बीना (नवदुनिया न्यूज)। मोतीचूर जल एवं पर्यावरण संरक्षण समिति और मातृभूमि सेवा संस्थान की ओर रेन बसेरा स्थित क्रांतिकारियों के स्तंभ पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। इस अवसर आंदोलन में शामिल हुए शहर के सेनानियों के जीवन पर प्रकाश डाला गया। कार्यक्रम में शामिल हुए लोगों ने शहर के मुख्य स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के जीवन से जुड़ी घटनाओं पर प्रकाश डाला।

कार्यक्रम की शुरुआत कीर्ति स्तंभ पर अंकित स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के नाम पर पुष्प अर्पित कर की गई। इस अवसर पर एचडी गोस्वामी ने बताया कि देश को आजाद कराने के लिए भारत छोड़ो आंदोलन में पूरा देश कूद पड़ा था। लोगों अपने प्राणों की परवाह किए बिना अंग्रेजों का सामना किया। ऐसे महापुरुषों का याद रखना प्रत्येक भारतीय का दायित्व है। उनके बताए मार्ग पर चलने से देश महान बन सकता है। संजू कैथोरिया ने बताया कि भारत छोड़ो आंदोलन देश का सबसे बड़ा आंदोलन था। इस आंदोलन के कारण अंग्रेस भारत छोड़ने पर मजबूर हो गए थे। बिट्टू राय ने कहा कि देश से बढ़कर कुछ नहीं होता, देश सर्वोपरि होता है। उन्होंने बताया कि आजादी के लड़ाई में हमारे शहर के नायक भी पीछे नहीं रहे। उस समय करीब 40 लोग क्रांतिकारियों के साथ मिलकर आजादी के आंदोलन में कूद पड़े थे। इनमें कुछ महापुरुषों को अंग्रेजों की अनेक यातनाएं झेली पड़ी और कठोर करावास भी भोगा। बंशीधर शास्त्री, नंदकिशोर मेहता, सिद्ध नाथ तिवारी, भागीरथ बिलगैया, सदाशिव राव मलकापुरकर, नन्हेलाल बुखारिया, नाथूराम नायक, नाथूराम पुजारी, रामदीन रिछारिया, आंदोलन में शामिल रहे। इनके अलावा अथक पथ संग्रहालय संचालक राम शर्मा ने भी शहर के क्रांतिकारियों पर अपने विचार व्यक्त किए। इस अवसर पर डा. रामनाथ गुर्जर, देवेंद्र नाथ तिवारी, उदयभान कुशवाहा, सूर्य प्रकाश, दिनेश कुशवाहा, राकेश सुमन, विनोद नामदेव, कल्लू रैकवार, संजू रैकवार राकेश प्रजापति, मदन कुशवाहा, मक़सूद अली मुख्य रूप से उपस्थित थे।

Posted By: Nai Dunia News Network

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