बीना (नवदुनिया न्यूज)। रिफाइनरी में करीब 3500 करोड़ की लगात से बनने वाले पेट्रोकेमिकल हब और रिफाइनरी की उत्पादन क्षमता 7.8 एमएमटीपीए (मिलियन मीट्रिक टन पर एनम) से बढ़ाकर 12 एमएमटीपीए करने वर्यावरण विभाग की ओर से शुक्रवार को आगासौद गांव में जन सुनवाई का आयोजन किया गया। इसमें पर्यावरण विभाग के क्षेत्रीय अधिकारी, जन प्रतिनिधि, प्रशासनिक और रिफाइनरी प्रबंधन के अधिकारी शामिल हुए। कार्यक्रम में रिफाइनरी प्रबंधन पेट्रोकेमिकल हब बनने से होने वाले लाभ के बारे में अपनी बात रखी तो विधायक महेश राय ने मंच से ग्रामीणों की पीड़ा व्यक्त करते हुए रिफाइनरी प्रबंधन पर कई गंभीर आरोप लगाए।

रिफाइनरी के अधिकारियों ने प्रोजेक्टर के माध्यम से बताया कि रिफाइनरी के अंदर खाली पड़ी करीब 250 एकड़ जमीन पर पेट्रोकेमिकल हब तैयार किया जाएगा। लगभग 3500 करोड़ की लागत से बनने वाला यह हब 48 माह में बनकर तैयार हो जाएगा। इसमें विश्व स्तरीय एथिलीन क्रैकर और इससे संबंधित डाउनस्ट्रीम पेट्रोरसायन इकाइयों को स्थापित किया जाएगा। रिफाइनरी में पेट्रोकेमिकल हब तैयार होने से स्थानीय लोगों को रोजगार मिलेगा। इसके साथ ही रिफाइनरी की उत्पादन क्षमता बढ़ने से होने वाले लाभ के बारे में विस्तार से बताया गया, लेकिन रिफाइनरी के अधिकारियों को इस प्रेजेंटेशन पर विधायक ने पानी फेर दिया। विधायक ने मंच से कहा कि इस तरह के उद्योग लगाने से क्या फायदा जिनसे स्थानीय लोगों को किसी तरह का लाभ न मिले। रिफाइनरी प्रबंधन अंग्रेजों की नीतियों पर चल रहा है। रिफाइनरी के चारों तरफ पांच किलोमीटर क्षेत्र को नो डेवलपमेंट जोन घोषित करके रखा गया है। स्थिति यह है कि आसपास के गांव के किसान को पालतू जानवर बांधने के लिए झोपड़ी बनाना की परमिशन भी लेनी पड़ती है। दुर्भाग्य तो यह है कि लोग के पीएम आवास तक नहीं बनवा पा रहे हैं। आवास स्वीकृत होने के बाद भी वह सालों से अधिकारियों के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन उन्हें आवास बनाने की इजाजत नहीं मिल रही है। उन्होंने यह भी कहा कि रिफाइनरी चाहे तो ग्रामीण क्षेत्र में अच्छे स्कूल खोलकर गांव के बच्चों को अच्छी शिक्षा दे सकती है, लेकिन इस पर काम नहीं किया जा रहा है। हालांकि इस दौरान विधायक ने यह जरुर कहा कि वह उद्योग लगने के विरोध में नहीं हैं। मेरा सिर्फ इतना कहना है कि जो भी उद्योगों लगें उनमें स्थानीय लोगों को प्राथमिकता मिलनी चाहिए, ताकि उनके जीवन स्तर में भी बदलाव आए। कार्यक्रम में क्षेत्रीय पर्यावरण अधिकारी राजेश राय, एडीएम अखिलेश जैन, रिफाइनरी के सहायक उपाध्यक्ष केपी मिश्रा मुख्य रूप से उपस्थित थे।

बच्चों के भविष्य से खिलवाड़

सुनवाई के दौरान ग्रामीणों ने अपनी बात रखते हुए आक्रोश व्यक्त किया। ग्रामीणों ने कहा कि अच्छी शिक्षा के नाम पर शिक्षा आपके द्वारा शुरू की गई थी, यह योजना बंद कर दी गई है। उन्होंने कहा कि जिन बच्चों की पढ़ाई में रुचि थी उनको खेलों में धकेल दिया गया है। बच्चे ने तो बेहतर ढंग से बढ़ाई कर पा रहे हैं और न अच्छी खिलाड़ी बन पा रहे हैं। इसके अलावा ग्रामीणों ने कहा कि सफाई के नाम पर भी औपचारिकता की जा रही है। उन्होंने कहा कि हमारे साथ चले गांव में गंदगी दिखाते हैं। इसके अलावा रिफाइनरी के आसपास बसे गांव के लोगों ने रिफाइनरी द्वारा बेहतर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध न कराने का भी आरोप लगाया। इसके अलावा पर्यावरण स्वीकृति को लेकर भी कई लोगों ने आपत्ति दर्ज कराई।

गुपचुप तरीके से देखा जाता है प्रदूषण का स्तर

जन सुनवाई के दौरान अधिवक्ता राजकल सोनी ने कहा कि रिफाइनरी की उत्पादन क्षमता बढ़ने और पेट्रोकेमिकल हब तैयार होने से फायदे के साथ-साथ कई तरह के नुकसान भी होंगे। इसका खामियाजा गांव के लोगों के साथ-साथ शहर वासियों को भी भुगतना पड़ेगा। जबकि आपत्तियों की सुनवाई के लिए सिर्फ एक गांव में की जाती है। उन्होंने यह भी कहा कि प्रदूषण नियंत्रण विभाग की टीम गुपचुप तरीके से प्रदूषण का स्तर देखती है। किसी को बता नहीं रहता है कि कब टीम आता ही है प्रदूषण की जांच कर चली जाती है। उन्होंने स्थानीय लोगों की उपस्थिति में प्रदूषण का स्तर चैक करने की बात कही। कार्यक्रम के दौरान जिन लोगों ने सुझाव और आपत्तियां दर्ज कराईं उन पर गंभीरता से गौर करने की बात कही।

Posted By: Nai Dunia News Network

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