बीना (नवदुनिया न्यूज)। मोतीचूर नदी उफान पर होने से सोमवार को बरदौरा गांव में जन प्रतिनिधियों को तार पर 70 फीट चलकर ध्वजारोहण करने जाना पड़ा। इस दौरान दो पंच नदी में गिरने से बाल-बाल बच गए है। नदी पर पुल न होने से ग्रामीण वर्षों से यह परेशानी झेल रहे हैं, लेकिन अब तक नदी पर पुल का निर्माण नहीं किया गया है। स्कूली बच्चों को भी इसी तरह रोज तार के ऊपर चलकर नदी पार करनी पड़ती है।

शहर से लगे बरदौरा गांव के बीच से मोचीदूर नदी निकली है। नदी गांव को दो हिस्सों में विभाजित करती है। वर्षा का मौसम शुरू होते ही आधे गांव के सामने संकट खड़ा हो जाती है। नदी उफान पर आते ही आधे गांव के घरों में कैद होकर रह जाते हैं। आवश्यक काम होने पर ग्रामीणों को तार पर चलकर नदी पार करनी पड़ती है। परेशानी की अंदाजा इिसी से लगाया जा सकता है कि सोमवार को नदी उफान पर होने के कारण सरपंच सहित अन्य जन प्रतिनधि ध्वजा रोहण करने पंचायत भवन तक नहीं पहुंच पा रहे थे। पंचायत भवन तक जाने के लिए उनके पास सिर्फ एक ही विकल्प था, जाम जोखिम में डालकर तार के ऊपर से चलना। सरपंच प्रतिनिधि मुकेश कुशवाहा, उपसरपंच, एक दर्जन पंच सहित 25 लोग तार के ऊपर चलकर ध्वजा रोहण करने पहुंचे। इस दौरान दो पंच नदी में गिरने से बाल-बाल बच गए। ग्रामीणों ने बताया कि जिस ध्वजा रोहण करने के लिए जन प्रतिनिधियों को तार पर चलना पड़ा उसी तरह वर्षा के मौसम में गांव के अन्य लोगों के साथ-साथ स्कूली बच्चों तार पर चलकर नदी पार करनी पड़ती है।

इधर जान जोखिम में डालकर निकले बच्चे

आजादी के अमृत महोत्सव पर स्कूल में आयोजित होने वाले ध्वजा रोहण कार्यक्रम में परासरी गांव के दो दर्जन से अधिक बच्चे उफान पर चल रहे स्थानीय नाले से होकर निकले। सेमरखेड़ी निवासी सीताराम ठाकुर ने बताया कि परासरी गांव के बच्चे बैधई गांव में बढ़ाई करने जाते हैं। गांव की दूरी करीब डेढ़ किलोमीटर है। दोनों गांव के बीच करीब एक किलोमीटर न तो सड़क है और दोनों गांव के बीच से निकले स्थानीय नाले पर पुलिया का निर्माण नहीं किया गया है। इसके चलते 15 अगस्त को बच्चे उफनते नाले से होते हुए ध्वजा रोहण कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे।

Posted By: Nai Dunia News Network

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