Sagar News: शत्रुघन केशरवानी, सागर (नवदुनिया प्रतिनिधि)। थ्री इडियट फिल्म की तर्ज पर सागर निवासी एवं दिल्ली के नॉर्दर्न रेलवे डिवीजनल हॉस्पिटल में कार्यरत एक दिव्यांग लैब टैक्नीशियन ने रियल लाइफ में असली हीरो की भूमिका अदा की है। चलती ट्रेन में अचानक महिला को प्रसव पीड़ा होने पर उसने दिल्ली की महिला सर्जन से वीडियो कॉल पर बात करते हुए शेविंग ब्लेड और ऊनी शॉल के धागे की मदद से नॉर्मल डिलीवरी कराई है। प्रसव के बाद जच्चा, बच्चा दोनों स्वस्थ हैं।इस मामले पर मंंत्री पीयूष गोयल ने भी ट्वीट क‍िया

मोतीनगर से भोपाल रोड स्थित मुस्लिम समाज के कब्रिस्तान गेट के सामने रहने वाले किसान हीरालाल प्रजापति के छोटे पुत्र सुनील प्रजापति दिल्ली के नॉर्दर्न रेलवे डिवीजनल हॉस्पिटल में लैब टैक्नीशियन के पद पर कार्यरत हैं। शनिवार-रविवार की रात मप्र संपर्क क्रांति से सागर लौट रहे थे।

इस दौरान अलवर से दमोह जा रही किरण अहिरवार को चलती ट्रेन में रात 8 बजे अचानक प्रसव पीड़ा हुई तो वह दर्द से कराहने लगी। इस आवाज को सुनकर पास वाली सीट पर बैठे सुनील प्रजापति ने महिला के साथ सफर कर रहे उसके 18 वर्षीय भाई को अपना परिचय देते हुए कहा कि यदि उन्हें कुछ दिक्कत होती है तो मुझे बताना। इस दौरान उन्होंने फोन कर मथुरा रेलवे अस्पताल के कर्मचारियों को सूचित किया।

मथुरा के 30 किलोमीटर पहले हुआ बेटे का जन्म

ट्रेन मथुरा रेलवे स्टेशन पहुंच पाती इसके पहले ही महिला का दर्द और बढ़ गया, जिसके बाद महिला के परिजन ने लैब टेक्नीकिशयन को सूचित किया। बी-3 बोगी में ही कुछ दूर बैठी एक महिला को उन्होंने मदद के लिए बोला तो वह पहले डरने लगी, लेकिन समझाइश देने के बाद उन्होंने हिम्मत की और डिलीवरी कराने शॉल पकड़कर सहयोग किया। इसके बाद सुनील ने दिल्ली में सीनियर सर्जन डॉ. सुपर्णा सेन से चर्चा की और ट्रेन में ही वीडियो कॉलिंग के द्वारा उनका मार्गदर्शन लेकर बच्चे की डिलीवरी कराई। ट्रेन में आवश्यक उपकरण नहीं थे तो सुनील ने अपनी नई शेविंग ब्लेड निकालकर बच्चे की नाल काटी और ऊनी शॉल से नाल को बांधकर बच्चे को उसके परिजन को सौंप दिया।

तीन बार हो चुका था गर्भपात, ट्रेन में हुई नॉर्मल डिलीवरी

किरण अहिरवार के भाई मोहन अहिरवार का कहना है कि 6 साल की एक बेटी के बाद महिला का तीन बार गर्भपात हो चुका है और इस बार नॉर्मल डिलीवरी से तंदुरुस्त बेटा हुआ है। मथुरा रेलवे स्टेशन पर पहुंचकर वहां एंबुलेंस व अन्य डॉक्टर पहले से पहुंच गए थे, जिसे वहां के रेलवे अस्पताल में भर्ती कराया। सुनील भी मथुरा स्टेशन पर ही उतर गए। सोमवार सुबह सागर लौटे। को जब वह दमोह जा रहे थे तो सागर रुकते हुए एक बार फिर सुनील प्रजापित को धन्यवाद दिया और दमोह निकल गए।

तीन बार पीएससी की परीक्षा पास कर चुके हैं सुनील

सुनील इसके पूर्व तीन बार एमपी पीएससी की परीक्षा पास कर चुके हैं, लेकिन इंटरव्यू क्लीयर नहीं कर पा रहे थे। इस साल उन्होंने दिल्ली से ही एलएलबी की पढ़ाई भी पूरी कर ली है। सुनील ने बताया कि यू-ट्यूब में वह ये सब पहले देखते आए हैं और पढ़ाई के दौरान भी कुछ जानकारी मिलती रही है। उन्होंने कहा कि कोरोना महामारी के समय हम लोगों ने बहुत परेशानी उठाई है और सभी स्वास्थ्यकर्मियों के लिए मेरा संदेश है कि वे यह न सोचें की वह ड्यूटी पर हैं या नहीं, जब कोई मरीज मिले उसकी तुरंत मदद करें। सुनील मकरोनिया नगर पालिका में कंटेन्जेंसी का काम देख रहे संतोष प्रजापति एवं क्रेशर संचालक विनोद प्रजापति के छोटे भाई हैं।

Posted By: Hemant Kumar Upadhyay

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