जरूवाखेड़ा (नवदुनिया न्यूज)। सिद्धचक्र महामंडल विधान के समापन एवं जिनालयों के भूमि पूजन, शिलान्यास के अवसर पर धर्मसभा को संबोधित करते हुए मुनि सुधासागर ने कहा कि महान व्यक्तित्व के धनी कभी भी किसी भी प्रकार की आलोचना सुनकर अशांत नहीं होते। वह अपना प्रत्येक पल मन का संतुलन बनाए रखते हैं।

उन्होंने कहा कि यदि कोई जानबूझकर भी तुम्हारा अपमान करे, तो उसे या उसकी बात को कोई महत्व ना दो। उसे तुरंत भूल जाओ। यदि तुम स्वयं दूसरों की आलोचना या अनादर नहीं करोगे तो दूसरे भी तुम्हारी उपेक्षा का साहस नहीं करेंगे। मुनि श्री ने कहा कि अपनी किसी भी आलोचना से यदि तुम्हारी ऐसी गलतियों पर प्रकाश पड़ता है कि जिन्हें तुम नहीं देख सकते तो बुरा मानने के स्थान पर आलोचक के प्रति कृतज्ञ बनो। वह आपके ऊपर उपकार कर रहा है ऐसा विचार करो। मुनि श्री ने कहा कि आलोचना के बहाने वह तुम्हें अपने दोष दूर करने का अवसर दे रहा है। आलोचना से कभी मत डरो वरना अपनी उन्नाति नहीं कर पाओगे। उन्होंने बताया कि आलोचना से भय तो उन्हें होता है जिनमें आत्म विश्वास नहीं होता। आत्मविश्वासी ही तो यह समझता है कि आलोचनाओं के यह विचार हमारे जीवन संग्राम में होने वाले ऐसे आक्रमण है। जो हमारी शक्ति को बढ़ाते हैं। जो लोग विरोधी आलोचनाओं से विचलित नहीं होते उनके लिए आलोचनाएं वरदान बन जाती हैं। उनसे उन्हें आत्मनिरीक्षण की प्रेरणा मिलती है। इसलिए स्वस्थ प्रकृति का मनुष्य वही है जो आलोचक को अपना मित्र मानता है।

मंदिरों का हुआ भूमिपूजन एवं शिलान्यास

मुनि सुधासागर, मुनि पूज्यसागर, ऐलक धैर्यसागर, क्षुल्लक गंभीरसागर महाराज के सानिध्य में अतिशय क्षेत्र ईसुरवारा में एक साथ, एक ही समय, एक ही बार में कई मंदिरों का भूमि-पूजन एवं शिलान्यास का अनुष्ठान संपन्ना हुआ। अशोक शाकाहार ने बताया कि शीघ्र ही अत्याधुनिक सभी सुविधाओं से युक्त 100 कमरे का अतिथि भवन का निर्माण होगा। गुरुवार की सुबह मुनि संघ का विहार जरुवाखेड़ा की ओर हो सकता है।

Posted By: Nai Dunia News Network

NaiDunia Local
NaiDunia Local
  • Font Size
  • Close