सागर (नवदुनिया प्रतिनिधि)। शनिवार को महार रेजिमेंट की ट्रेनिंग लेने वाले 248 नव सैनिकों की पासिंग आउट परेड आयोजित की गई। पासिंग आउट परेड के बाद नव सैनिकों ने तिरंगे को छूकर देश पर मर मिटने की शपथ ली। दस महीने के कठिन प्रशिक्षण के बाद यह नव सैनिक भारतीय सेना में शामिल हुए। सागर के महार रेजिमेंट केंद्र में प्रशिक्षण लेने वाले यह सैनिक अब देश के कोने-कोने में जाकर राष्ट्र की सेवा करेंगे। महार रेजिमेंट के अनुसुइया प्रसाद परेड ग्राउंड में आयोजित पासिंग परेड की सलामी ब्रिगेडियर नवनीत जरयाल ने ली। नवसैनिकों की परेड के बाद महार रेजिमेंट का आदर्श वाक्य धयश सिद्धि का जयघोष किया, जिससे पूरा रेजिमेंट क्षेत्र गूंजायमान में हो उठा। इस मौके पर बिग्रेडियर जरयाल ने कहा कि आज का दिन आपक का जीन में बहुत महत्पूर्ण है। इसे आप हमेशा स्मरण रखिए। आज आप भारत की महान सेना के अंग बन गए हैं। अब अपना जीवन देश के लिए समर्पित करना है। जहां एक ओर जवान का जीवन अनुशासन, गर्व व मर्यादा का प्रतीक है। वहीं यह यह जीवन खतरों, चुनौती, कठिनाइयों से भरा होता है, लेकिन वफादारी ईमानदारी, विश्वास व मिलजुकर कर काम करने से यह बाधाएं दूर हो जाती हैं। आप जानते हैं कि महार रेजिमेंट का इतिहास गर्व से भरा है। इस रेजिमेंट के जवानों ने देश के लिए प्राण न्योछावर किए गए हैं। अब इस गर्व व सम्मान को बढ़ाना आपका काम है। इसके लिए आपको अतिरिक्त परिश्रम करना पड़ेगा। जवान को हमेशा सतर्क व सचेत रहना है। इसकी ट्रेनिंग आपको दी गई है।

कोरोना संक्रमण के चलते शामिल नहीं हो स्वजन

महार रेजिमेंट में आयोजित पासिंग परेड का आयोजन भव्य तरीके से किया गया, लेकिन इस बार कोरोना संक्रमण के चलते कुछ कमियां रहीं। इस परेड में नव सैनिकों के स्वजन शामिल नहीं हो सके। दो साल पहले जब पासिंग परेड हुई थी। उस समय नव सैनिकों के स्वजन देश के कोने-कोने से सागर आए थे। उन्होंने अपने बेटों को सेना में शामिल होने के लम्हे को देखा था। इस साल परेड ग्राउंड पर सेना के अधिकारी ही शामिल थे। कोरोना गाइड लाइन का पालन किया गया था। परेड में स्वजनों के शामिल न हो पाने की कमी नव सैनिकों को भी खली। उन्होंने कहा कि यदि इस समय उनके माता-पिता व अन्य स्वजन साथ होते तो और बेहतर रहता। परेड के बाद सभी नव सैनिकों ने अधिकारियों के साथ समूह फोटो खिंचाई।

ट्रेनिंग में बेहतर प्रदर्शन करने वाले नवसैनिक हुए सम्मानित

10 महीने की ट्रेनिंग करने नव सैनिकों में उत्कृष्ट कार्य के लिए ब्रिगेडियर नवनीत जरयाल ने मैडल प्रदान किए। बेस्ट एलएमजी फायरिंग, ओवर ऑल बेस्ट, बेस्ट ड्रिल, वेस्ट इन पीटी, बेस्ट राइफल फायर, वेस्ट नाइट फायर में पहला स्थान पाने वाले नव सैनिकों को यह मैडल दिए गए।

सुबह 4.30 से शुरू होती थी ट्रेनिंग

महार रेजिमेंट के इन नए रंगरूटों ने दस महीने तक कठिन परिश्रम किया। इनकी दिनचर्या में शारीरिक प्रशिक्षण, ड्रिल, हथियार चलाने का प्रशिक्षण, फायरिंग और 21 वीं सदी के पारंपरिक युद्ध के साथ-साथ कम तीव्रता के संघर्ष की अनियमितताओं को लेने के लिए एक अकादमिक पाठ्यक्रम शामिल रहा। सेना में शारीरिक प्रशिक्षण सबसे महत्वपूर्ण है जिसकी शुरुआत शुबह 4.30 हो जाती है। इस पाठ्यक्रम में 1.6 किमी से 12 किमी की दौड़ और 20 किलोग्राम वजन के साथ 16 व 32 किलोमीटर की तेज चाल शामिल है। सबसे कठिन प्रशिक्षण विंध्य पहाड़ियों, जंगलों और ग्रामीण इलाकों में 40 किलोमीटर से अधिक दूरी का एक नेविगेशन अभ्यास है। प्रत्येक प्रशिक्षु ने इस शारीरिक कौशल कार्य को बड़ी कुशलता के साथ किया। प्रशिक्षण के बाद पासिंग आउट परेड से सभी नव सैनिक प्रसन्ना थे।

Posted By: Nai Dunia News Network

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