दल से लगातार चुनाव जीतने वाले विधायक मंत्रिमंडल से बाहर हैं। कार्यकर्ताओं का यह सहज गुस्सा अगर आगे भी जारी रहा अथवा थोड़ा उग्र हुआ तो पार्टी और सरकार दोनों को असहज बना सकता है।

दो दिन पहले प्रदेश मंत्रिमंडल का विस्तार होते ही भाजपा कार्यकर्ताओं का अनुशासन असंतोष में बदल गया। सागर विधायक शैलेंद्र जैन के समर्थक शुक्रवार दोपहर अर्धनग्न होकर झील में उतर गए और अपने नेता को मंत्री बनाने की मांग करने लगे। समर्थकों के इस गुस्से को संगठन समझ पाता कि शाम तक भोपाल से खबर आई कि नरयावली विधायक प्रदीप लारिया के समर्थक राजधानी पहुंच गए हैं और नारे लगा रहे है- हम अपना अधिकार मांगते, नहीं किसी से भीख मांगते। सागर से भोपाल तक किया यह विरोध प्रदर्शन क्या केवल इत्तफाक था या फिर आलाकमान को दी जाने वाली चेतावनी? उनकी क्या रणनीति है, यह तो दोनों नेता और समर्थक ही जानते होंगे, लेकिन सियासी गलियों में यह चर्चा टहलने लगी है कि उपेक्षा से दुखी ये विधायक कहीं दूसरे दल की तरफ तो नहीं टहलने लगेंगे?

बची हुई कुर्सी हासिल करने के लिए दबावः

कहा जा रहा है कि मंत्रियों की जगह भर जाने के बाद जो बची हुई कुर्सी है, उसके दिल यह दबाव बनाया जा रहा है। विधानसभा में सदन को चलाने की जिम्मेदारी जिस अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के पास होती है, प्रदीप लारिया की नजर उस पर है। उनके समर्थक जानते हैं कि यह सरकार दबाव बनाने से ही सुनेगी, इसलिए वे भोपाल पहुंच गए। वैसे तो यह माना जा रहा है कि लारिया विधानसभा उपाध्यक्ष बन सकते हैं, लेकिन सियासत कब उल्टे दांव चल दे, कोई नहीं जानता इसलिए समर्थक बेकाबू हो रहे हैं। वैसे उनकी वरिष्ठता पर कोई अंगुली नहीं उठा सकता। तीन पंचवर्षीय से लगातार नरयावली से विधायक है। सागर महापौर भी रह चुके हैं। संगठन में उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। आखिर चाहने वाले भी कब तक इंतजार करें।

सागर विधायक की वरिष्ठता भी दरकिनारः

वरिष्ठता के मामले में सागर विधायक शैलेंद्र जैन भी किसी से कम नहीं हैं। ये भी सागर का लगातार तीन बार से नेतृत्व कर रहे हैं। भाजपा जिलाध्यक्ष रह चुके हैं। क्षेत्र में निरंतर सक्रिय रहते हैं। जैन समाज लगातार यह मांग करता रहा है कि बुंदेलखंड से जैन को नेतृत्व मिले, जिससे सरकार में समाज की हिस्सेदारी हो सके, लेकिन ऐसा न हुआ। ज्योतिरादित्य सिंधिया और उनके समर्थकों के दबाव के समक्ष जैन समाज का दबाव काम नहीं आया। परिणाम यह हुआ कि उनके समर्थक विरोध दर्ज कराते हुए सागर झील में उतर गए। भाजपा आलाकमान को यह संदेश देने के लिए कि गुस्सा उबल रहा है, लेकिन इस सागर मंथन से कुर्सी कौन-सी निकलेगी, यह भविष्य के गर्भ में है।

फिर दल-बदल तो नहीं होगाः

प्रदेश में शिवराज सिंह चौहान ने जिस साम, दाम, दंड, भेद से कांग्रेस से कुर्सी खींची, अगर निकट भविष्य में कांग्रेस ने कोई ऐसा दांव खेला तो क्या ये दोनों विधायक इधर से उधर हो सकते हैं। अगर समर्थकों का दबाव इन नेताओं पर रहा तो ये मंत्री गोविंद सिंह राजपूत की तरह कोई निर्णय ले सकते हैं। हालांकि पार्टी को समर्पित दोनों ही नेता इस आशंका को सिरे से खारिज करते हैं, लेकिन किसी दल की उपेक्षा कब किसी दल से अपेक्षा में बदल जाए, कौन जानता है।

कार्यकर्ताओं की भावना हैः

भोपाल में समर्थकों का प्रदर्शन उनकी भावनाएं हैं। कार्यकर्ताओं को लगता है कि उनके विधानसभा को प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए। मेहनत परिणाम में न बदले तो तकलीफ तो होती है, लेकिन संगठन-सरकार का निर्णय स्वीकार है। किसी अन्य दल में जाने का सवाल ही नहीं। हम लोग टिकाऊ हैं। पार्टी जो जिम्मेदारी देगी, उस पर उस समय विचार करेंगे।

-प्रदीप लारिया, विधायक, नरयावली।

अभिव्यक्ति की आजादी तो है

कार्यकर्ताओं की अपेक्षाएं होती हैं, जब वे पूरी नहीं होतीं तो आक्रोश फूटता है। मैं व्यक्तिगत रूप से इस तरह के प्रदर्शन के पक्ष में नहीं हूं, लेकिन अभिव्यक्ति की आजादी तो है। मुझे भी इस बार उम्मीद थी कि सरकार में जिम्मेदारी मिलेगी, लेकिन संगठन और मुख्यमंत्री का निर्णय स्वीकार है। पार्टी छोड़कर कहीं और जाने का सवाल ही नहीं उठता।

-शैलेंद्र जैन, विधायक, सागर।

अनुशासनहीनता नहीं

सागर और नरयावली विधायक के समर्थकों ने उन्हें मंत्री बनाने की मांग की थी। यह अनुशासनहीनता नहीं है, कार्यकर्ताओं की भावना है। वे लोग मेरे पास भी आए थे, मैंने उन्हें समझाया है कि पार्टी फोरम में और अनुशासन में रहकर बात करें। इसके बाद आज ऐसी कोई बात सामने नहीं आई। मैंने उनकी भावना संगठन में ऊपर तक पहुंचाई है।

-गौरव सिरोठिया, भाजपा जिलाध्यक्ष, सागर।

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फोटो : प्रदीप लारिया, शैलेंद्र जैन, गौरव सिरोठिया के प्रोफाइल फोटो नाम से भेज रहे हैं, जरूरत पड़े तो इस्तेमाल कर सकते हैं

Posted By: Nai Dunia News Network

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