आओ जलाएं कंडों की होली....

सागर(नवदुनिया प्रतिनिधि)।

रासायनिक रंगों से परहेज करने के साथ ही शहरवासियों को अब पर्यावरण सुरक्षा के लिए होली जलाने की परंपरा में भी आंशिक बदलाव करना होगा। यह कहना है मप्र लघुवेतन कर्मचारी संघ के सदस्यों का। कर्मचारी थानसिंह मंडल का कहना है कि रंगों से त्वचा पर होने वाले असर के चलते लोग धीरे-धीरे रंगों से तो परहेज करने लगे हैं, लेकिन अब कंडों की होली जलाने के लिए भी लोगों को जागरूक होना होगा। कोरोना वायरस के कहर के चलते लोग चायनीज वस्तुओं से तो परहेज करने लगे हैं, लेकिन अब लोगों को अपने पर्यावरण की सुरक्षा के लिए कंडों की होली जलाने का संकल्प लेना होगा। नवदुनिया के अभियान के बीच अब कई लोग कंडों की होली जलाने का संकल्प भी ले रहे हैं।

मेरे जमाने की होली ...............

फूलों के रंगों के साथ खेलते थे तालाब के कीचड़ में होली

बचपन के दिनों में हम लोग दिनभर होली की मस्ती करते थे। पहले टेशू के फूलों को तोड़कर रख लेते थे और फिर उसका रंग बनाकर एक-दूसरे पर डालते थे। फूलों से चेहरे पर निखार आ जाता था, लेकिन दोस्तों की असल होली इसके बाद शुरू होती थी। रंग छपाने के बाद एक-दूसरे के कपड़ें फाड़ते थे और फिर तालाब के मोंगा बधान के पास कीचड़नुमा पानी में एक-दूसरे को कीचड़ छपाते थे और पानी में पटकते थे।

- चूरामन रैकवार, जिलाध्यक्ष मप्र लघुवेतन कर्मचारी संघ

रात से ही शुरू हो जाती थी होली

होलिका दहन के साथ ही हम लोगों की होली शुरू हो जाती थी। रात में ही होलिका दहन स्थल के पास हम लोग एक-दूसरे के साथ रंग-गुलाल खेलने लगते थे, लेकिन जो लोग छूट जाते थे उन्हें दूसरे दिन नहीं छोड़ते थे। दोस्तों को रंग लगाने के लिए घंटों उनके घरों के बाहर डेरा डाले रहते थे और जब तक रंग नहीं लगा लेते थे तब तक दोस्तों के घर में ही डेरा डाले रहते थे। इस दौरान कुछ दोस्तों के घरों में तो भोजन की व्यवस्था तक रहती थी।

- पवन मिश्रा

रासायनिक रंगों की तरह अब लकड़ी जलाने से करें परहेज

बाजार में रासायनिक रंगों की भरमार है, जिसके चलते कई लोग अब रंगों के बदले गुलाल या फिर फूलों के रंगों से ही होली खेलना पसंद करने लगे हैं। इसी तरह अब हमें अपने पर्यावरण की सुरक्षा के लिए लकड़ी के बदले कंडों की होली जलाना शुरू करना चाहिए। कंडों के साथ कपूर वातावरण से वायरस को खत्म करने में सहायक होगा।

- थानसिंह मंडल

लकड़ी से बेहतर हैं कंडों की होली

लकड़ी की अपेक्षा कंडों की होली पर्यावरण को होने वाले नुकसान से बचाता है। द्वापर युग से भारत में फूलों से तैयार रंगों से ही होली खेली जाती है। हम लोग बचपन से फूलों के रंगों की होली खेलते आए हैं, लेकिन अब चाइना व कैमिकल वाले रंग बाजार में आ गए हैं। सुरक्षति होली खेलने के लिए हम लोग कंडों की होली जलाएं और फूलों के रंगों से होली खेलें।

- बालमुकुंद कोरी

फोटो 0503 एसए 1 सागर। कंडों की होली जलाने का संकल्प लेते हुए मप्र लघु वेतन कर्मचारी संघ के पदाधिकारी।

Posted By: Nai Dunia News Network

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