सागर(नवदुनिया प्रतिनिधि)। श्री महावीर दिगंबर जैन मंदिर नेहानगर प्रांगण में चल रहे श्री समवशरण एवं श्री सिद्धचक्र महामण्डल विधान के प्रथम दिन रविवार को मुनिश्री कुंथुसागर महाराज ने कहा कि अष्टानिका महापर्व पर देवता गण स्वर्ग में नंदीश्वरदीप जा करके भगवान का अभिषेक और पूजन किया करते हैं। इसी उपलक्ष्‌य में यहां पर जैन समाज के लोगों ने सौधर्म इंद्र आदि बन कर के 24 समवशरण की रचना करके सिद्धचक्र महामंडल विधान एवं समवशरण विधान का आयोजन किया है, जिसमें भगवान का भक्तिभाव से अभिषेक, पूजन होगा। भगवान के श्री चरणों में कोरोना महामारी जैसे रोग से देश मुक्त हो इसलिए शांति महायज्ञ भी किया जाएगा, जिसमें सभी श्रद्धालु अपने तन, मन, धन से समर्पित होकर के भगवान की भक्ति करेंगे। इस दौरान मुनिश्री ने कहा कि भगवान की गुणों के प्रति अनुराग रखना भक्ति कहलाती है। इस भक्ति के माध्यम से श्रावक भगवान बनने के भाव भाता है, क्योंकि भगवान की भक्ति का उद्देश्य मात्र भगवान बनना ही होना चाहिए बीच में किसी प्रकार की धन दौलत की मांग नहीं होना चाहिए और इसी को निष्काम भक्ति योग कहते हैं। उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति समवशरण में आकर के भगवान की भक्ति करता है उसकी सारी मनोकामना पूर्ण होती चली जाती हैं और जीवन सुख समृद्धि से भर जाता है। जैसे वृक्ष के नीचे खड़े होकर के छाया को मांगना नहीं पड़ता वैसे भगवान की शरण में आकर के कुछ मांगना नहीं पड़ता सब सुख अपने आप प्राप्त होते चले जाते हैं। जैसे नदियां स्वयमेव ही सागर की ओर सिमट कर के चली जाती हैं वैसे ही भगवान के भक्तों के पास सारी संपत्ति सिमट कर के आ जाती हैं।

सिंह और गाय एक साथ भगवान की देशना सुनते हैं

यहां पर समवसरण में चाहे तिर्यंच हो, पशु हो, चाहे मनुष्य हो सभी आकर के भगवान की भक्ति करते हैं। समवशरण का एक प्रभाव होता है कि शेर और गाय दोनों एक साथ आकर के भगवान के देशना को सुनते हैं अर्थात सिंह हिंसा करना भूल जाता है और गाय भय से मुक्त हो जाती है। यह सब समवशरण की महिमा हुआ करती है। सांप और नेवला भी एक साथ आकर के यहां पर भगवान के वचनों को सुनते हैं। यह समवशरण की महिमा है जहां पर समवशरण लगता है वहां आसपास किसी प्रकार का दुर्भिक्ष फैला नहीं करता। जहां पर भगवान विराजमान होते हैं और उपदेश देते हैं ऐसी सभा का नाम समवशरण कहलाता है।

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रहली में विश्व शांति महायज्ञ का शुभारंभ

रहली के पास स्थित चांदपुर ग्राम में श्री 1008 सिद्धचक्र महामंडल विधान का शुभारंभ हुआ। बाल ब्रह्मचारी अरुण भैया एवं संजीव भैया कटंगी के मार्गदर्शन सानिध्य एवम विधानाचार्य अंकित भैया भिलाई है। विधान में महायज्ञ नायक सिंघई खेमचंद, सुगन्धी, यज्ञ नायक प्रदीप, कल्पना, कमलेश वंदना हैं। इस अवसर पर मोदी महेंद्र कुमार, ज्ञानचंद, राजेंद्र, उदयचन्द, खेमचन्द, रूपचंद केवलचंद, राजेंद्र बरकोटी, सुखचंद जैन, गुलाब जैन, अशोक जैन, विमल भागचंद चौधरी, हुकुम जैन, अशोक जैन, ओमकार मुकेश जैन, सुशील जैन उपस्थित थे।

Posted By: Nai Dunia News Network

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