बीना (नवदुनिया न्यूज)। किसानों ने लगातार चार माह पसीना बहाकर मक्का की पैदावर की, लेकिन उन्हें मंडी में उपज का उचित मूल्य नहीं मिल रहा है। शासन ने मक्का का समर्थन मूल्य 1870 रुपये निर्धारित किया, जबकि मंडी में मक्का एक हजार रुपये क्विंटल खरीदी जा रही है। इससे मक्का बेचने आ रहे किसानों की आंखों से आंसू निकल रहे हैं। बावजदू इसके नेता और अधिकारियों ने बीना में मक्का का समर्थन मूल्य खरीदी केंद्र स्वीकृत कराने का प्रयास भी नहीं किया। इसके चलते किसानों को मजबूरी में अपनी उपज माटीमोल बेचनी पड़ रही है।

बीना तहसील में सैकड़ों किसानों ने करीब तीन हजार हेक्टेयर में मक्के की फसल बोई थी, लेकिन प्रशासनिक अधिकारियों को इसकी जानकारी तक नहीं है। किसानों के हितों को लेकर अधिकारी इतने उदासीन रहेंगे तो उन्हें उनका हक कैसे मिल सकता है। वहीं दूूसरी ओर किसानों पर राजनीति करने वाले सत्ता पक्ष और विपक्ष के नेताओं ने भी कभी यह जानने का प्रयास नहीं किया कि मंडी में किसानों को उपज का उचित मूल्य मिल रहा है या नहीं। खरीफ सीजन की खरीदी शुरू हुए करीब एक माह बीच चुका है, लेकिन किसी भी जन प्रतिनिधि या पदाधिकारी ने मंडी जाकर किसानों का दुख, दर्द समझने का प्रयास नहीं किया। वर्तमान में दर्जनों किसान मंडी में मक्का बेचने आ रहे हैं। डाक में व्यापारियों की बोली सुनते ही किसानों की आंखों से आसू निकलने लगते हैं। शासन ने जिस जिंस का मूल्य 1870 रुपये तय किया वह मंडी में मजह एक हजार रुपये क्विंटल बिक रही है। यदि अधिकारियों और जन प्रतिनिधियों ने समर्थन मूल्य खरीदी केंद्र शुरू कराने के लिए प्रयास किया होता तो किसान अपनी सुविधा से समर्थन मूल्य पर मक्का बेचकर मुनाफा कमा सकते थे। लेकिन किसानों के पास विकल्प न होने के कारण अपनी उपज माटीमोल बेचने मजबूर हैं।

अच्छा भाव मिलने की थी उम्मीद

मंडी में मक्का बेचने आए गोदना गांव निवासी राजकुमार ठाकुर ने बताया कि साढ़े तीन एकड़ में मक्का बोई थी। इसमें 25 क्विंटल पैदावार हुई है। किसान ने कहा कि उन्हें उम्मीद थी कि इस पर उत्पादन कम होने से भाव अच्छा रहेगा, लेकिन हुआ उसके उलट। मंडी में मक्का अधिकतम 1 हजार रुपये प्रति क्विंटल बिक रही है। किसान भागीरथ ने बताया कि उन्होंने 3 एकड़ में मक्का बोई थी, लेकिन बारिश के कारण उत्पादन प्रभावित हुआ है। लगातार चार माह मेहन करने के बाद सिर्फ 15 क्विंटल पैदावर हुआ है। वहीं दूसरी ओर समर्थन मूल्य का लाभ न मिलने से मंडी में पूरी उपज के सिर्फ 15 हजार रुपये मिले हैं। यदि अधिकारी और जन प्रतिनिधियों ने प्रयास किया होता तो बीना में समर्थन मूल्य खरीदी केंद्र शुरू हो सकता था और किसानों सैकड़ों किसानों को समर्थन मूल्य का लाभ मिल सकता था।

मैंने प्रयास किया था

मक्का की खरीदी के लिए मसर्थन मूल्य खोलने के लिए मैंने प्रयास किया था, लेकिन केंद्र स्वीकृत नहीं हुआ। यह बात बिल्कुल सही है कि समर्थन मूल्य खरीदी केंद्र शुरू न होने से किसानों को मजबूरी में अपनी उपज कम दामों पर बेचनी पड़ रही है।

बीएल मालवीय, डिप्टी डायरेक्टर, कृषि विभाग, सागर

Posted By: Nai Dunia News Network

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