सागर (नवदुनिया प्रतिनिधि)। संभागीय मुख्यालय होने के बाद भी सागर जिला अस्पताल में सुबह के समय ओपीडी में डॉक्टरों की कमी बनी रहती है। दो डॉक्टर ओपीडी में बैठते हैं जो मरीजों को देखते है। बाकी डॉक्टर्स के वार्डों में होने की जानकारी दी जाती है, लेकिन सोमवार को सुबह 9.30 से लेकर 10 बजे तक जिला अस्पताल के एक से लेकर पांच वार्डों का निरीक्षण किया गया तो यहां एक भी डॉक्टर नहीं मिला। वहीं मौसमी बीमारियों का प्रकोप होने की वजह से ओपीडी तीन सौ के करीब पहुंच जाती है। सोमवार को सुबह 9.30 बजे के करीब जब जिला अस्पताल का निरीक्षण किया गया तो ओपीडी में एक महिला व एक पुरुष डॉक्टर्स बैठे थे। ये ही अस्पताल में आने वाले मरीजों का उपचार कर रहे थे। सामने ही कक्ष क्रमांक 16 में नाक, कान, गला रोग, दंत रोग विशेषज्ञ, क्षय व छाती रोग विशेषज्ञ के कक्ष भी बने हैं, लेकिन वे खुले तो थे लेकिन कोई डॉक्टर्स मौजूद नहीं था।

दवा वितरण केंद्र पर एक व एक्सरे-मशीन कक्ष खाली

वहीं दवा वितरण केंद्र की बात करें तो यहां एक कर्मचारी मौजूद था। एक्स-रे मशीन क्रमांक एक व दो दोनों के कक्ष तो खुले थे, लेकिन कक्षों में कोई भी कर्मचारी मौजूद नहीं था। महिला वार्ड क्रमांक एक में कोई डॉक्टर भ्रमण के लिए नहीं पहुंचा था। यहां के नर्स स्टाफ का कहना था कि 11 बजे के बाद डॉक्टर आते हैं। यही हाल वार्ड क्रमांक चार व पांच का था। यहां वार्ड की सफाई हो रही थी। मरीजों के परिजनों को बरामदे में भगा दिया गया था। यहां के मरीजों ने बताया कि डॉक्टर्स दस के बाद ही मरीजों को देखने आते हैं।

ओपीडी में दो डॉक्टर्स ही रहते हैं

यह सही है कि ओपीडी में सुबह दो डॉक्टर्स की मौजूद रहते हैं। शेष डॉक्टर्स वार्डों में भ्रमण करते हैं। सोमवार को एक डॉक्टर जेल व दो सुबह टीकाकरण के लिए निकलने वाली जागरूकता साइकिल रैली में गए थे। इसके अलावा दो डाक्टर्स की ड्यूटी डफरिन में थी। एक डॉक्टर्स पोस्टमार्टम के लिए गए थे। हो सकता है कि सोमवार को कुछ डॉक्टर्स लेट आए हों, लेकिन वे नियमित व समय पर ड्यूटी पर पहुंचते हैं। इसकी मानीटरिंग सतत की जाती है।

