World Disabled Day : सागर (नवदुनिया प्रतिनिधि)। मन में लगन और मंजिल पाने का जुनून हो तो हर मुकाम आसान है। गढ़ाकोटा के छोटे से गांव संजरा के रहने वाले दिव्यांग जगदीश पटेल ने साबित कर दिया है। 28 वर्षीय जगदीश पटेल जब पांच महीने का था, तभी तेज बुखार की वजह से उसे पोलियो हो गया था। तीन साल की उम्र में उसने स्कूल में दाखिला ले लिया, लेकिन स्कूल में किसी ने उसकी सहायता नहीं की। ऐसे हालात में उसे दो बार स्कूल छा़ेडना पड़ा। जगदीश को उसके भाई गोंविद ने फिर प्रेरित कर दाखिला दिलाया। गोविंद ही उसे रोज अपनी साइकिल पर लेकर स्कूल जाता। दस साल की उम्र में व्हीलचेयर का इस्तेमाल शुरू किया और खुद स्कूल जाने लगा। इसके बाद उसने पहले ग्रेजुएशन फिर मास्टर्स डिग्री ली।

जगदीश एक स्टंटमैन-सिंगर कैसे बना

जगदीश के मन में इस बात को लेकर गहरी निराशा थी कि वह खेती-बाड़ी में अपने घर वालों का हाथ नहीं बंटा पा रहा था। इस पर उसके दादा ने उसे म्यूजिक थैरेपी की सलाह दी। जो उसे वरदान साबित हुई। म्यूजिक थैरेपी के चलते उसने दिव्यांग होने के बाद भी फिल्मी गीतों पर गाना गाना व डांस सीखा। इसके बाद स्टंट करने लगे। म्यूजिक थैरेपी से वह अच्छा गायक भी बन गया। वह स्थानीय अखाड़े जाता, जहां दोस्त मार्शल आर्ट सीखा करते थे। उसके दोस्त अपने खेल में मगन रहते और जगदीश अपनी व्हीलचेयर पर बैठा-बैठा उनकी नकल करने की कोशिश करता। मजाक-मजाक में शुरू हुए इस सिलसिले ने उसे शारीरिक तौर पर फिट बना दिया और इस तरह एक स्टंटमैन-सिंगर के तौर पर उसका सफर यहीं से शुरू हुआ। जगदीश की पहली सार्वजनिक परफॉर्मेंस 2012 में श्रीविजयनगर, राजस्थान में हुई, जहां उसने एक आडिशन के दौरान अपनी कला का प्रदर्शन किया। उसके समर्पण और जुनून ने उसे लोगों के बीच बेहद लोकप्रिय बना दिया और अब गांवों में लगने वाले मेलों-प्रदर्शनियों और उत्सवों में वो लगातार अपनी कला का जादू बिखेरता रहा। जबलपुर, बैंगलोर, जयपुर, उदयपुर, अहमदाबाद और अन्य अनेक स्थानों पर जगदीश ने एक दिव्यांग स्टंटमैन-गायक के तौर पर अनेक कार्यक्रम पेश किए। जगदीश नारायण सेवा संस्थान में कंप्यूटर कौशल के व्यावसायिक पाठ्यक्रम को करना चाहता था। संस्थान में रहने और खाने-पीने की निश्शुल्क व्यवस्था के साथ उसने तीन महीने का कंप्यूटर कौशल प्रशिक्षण हासिल किया। वह एक ऐसे एंटरटेनर और एक ऐसे सच्चे शोमैन के तौर पर उभरा, जो अपनी कला के सहारे लोगों का मनोरंजन करता था। नारायण सेवा संस्थान के कर्मचारियों ने उसके मन की सच्ची भावनाओं को महसूस किया और उन्हें शो बनाने का प्रस्ताव दिया। उन्हें गुजरात के सूरत में नारायण सेवा संस्थान के टैलेंट और फैशन शो में प्रदर्शन करने का मौका दिया गया।

Posted By: Nai Dunia News Network

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