सागर(नवदुनिया प्रतिनिधि)। श्री महावीर दिगंबर जैन मंदिर नेहानगर में विराजमान आचार्यश्री विद्यासागर महाराज के शिष्य ऐलकश्री सिद्धांत सागर महाराज ने धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि संसार एक नदी है इसके दो किनारे हैं कभी सुख का किनारा मिलता है तो कभी दुख का किनारा मिलता है, लेकिन आदमी सुख और दुख के किनारे पर अकेला ही नजर आता है।

उन्होंने कहा कि एक अकेला ही जीव जन्म लेता है और इस दुनिया में अकेले ही सफर करता है। कितना ही कारवां क्यों ना बढ़ जाए फिर भी आदमी सुख दुख का अनुभव अकेला ही करता है। लक्ष्‌मी एक कदम भी आदमी का साथ नहीं देती है, परिवार मरघट तक ही साथ देता हैं। इसके आगे आत्मा शरीर को छोड़कर अकेले ही यात्रा करती है। अकेला ही व्यक्ति रोगी होता है अकेला शोक करता है संताप मानसिक दुख में पीड़ित रहता है और अकेला ही मृत्यु प्राप्त करके नरक के दुख में दुखों को भोगता है। अकेला ही पुण्य पाप संचय करता है।

स्वजन भी दुख के समय में साथ नहीं देते हैं

ऐलकश्री ने कहा कि स्वजन भी दुख के समय में थोड़ा सा भी साथ नहीं देते हैं। जब यह इंसान भगवान को धोखा दे देता है फिर आदमी को कैसे छोड़ सकता हैं। रिश्ते नाते प्यार और वफादारी की बातें जब अंत में थोथी निकलती है यथार्थ में इस संसारी प्राणी को भगवान और धर्म ही सहारा देता है। धर्म ही व्यक्ति को स्वर्ग और मोक्ष ले जाता है इसलिए व्यक्ति आत्मा और शरीर को भिन्ना मानते हुए अपनी सकारात्मक सोच को आगे बढ़ा सकते हैं।

Posted By: Nai Dunia News Network

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