ओपी ताम्रकार। बीना।

तुलसीदास जी कहते हैं, रामहिं केवल प्रेम पियारा, सुमिरि सुमिरि नर उतरहिं पारा। राम को केवल प्रेम प्यारा लगता है और राम का नाम लेने वाला भव सागर को पार कर जाता है। ऐसे ही राम नाम के प्रेम में डूबे हैं इटावा निवासी आजाद कुरैशी। यह पिछले चालीस सालों से राम नाम का जाप करते हुए रजिस्टर पर राम नाम लिख रहे हैं। अब तक करोड़ों बार राम नाम लिखकर यह रजिस्टर राम नाम बैंक कटरा मंदिर, सिरोंजीपुर या खिरिया वार्ड स्थित रामनाम मंदिर में जमा कर चुके हैं।

हिंदू मुस्लिम सदभावना की मिसाल बन चुके आजाद कुरैशी को राम नाम लेखन की प्रेरणा गुरू पंडित स्व. श्रीराम तिवारी से मिली। 1982 से जो राम नाम का लेखन शुरू हुआ तो अब तक अनवरत जारी है। आजाद की उम्र वर्तमान में 60 वर्ष से अधिक है और जब भी इन्हें समय मिलता है यह राम नाम लिखना शुरू कर देते हैं। आजाद के छोटे भाई खुर्रम कुरैशी ने बताया कि धार्मिक सदभावना हमारे परिवार में पीढ़ी दर पीढ़ी चली आ रही है। हमारे परिजनों ने कटरा मंदिर के लिए जमीन दान की थी।

धर्म की सीमाओं से परे हैं राम

राम जाति, धर्म की सीमाओं से परे हैं। शाहजहां के समय रामायण फौजी के नाम से गद्यानुवाद हुआ था। औरंगजेब के युग में तर्जुमा ए रामायन की रचना हुई। जहांगीर के समय मुल्ला मसीही ने मसीही रामायन नामक मौलिक रचना हुई थी। 1864 में उर्दु में रामायण खुश्तर, रामायण मंजूम, रामायण बहार, रामायन मेह प्रकाशित हुई। अब्दुल रहीम खानखाना ने भी कहा था कि राम केवल हिंदुओं के नहीं, मुस्लिमों के लिए भी आदर्श हैं। कवि खुसरो ने भी अपनी मुकरियों में राम को नमन किया है।

Posted By: Nai Dunia News Network

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