बीना (नवदुनिया न्यूज)। कोरोना संक्रमण काल में स्कूलें बंद क्या हुई सरकार ने बच्चों को साइकिलें देना बंद कर दिया है। इसका सीधा असर दूर दराज के गांव से पढ़ने आने वाले सैकड़ों बच्चों पर पड़ रहा है। आर्थिक रूप से कमजोर अभिभावक अपने बच्चों को साइकिल नहीं दिला पा रहा हैं। मजबूरी में हाई स्कूल के बच्चे पैदल स्कूल जा रहे हैं। कई गांव तो ऐसे हैं जिन गांव के बच्चों को दो-पांच किलोमीटर पैदल चलकर स्कूल आना जाना पड़ रहा है। रोज 4-10 किलोमीटर पैदल चलकर स्कूल पहुंचना पड़ रहा है।

गौरतलब है कि वर्ष 2019-20 में कोरोना संक्रमण के कारण स्कूलें बंद कर दी गई हैं। बच्चों घर पर रहकर पढ़ाई कर रहे थे। इस अवधि में शासन की ओर से कक्षा छटवीं और कक्षा 9वीं के विद्यार्थियों को साइकिलें नहीं दी गईं। स्कूल चालू होने के बाद बच्चों को लग रहा था कि इस साल साइकिलों को वितरण किया जाएगा, लेकिन अब तक इस दिशा में कोई प्रयास नहीं किया गए हैं। इसके चलते तहसील के सैकड़ों बच्चों का परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। उन्हें रोज पैदल चलकर स्कूल जाना पड़ रहा हैं। सबसे ज्यादा परेशानी आर्थिक रूप से कमजोर अभिभाकों के बच्चों को उठानी पड़ रही है।

वह न तो वह रोज न तो आटो का किराया दे पाते हैं और न ही स्कूल जाने के लिए साइकिल खरीद पा रहे हैं। मजबूरी में ऐसे बच्चों को पैदल आना जाना पड़ रहा है। सबसे ज्यादा परेशानी ग्रामीण क्षेत्र के बच्चों को रही हैं। गांव से आसपास के स्कूल जाने उन्हें रोज की किलोमीटर पैदल चलना पड़ रहा है। स्कूल आने जाने में बच्चों का काफी समय बर्बाद हो जाता है। इसके चलते अभिभावक बच्चों को साइकिल दिलाने की मांग कर रहे हैं।

बच्चों की हालत हो जाती है खराब

देहरी गांव में संचालित हाई स्कूल में सेमरखेड़ी, बिलाखाना, और बिलाखना गांव के बच्चे पढ़ने आते हैं। स्कूल से इन गांवों की दूरी पांच-छह किलोमीटर है। इन गांव के अधिकांश बच्चे पैदल स्कूल जाते हैं। सेमरखेड़ी निवासी सीताराम ठाकुर ने बताया कि स्कूल कै बैग पीठ पर डांग कर रोज कई किलोमीटर पैदल चलते हैं। इस दौरान बच्चों की हालत खराब हो जाता है। अभिभावकों की बार-बार मांग के बाद भी शिक्षा विभाग द्वारा पात्र विद्यार्थियों को साइकिलें नहीं दी जा रही हैं। इसी तरह अन्य स्कूलों में दर्जनों गांव के सैकड़ों बच्चे पैदल चलकर पढ़ाई करने जा रहे हैं।

साइकिल वितरण को लेकर अभी कोई आदेश नहीं आया है। आदेश आने के बाद स्कूल स्तर पर पात्र बच्चों की संख्या शिक्षा विभाग के पोर्टल पर अलोपड की जाएगी इसके बाद साइकिलें आएंगी और बच्चों को वितरित की जाएंगी।

- आरके जाटव, प्रभारी बीईओ, बीना

Posted By: Nai Dunia News Network

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