डॉ. ज्योति चौहान, सिविल सर्जन

बगैर कर्मचारियों के चल रहा अस्पताल, भवन की हालत जर्जर

सागर। रहली ब्लॉक के चांदपुर उप स्वास्थ्य केंद्र में डॉक्टर सहित अन्य सभी पद खाली हैं। इससे लोगों को उपचार के लिए झोलाछाप डॉक्टरों के यहां जाना पड़ता है। लोगों का कहना है कि चांदपुर अस्पताल में डॉक्टर पदस्थ करने की मांग लंबे समय से करते आ रहे हैं, लेकिन यहां आज तक इस पद को नहीं भरा गया। चांदपुर अस्पताल में चांदपुर सहित दर्जनों गांव के लोग आश्रित हैं,जो इलाज के लिए रहली या सागर जाते हैं। स्टाफ न होने से अस्पताल भवन पूरी तरह बदहाल है। भवन के आसपास गंदगी पसरी हुई है। शाम के बाद यहां आसामाजिक तत्वों का जमावड़ा लग जाता है, जहां जमकर शराबखोरी की जाती है। गांववालों का कहना है कि अस्पताल की बदहाली का अंदाजा भवन के अंदर झांक कर ही लगाया जा सकता है। इसमें जो पलंग बिछे हैं, उनमें जंग लग चुकी है। अंदर सालों से किसी भी तरह की सफाई नहीं हुई है। चारों ओर गंदगी फैली हुई है। अस्पताल परिसर में कई झाड़ उगे हैं, जहां जाने से डर लगता है। गांववालों के अनुसार अस्पताल परिसर केवल जुआरियों व शराबियों के लिए सबसे मुफीद जगह है। शाम के बाद यहां लोग बैठकर शराबखोरी करते हैं। गांव के लोगों का कहना है कि गांव में उप स्वास्थ्य केंद्र तो है, लेकिन डॉक्टर नहीं हैं। इलाज के नाम पर केवल बच्चों को टीकाकरण ही किया जाता है। साफ-सफाई न होने से अस्पताल के अंदर व बाहर गंदगी बढ़ती जा रही है। स्वास्थ्य विभाग इस ओर ध्यान नहीं दे रहा है। उप स्वास्थ्य केंद्र में प्रसव तक की सुविधा नहीं है। स्वास्थ्य कार्यकर्ता के नाम पर केवल दो कर्मचारी पदस्थ हैं। महिलाओं को प्रसव के लिए यहां से 11 किमी दूर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र रहली जाना पड़ता है। वहीं उपचार कराने के लिए लोग गांव के ही डॉक्टरों पर आश्रित हैं।

इस संबंध में सरपंच रूपकिशोर तिवारी का कहना है कि स्वास्थ्य केंद्र में सुविधाएं बढ़ाने की मांग कई बार की है। सरकारी अस्पताल में शीघ्र से शीघ्र डॉक्टर भेजा जाना चाहिए।

शाहपुर में मरीज तो आए, लेकिन डॉक्टर्स नहीं

सागर। शाहपुर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में पचासों गांव के लोग उपचार के लिए आते हैं, लेकिन यहां डाक्टर्स की कमी है। सोमवार को सुबह करीब एक दर्जन लोग यहां उपचार कराने आए लेकिन डॉक्टर एक भी मौजूद नहीं था। ऐसे में मरीजों या तो क्षेत्र के निजी अस्पतालों में ही इलाज कराना पड़ता है, या इलाज के लिए सागर आना पड़ता है। इसमें समय, श्रम के साथ-साथ रुपयों की भी बर्बादी होती है। लोगों के मुताबिक शाहपुर स्वास्थ्य केंद्र डॉक्टरों के आवासों की सुविधा दी है, लेकिन हालत यह है कि यहां एक भी डाक्टर्स पदस्थ नहीं है। भारतीय किसान संघ के जिला उपाध्यक्ष एड. जगमोहन सिंह का कहना है कि अस्पताल में डॉक्टर नहीं है। यहां केवल कम्पाउंडर सहित अन्य नर्सिंग स्टॉफ पदस्थ है, वह भी समय पर नहीं मिला। श्री सिंह के मुताबिक स्वास्थ्य विभाग की सेवाएं आपातकालीन सेवाओं में आने की वजह से डॉक्टर सहित अन्य स्टाफ को 24 घंटे मुख्यालय पर रहने के आदेश सरकार के हैं, लेकिन यहां डॉक्टर ही नहीं है तो इस नियम का पालन क्या होगा। चंद्रिका प्रसाददुबे के मुताबिक प्रथमिक स्वास्थ्य केंद्र शाहपुर में करीब पचास गांव के लोग इलाज कराने आते हैं। इनमें रहली, बंडा, नरयावली विधानसभा के साथ-साथ दमोह जिले की पथरिया विधानसभा के गांव शामिल हैं। रेलवे का मुख्यालय होने की वजह से सभी लोगों का यहां पहुंचना सहज होता है। इसके बाद भी स्वास्थ्य सुविधाओं के प्रति स्टाफ की लापरवाही से लोग परेशान हैं। डॉक्टरों के न मिलने से प्रतिदिन कई लोग इलाज कराने के लिए सागर जाने को मजबूर होते हैं।

Posted By: Nai Dunia News Network

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