बेसहारा मवेशियों का आतंक, फसल बचाने खेतों में दिनरात रुक रहे किसान

- किसानों ने कहा कि आसपास क्षेत्र से बढ़ी संख्या में आए बेसहारा मवेशी बने मुसीबत

नरयावली। नवदुनिया न्यूज

बेसहारा मवेशी लोगों के लिए सिरदर्द बन गए हैं। हालत यह है कि नरयावली सहित आसपास क्षेत्र में बड़ी संख्या में ऐसे मवेशी ऐसे हैं, जो बेसहारा हालत में यहां- वहां घूमते हैं। मवेशियों को चारा-पानी की व्यवस्था न होने से वे दिन में तो जैसे-तैसे खेतों के आसपास लगी हरियाली को चर लेते हैं, लेकिन रात के समय यह सागर- बीना मार्ग पर बैठे नजर आते हैं, इससे हादसे की आशंका बनी रहती है।

सामने नहीं आते पशुपालक

नरयावली क्षेत्र के लोगों का कहना है कि क्षेत्र में बेसहारा मवेशियों की संख्या बढ़ती जा रही है। वर्तमान में दो सौ से लेकर ढाई सौ की संख्या में ऐसे जानवर हैं, जो बेसहारा घूम रहे है। इन मवेशियों का पालक कौन है, यह कोई भी बताने को तैयार नहीं है। लोगों का कहना है कि आसपास गांव के लोग जब तक गाय दूध देती है, तब तक तो अपने पास रखते हैं, लेकिन जैसी ही गाय दूध देना बंद कर देती है, वे उसे बेसहारा छोड़ देते हैं। कई मवेशी तो ऐसे हैं, जो आसपास गांव के लोग यहां आकर छोड़कर गए, जो खेती- किसानी के वक्त फसलों को नुकसान पहुंचाते हैं, अब फसलें कट गई हैं, तो खेतों की आसपास की हरियाली चरने के बाद शाम को सड़क पर आ जाते हैं।

खेतों की सुरक्षा में गुजर रहा रातदिन

गांव के उप सरपंच नंदलाल साहू, संतोष साहू, कमलेश साहू आदि का कहना है कि फसल बोवनी के बाद से ही खेतों की रखवाली करना पड़ रही हैं। बेसहारा मवेशियों की वजह से हालत ऐसी है कि किसी ने किसी व्यक्ति को खेत में रहना ही पड़ता है। जरा सी नजर चूकने पर मवेशी खेत में घुसकर नुकसान पहुंचाने से नहीं चूकते है। शिवम यादव का कहना है कि सबसे अधिक परेशानी उन लोगों की है, जिनके परिवार में ज्यादा सदस्य नहीं हैं। ऐसे में उन्हीं खेतों की रखवाली के लिए अतिरक्ति खर्च करना पड़ रहा है। पंक्षियों को तो बिजूका रखकर भगा सकते हैं, लेकिन मवेशियों को भगाने के लिए व्यक्ति की ही जरूरत पड़ती है। ऐसे में किसान बहुत परेशान हैं। वे खेतों में रात-रातभर जागकर रखवाली कर रहे हैं। वहीं बेसहारा मवेशी घटने की जगह बढ़ते जा रहे हैं।

आए दिन हो रहे हादसे

बेसहारा मवेशी दिन में यहां- वहां घूमते हैं, वहीं शाम होते ही सागर- बीना मार्ग की मुख्य सड़क पर एकत्रित हो जाते हैं। सड़क पर मवेशियों के बैठने की वजह से रात के समय आए दिन हादसे हो रहे हैं। वाहन चालकों का कहना है कि हार्न बजाने के बाद भी यह मवेशी सड़क से नहीं हटते। कुछ ही दिन में नरयावली से लेकर जरुवाखेड़ा के बीच में एक दर्जन से अधिक हादसे मवेशियों के सड़कों पर बैठने की वजह से हुए हैं।

जर्जर हाल में पहुंचा कांजी हाउस

गांव में ग्राम पंचायत का कांजी हाउस भी बना हुआ है, लेकिन देखरेख के अभाव में यह जर्जर हो गया है। कांजी हाउस की दीवारों गिर चुकी हैं। पहले खेतों में मवेशी घुसने पर खेत मालिक पशुओं को कांजी हाउस में बंद कर देते थे, लेकिन अब कांजी हाउस की हालत ऐसी नहीं है कि इसमें मवेशियों को रखा जा सका। वहीं लोगों का कहना है कि ऐसे मवेशियों को कांजी हाउस में बंद कर सकते हैं, जिनके पशुपालकों का पता हो। उनसे मवेशियों पर खर्च होने वाली राशि जुर्माना के रूप में वसूल सकते हैं, लेकिन इन दिनों बेसहारा मवेशी घूम रहे हैं, इनको कांजी हाउस में रखने पर केवल राशि ही खर्च होती है। इन्हें छुड़ाने के लिए कोई नहीं आता। किसानों का कहना है कि बेसहारा मवेशियों का आतंक बढ़ने की वजह से फसलों के वक्त खेतों की रखवाली के लिए 24 घंटों खेतों पर बैठने पड़ा है। क्षेत्रवासियों का कहना है कि जो लोग मवेशियों को बेसहारा हालत में छोड़ रहे हैं, उनकी पहचान कर कार्रवाई होना चाहिए।