मालथौन (नवदुनिया न्यूज)। पर्युषण पर्व का रविवार को समापन हुआ। इस दौरान भगवान वासुपूज्य का मोक्ष कल्याणक मनाया गया। उनका अभिषेक, पूजन, शांति धारा की गई। इसके पश्चात निर्वाण लाडू समर्पित किया गया। दोपहर में जल विहार के लिए गंज मंदिर, बड़ा मंदिर और बीच का मंदिर से शोभायात्रा बैंडबाजों के साथ निकली। किला परिसर से जल विहार कर जिनालय पहुचीं। जहां श्रीजी का अभिषेक पूजन हुआ इसके उपरांत सामूहिक नित्य पूजन किया गया। शाम को वंदना के लिए बाजों के साथ तीनो भव्य जिनालयों में सकल समाज ने देव दर्शन किए।

भगवान वासुपूज्य का मोक्ष कल्याणक मनाया

रहली। चतुर्दशी को भगवान वासुपूज्य के मोक्ष कल्याणक दिवस पर जैन समाज द्वारा जैन तीर्थ अतिशय क्षेत्र पटना गंज आदिनाथ जिनालय एवं पार्श्वनाथ जिनालय पंढरपुर में पूजा अर्चना के साथ निर्वाण लाडू चढ़ाया गया। ब्रह्मचारी अतिशय भैया एवं सौरभ भैया के निर्देशन में दशलक्षण पर्व आराधना के साथ मोक्ष कल्याणक दिवस पर लाढू सजाओ प्रतियोगिता का भी आयोजन किया गया। आदिनाथ जिनालय में स्थित भगवान वासुपूज्य वेदी पर स्थापित समवशरण सहित सभी वेदियों पर निर्माण कांड पूजा के साथ लाडू चढ़ाया गया।

जैन मंदिर से निकाली गई श्रीजी की शोभायात्रा

गौरझामर। पर्युषण पर्व पर श्रीजी की धूमधाम से शोभायात्रा निकाली गई। अनंत चतुर्दशी पर आज श्री अतिशय कारी पारसनाथ बड़े जैन मंदिर से श्री जी की शोभा यात्रा प्रारंभ हुई। गाजे-बाजे से भजन करते हुए यात्रा मुख्य मार्गो से गुगवारा मेन मार्केट एवं महावीर जिनालय बजरिया मंदिर से होती हुई बड़े मंदिर में पहुंची। वहां पर भक्तों द्वारा कीर्तन भजन करते हुए श्री जी का अभिषेक शांति धारा एवं पूजन विधि संपन्ना हुई। शोभायात्रा में प्रशासन की गाइडलाइन के अनुसार ही संपन्ना हुई। सभी श्रद्धालु मास्क पहने हुए थे, घर-घर में भक्तों द्वारा श्रीजी की आरती की गई।

नगर में निकाली गई शोभायात्रा

देवरीकला। दशलक्षण पर्व के दसवें दिन श्रीजी की शोभयात्रा धूमधाम से निकाली गई। श्रीजी की शोभायात्रा शहर में बड़े जैन मंदिर से निकली। मुख्य मार्गों से होते हुए गांधी चौक मंदिर से विद्या विहार मंदिर होते हुए बड़े जैन मंदिर में समापन किया गया। यात्रा में भगवान का संदेश जिओ और जीने दो के नारे लगाए। श्रद्धालुओं ने भगवान का नमन कर आशीर्वाद लिया। इससे पूर्व सुबह सभी जैन मंदिरों में पूजा-अर्चना की गई। वासुपूज्य भगवान के निर्वाण कल्याणक पर निर्वाण लड्डू चढ़ाया गया।

भारतीय संस्कृति चरित्र प्रधान है

खुरई। पर्यूषण पर्व के समापन पर आर्यिका ऋजुमति माताजी ने कहा कि चारित्र प्रधान भारतीय संस्कृति है। जिसमें चरण की बाद में, आचरण की पूजा प्रथम होती है। जिसका आचरण का आईना जितना साफ और निर्मल रहता है, उसकी पूजा एवं गुणानुवाद सदा सदा होता है। जितेन्द्रिय, संयमी व्यक्ति को स्त्री तृण के समान होती है, और इच्छा रहित निर्लोभी मनुष्यों के लिए सारा संसार ही तिनके के समान दिखता है। जिसे अपनी आत्मा से राग होता है, वही उत्तम ब्रम्हचर्य धर्म के पास होता है, वहीं उत्तम साधक माना जाता है, हम भी ऐसे धर्म को पास रखें।

अनंत चतुर्दशी के दिन भगवान निकले जलविहार को

बंडा। बड़े जैन मंदिर से शांतिनाथ भगवान की शोभायात्रा गाजे बाजे के साथ निकाली गई। इस दौरान भगवान की आरती लोगों ने की। शांतिनगर जैन मंदिर में भगवान जी का अभिषेक, शांतिधारा की गई। विधायक तरवर सिंह ने गोशाला की व्यवस्थाओं हेतु पांच लाख राशि विधायक निधि से देने की घोषणा की।

नरयावली में धूमधाम से पर्युषण पर्व का समापन

नरयावली। सकल दिगंबर जैन समाज द्वारा दशलक्षण पर्व भक्ति भाव से मनाया गया। सभी लोग बच्चों सहित सुबह से मंदिर में भगवान का नित्य अभिषेक पूजन एवं शांति धारा करने के लिए पहुंचे। जैन समाज द्वारा जल यात्रा निकाली गई। यात्रा मंदिर से बस स्टैंड होते हुए पारंपरिक कुएं पर पहुंची। जहां वृतिजनों ने स्नान करके कुएं का शुद्ध जल भगवान के अभिषेक के लिए भरकर मंदिर तक लाया। दोपहर में विशेष अभिषेक पूजन इसी जल से समाज ने बड़े ही भक्ति भाव से किया।

Posted By: Nai Dunia News Network

NaiDunia Local
NaiDunia Local