सागर। पॉलीथिन मुक्त सागर के लिए चलाए जा रहे अभियान के दौरान अब मुहिम का असर दिखने लगा है। लोग स्वेच्छा से आगे आकर प्लास्टिक और पॉलीथिन को न कह रहे हैं। दुकानदार भी मुहिम को समझ रहे हैं। इसका असर शहर के अमूमन हर इलाके में नजर आ रहा है। इसमें निगम के जागरूकता अभियान, लोगों को पॉलीथिन का विकल्प देने, जुर्माने का भय और पॉलीथिन की जब्ती की सख्ती सब मिलकर पॉलीथिन के प्रति लोगों की मनोस्थिति को परिवर्तित कर रहे हैं। उल्लेखनीय है कि सागर को गांधी जयंती, 2 अक्टूबर तक पॉलीथिन मुक्त शहर घोषित करने का लक्ष्य लेकर निगम प्रशासन चल रहा है।

आयुक्त सफाई व्यवस्था की स्थिति देखने निकले थे

रविवार सुबह नगर निगम आयुक्त आरपी अहिरवार सुबह करीब साढ़े छह बजे सफाई व्यवस्था की स्थिति का निरीक्षण करने निकले थे। तिली तिराहे से मेडिकल कॉलेज के बीच में उनकी गाड़ी देखकर एक युवक बीच सड़क पर आ गया और बताने लगा कि सर, आपने कहा था सो पॉलीथिन हटा दी, डिस्पोजल और प्लास्टिक प्लेट भी हटा दी हैं। दुकानदार पंकज दुबे ने बताया कि अब वह पेड़ के पत्तों से बने दोने में पोहा बेचता है। लोग भी चाव से खाते हैं। उसने आयुक्त को भी दोने में पोहा खिलाया।

निगमायुक्त के साथ उपायुक्त डॉ. प्रणय कमल खरे, सहायक इंजीनियर संजय तिवारी सहित अन्य कर्मचारी भी थे। इसके अलावा भी संजय ड्राइव, बस स्टैंड, कटरा बाजार, बड़ा बाजार में सुबह से पोहा-जलेबी व अन्य खाद्य सामग्री बेचने वाले पत्तों से बने दोना-पत्तल पर वापस आ गए हैं। निगमायुक्त आरपी अहिरवार ने कहा कि पॉलीथिन मुक्त अभियान और स्वच्छ भारत अभियान में लोगों का सहयोग मिल रहा है। इस दुकानदार की जागरूकता अन्य दुकानदारों व लोगों के लिए प्रेरक का काम कर रही है। हम गांधी जयंती तक पॉलीथिन मुक्त सागर का लक्ष्य लेकर चल रहे हैं। इसके लिए लगातार प्रयास किए जाएंगे।