सागर(नवदुनिया प्रतिनिधि)। नवरात्र पर्व के चलते सुबह-शाम देवी मंदिरों में मातारानी के जयकारे गूंज रहे हैं। सुबह से मातारानी को जल-फल और फूल अर्पित करने के लिए मंदिरों में कतारें लगी रही। जिन घरों में जवारे बोए गए हैं वहां गुरुवार को भी कुलदेवी की पूजा हुई। नवरात्र की नवमीं पर दुर्गा प्रतिमाओं के दर्शनों के लिए भक्तों की भीड़ उमड़ पड़ी, जिससे जगह-जगह वाहनों का जाम लगता रहा। विजया दशमीं पर्व के चलते पीटीसी मैदान में नगर निगम 31 फीट ऊंचे रावण के पुतले का दहन करेगा। नवरात्र पर्व के चलते शहर में चारों ओर मातारानी के मंदिरों में भक्तों की भीड़ उमड़ रही है।

गोपालगंज वार्ड स्थित काली बाड़ी मंदिर में बंगाली समाज मां दुर्गा की लोहान लेकर नृत्य करते हुए माता की आरती उतारी जा रही है। समाज के लोगों ने नगाड़ों की एक अलग धुन में दोनों हाथों में खप्पर के अंदर धूनी से माता दुर्गा की आराधना करते हैं जो शहर के लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र होती है। शहर के अन्य स्थानों पर भी मातारानी को विभिन्ना प्रकार के व्यंजनों का भोग अर्पित किया जा रहा है। कोरोना महामारी के बाद भी भक्तों की भीड़ के चलते दुर्गा पंडालों के आसपास मेले जैसा माहौल नजर आया। सदर, कटरा बाजार एवं बड़ा बाजार क्षेत्र में खेल-खिलौने से लेकर खानपान की कई दुकानें भी लगी हुई थी। कई लोग दर्शनों के बाद मेले में खरीदी करते हुए भी नजर आए।

गरबा महोत्सव की धूम, देर रात तक नृत्य कर रही महिलाएं

नवरात्र के चलते शहर में जगह-जगह गरबा महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है। कुछ सामाजिक संगठन देवी भजनों पर गरबा नृत्य का आयोजन किया जा रहा है। हिंदू संगठनों के प्रदर्शन के बाद इस बार कई होटलों में जो आयोजन किए जाते थे उस पर रोक लगाई गई थी, लेकिन कुछ सामाजिक संगठन परंपरानुसार सिर्फ देवी भजनों पर पारंपरिक वेशभूषा में ही मातारानी की आराधना की। वहीं कुछ दुर्गा पंडालों में छोटी-छोटी कन्याओं को गरबा व डांडियां नृत्य कर रही हैं।

आज भी होगा कुलदेवी का पूजन, जगह-जगह हो रहे कन्याभोज

इस बार आठ दिनों का नवरात्र महोत्सव होने के कारण कई घरों में बुधवार को अष्टमी पूजन हुआ, लेकिन कई परिवार जिन्होंने अपने घरों में जवारों की स्थापना की है उन लोगों द्वारा गुरूवार को अष्टमी पर्व मनाया गया। पूजन में शामिल होने के लिए दूसरे शहरों में रहकर पढ़ाई व नौकरी करने वाले भक्त अपने-अपने घरों की ओर रुख करने लगे हैं। लोगों की भीड़ के चलते ट्रेनों और बसों में यात्रियों की भीड़ उमड़ रही है। वहीं दशहरा पर सुबह से घरों में कुलदेवी-देवताओं का पूजन किया जाएगा। नवरात्र के चलते मंदिरों में हवन-पूजन के अलावा मातारानी की महाआरती और 56 भोग अर्पित किए गए। वहीं घरों में कन्याओं को भोजन कराके उन्हें उपहार बांटे जा रहे हैं तो वहीं कई भक्त मातारानी के दर्शनों के लिए पैदल ही मैहर और रानगिर मंदिर पहुंच रहे हैं।

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प्रतिमाओं के साथ आज होगा जवारों का विसर्जन

पं. शिवप्रसाद तिवारी के अनुसार मंदिरों और घरों में चल रहे सप्तशती पाठ आदि के हवन गुरुवार को परंपरानुसार किए गए। हालांकि जवारे विसर्जन नौ दिन के अनुसार शुक्रवार की सुबह होंगे। पंडालों में स्थापित देवी प्रतिमाओं का विसर्जन भी शुक्रवार को सुबह से लेकर देर रात तक किया जा सकेगा। व्रत का पारण भी लोग गुरुवार शाम को किया, लेकिन जिन घरों में जवारे बोए गए है या उन्होंने कही देवी जी के खप्पर बोआए हैं तो वो लोग व्रत का पारण शुक्रवार की सुबह जवारे विसर्जन दर्शन के बाद ही करेंगे।

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आज निकलेगा चल समारोह, विसर्जन में दस से ज्यादा लोगों की अनुमति नहीं

विजया दशमीं पर शहर में गाजे-बाजे के साथ दुर्गा प्रतिमाओं का विसर्जन होगा। शहर में निकलने वाले चल समारोह के चलते जिला प्रशासन ने लोगों से कोरोना गाइडलाइन का पालन करते हुए प्रतिमाओं के विसर्जन की अपील की है। चल समारोह में लोगों की भीड़ को लेकर प्रशासन द्वारा अनुमति लेने के सख्त निर्देश दिए गए हैं और लोगों से कोरोना गाइडलाइन का पालन करने की अपील की है, लेकिन तीन दिन पूर्व हिंदू संगठनों ने कलेक्ट्रेट में विरोध जताया था। चल समारोह में सभी दुर्गा प्रतिमाएं राधा तिराहा से अप्सरा टॉकीज के मार्ग पर एकत्रित होंगी। चल समारोह राधा तिराहा से कटरा मस्जिद, तीनबत्ती, कोतवाली, चमेली चौक, मोतीनगर चौराहा होते हुए लेहदरा नाका पहुंचेगा। यहां बड़ी नदी में प्रतिमाएं विसर्जित की जाएंगी। कलेक्टर ने निर्देश दिए हैं कि प्रतिमा विसर्जन के दौरान 10 से ज्यादा लोग शामिल न हों। कलेक्टर दीपक आर्य ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि विसर्जन के दौरान कोविड-19 रोकथाम से संबंधित समस्त गाइडलाइन का पूरा पालन करें।

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मछली और नीलकंठ देखने जाएंगे

दशहरा के दिन नीलकंठ पक्षी का दर्शन शुभ माना जाता है। साथ ही मछलियों के दर्शन देखने की परंपरा चली आ रही है। कुछ जगह लोग आज भी चली आ रही परंपरा के दिन बोतलों में पानी भरकर मछलियों के दर्शन कराने घर-घर जाते हैं। वहीं बड़ी संख्या में लोग नीलकंठ के दर्शन करने आसपास के जंगलों में भ्रमण करते हैं। खेल परिसर के आसपास, कनेरादेव, कठवापुल के पास लोग नीलकंठ के दर्शनों के लिए पहुंचेंगे।

Posted By: Nai Dunia News Network

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