Sardar Bhagat Singh Birthday Special: बीना (नईदुनिया न्यूज)। नईबस्ती स्थित अथक पथ संग्रहालय में रखे क्रांतिकारियों के दुर्लभ चित्र और दस्तावेज उनकी वीरता की कहानियां बयां करती हैं। महान क्रांतिकारियों और देश के लिए कुर्बानी देने वालों के चित्रों से संग्रहालय समृद्ध है, लेकिन 28 सितंबर 1907 को परतंत्र भारत के लायलपुर जिले के बंगा गांव (वर्तमान में पाकिस्तान) में जन्में शहीद भगत सिंह के चित्रों अदम्य साहस की कहानियां बयां करते हैं। संग्रहालय में उनसे जुड़े 98 चित्र और दस्तावेज रखे हुए हैं। जिन्हें पढ़कर सहज ही यह समझा जा सकता है कि देश प्रेम से बढ़कर उन्हें कुछ नहीं था।

संग्रहालय में सबसे ज्यादा दस्तावेज शहीद सरदार भगतसिंह के चित्र देखने मिलते हैं। इनका संग्रह करने में संग्रहालय संचालक राम शर्मा को 40 वर्ष लग गए। अलग-अलग शहरों की यात्राएं की, शहीदों के घर गए और उनसे मुलाकात कर दस्तावेज एकत्रित किए। यहां तक कि चंद्रशेखर आजादी की घड़ी उनकी मां का संदूक संग्रहालय में सुरक्षित रखा हुआ है।

इसी तरह सरदार भगतसिंह के बाल्यकाल से लेकर फांसी के फंदे पर झूलने के अनेक चित्र और दस्तावेज सहेजकर रखे गए हैं। खासतौर से जब उन्हें 23 मार्च 1931 को फांसी पर लटकाया गया तब हिंदू पंच, स्वाधीन भारत, हिंदू जैसे अखबारोंं ने वेबाक होकर लिखा था। इन अखबारों की मूल प्रतियां संग्रहालय में सुरक्षित रखी हुई हैं।

भगतसिंह की फांसी की खबर को हिंदू पंच में 24 मार्च 1931 के अंंक प्रकाशित हुआ था। उसमें लिखा है, तपड़ता हुआ परिवार भेंट से वंचित, परिवार वालों को नहीं दी गई लाश। इसी तरह स्वाधीन भारत ने लिखा, सरदार भगतसिंह की फांसी का देशव्यापी विरोध। इसका अलावा अन्य समाचार पत्रों में बड़े मार्मिक ढंग से फांसी का कवरेज दिया था। इसके अलावा भगतसिंह की जेल की डायरी, मोतीलाल नेहरू से मुलाकात, इंदौर, उज्जैन में परिवार के साथ प्रवास के चित्रों सहित 98 दुलभ चित्र और दस्तावेज सहेज कर रखे गए हैं।

आने वाली पीढ़ियों के लिए किया संग्रह

अथक पथ संग्रहालय संचालक राम शर्मा का कहना है कि क्रांतिकारियों के दस्तावेजों और चित्रों का संग्रह करने में उन्हें 40 साल लग गए। इस संग्रह के पीछे उनका मुख्य उद्देश्य आने वाली पीढ़ियों तक यह संदेश पहुंचाना है कि देश को आजाद कराने में हजारों पसूतों ने अपने प्राणों की आहूतियां दी हैं, ताकि वह आजादी का महत्व समझ सकें। उन्होंने कहा कि क्रांतिकारियों के चित्र, दस्तावेज और चीजों को सहेजन का विचार राष्ट्र कवि श्रीकृष्ण सरल का साहित्य पढ़ने के बाद आया।

उन्होंने 12 देशी की 21 लाख किलोमीटर यात्रा कर 1828 क्रांतिकारियों और उनके परिजनों से मुलाकात की। 127 किताबें और 16 महाकाव्य लिखे हैं। इनमें क्रांति गंगा, क्रांति कथाएं सहित अन्य पुस्तकें क्रांंतिकारियों पर लिखी गई हैं। उनसे प्रेरणा लेकर उन्होंने क्रांतिकारियों के चित्रों, दस्तावेजों और उनसे जुड़ी चीजों का संग्रह कर संग्रहालय तैयार किया है।

Posted By: Nai Dunia News Network

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