सागर(नवदुनिया प्रतिनिधि)। देश के माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने हाल ही में एक निर्णय और कुछ दिशा निर्देश जारी किए हैं, जिसमें देह व्यापार करने वाली महिलाओं के प्रति संवेदनशीलता बरतने की बात कही गई है। इस ज्वलन्त विषय पर शुक्रवार को देश के कई विषय विशेषज्ञों के बीच वर्चुअल चर्चा की गई। मुद्दा आपका कार्यक्रम के अंतर्गत इस चर्चा में भाग लेने के लिए प्रो. दिवाकर सिंह राजपूत को आमंत्रित किया गया।

डा. हरीसिंह गौर विश्वविद्यालय सागर मध्यप्रदेश के समाजशास्त्र एवं समाजकार्य विभाग में पदस्थ प्रो. राजपूत ने चर्चा के दौरान व्यावहारिक रूप से विभिन्ना बिन्दुओं पर अपने विचार रखे। देह व्यापार में संलग्न महिलाओं को सम्मान जनक रूप से जीवन यापन करने का अधिकार है, जो कि आर्टिकल 21 में वर्णित एवं प्रदत्त अधिकार के अंतर्गत आता है। उन्होंने कहा कि देह व्यापार में संलग्न वयस्क महिला यदि सहमति से यौन संबंध बनाती हैं, तब वैधानिक रूप से उनको संरक्षण देने से अनावश्यक विचलनकारी व्यवहार से बचा जा सकता है। तनाव, संघर्ष, कुण्ठा, द्वन्द्व, सामाजिक कलंक और अन्य सामाजिक समस्याओं को पैदा होने से पहले ही नियंत्रण किया जा सकता है। उन पर आश्रित परिवार जन के बेहतर भविष्य और सुरक्षित सम्मानित जीवन को भी एक आधार मिल सकेगा। सेक्स वर्कर और सेक्स क्रिमिनल दो अलग-अलग बातें हैं। सेक्स वर्कर्स को जीवन यापन के लिए समानांतर रूप से सम्मानित सेवा कार्यों में संलग्न होने के अवसर और आधार मिल सकें, यह प्रयास जरूरी हो जाते हैं। चर्चा में उत्तर प्रदेश के पूर्व पुलिस महानिदेशक डा. विक्रम सिंह, सुप्रीम कोर्ट की एडवोकेट सुश्री तृप्ति टण्डन और समाजसेवी सुश्री विशाखा ने भी अपने विचार रखे। वार्ता का संचालन कवीन्द्र सचान ने किया।

फोटो 2705 एसए : सागर पफोटो के नाम से : चर्चा के दौरान अपने विचार रखते हुए विवि के प्रो. राजपूत।

Posted By: Nai Dunia News Network

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