सतना। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा अवैध खनन को रोकने के लिए प्रशासन को दी गई खुली छूट के बाद भी सतना जिले में अवैध खनन रूकने का नाम नहीं ले रहा है। जिले के सभी ब्लॉकों में खनन माफिया खुलेआम जेसीबी मशीनों ने धरती का सीना छलनी करने में लगे हुए हैं। बावजूद इसके खनिज विभाग तथा राजस्व अमला खनन माफियाओं पर अंकुश नहीं लगा पा रहा है। खनिज संपदा के मामले में सतना जिला प्रदेश में अहम स्थान रखता है। यहां पर लेटराइट, बाक्साइट, चूना पत्थर का असीम भंडार धरती के नीचे छिपा हुआ है।

यही वजह है कि मप्र में सबसे अधिक सीमेंट फैक्ट्रियां सतना जिले में स्थित हैं। जहां से हर साल सरकार को करोड़ों रुपए का राजस्व प्राप्त होता है, लेकिन हैरान कर देने वाली बात यह है कि अवैध खनन की वजह से हर साल करोड़ों रुपए राजस्व चोरी कर लिया जाता है। मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद प्रशासन ने जिन खदानों में भ्रमण किया है वहां दिन की बजाय रात के समय मशीनें लगाकर उत्खनन शुरू कर दिया गया है। जिसे रोक पाने में जिला प्रशासन पूरी तरह से असफल साबित हो रहा है।

आधी रात से होता है उत्खनन

जिले के अमरपाटन तहसील अंतर्गत ग्राम पंचायत रूहिया के बहेलिया भाट में मुरूम का अवैध उत्खनन जोर शोर से किया जा रहा है। कुछ माह पूर्व अमरपाटन के राजस्व अमले द्वारा शिकायत के बाद इसी अवैध खदान में दबिश देकर खनन करते हुए जेसीबी मशीन और हाइवा को पकड़ा था। जिसके बाद अधिकारियों ने पकड़ी गई मशीन तथा वाहनों को छोड़ दिया था। लिहाजा खनन माफियाओं ने उसी जगह पर फिर से खनन शुरू कर दिया है। फर्क सिर्फ इतना है कि दिन की बजाय अब रात के समय उत्खनन किया जा रहा है। ग्रामीणों के अनुसार रात 10 बजे के बाद मशीनों से खनन कर वाहनों से अवैध परिवहन किया जाता है। बावजूद इसके अधिकारी रूहिया पंचायत के कई स्थानों में चल रहे इस अवैध खनन पर अंकुश नहीं लगा रहे हैं।

कैमरी में लेटराइट खनन

कोटर तहसील के कैमरी पहाड़ में खनन माफियाओं द्वारा भारी मात्रा में पत्थर का खनन किया जा रहा है। इसके लिए बकायदा मशीनें लगाई गई हैं। स्थानीय लोगों ने मामले की लिखित शिकायत कलेक्टर से की गई थी, जिसके बाद कलेक्टर के निर्देश पर अधिकारियों ने मौके का निरीक्षण किया था। जहां खनन कार्य में लगी दो जेसीबी मशीन तथा एक दर्जन से अधिक डंपर और हाईवा पाए गए थे। उस दौरान अधिकारियों के मांगने पर खनन कारोबारी किसी भी प्रकार का कोई रिकार्ड उपलब्ध नहीं करा पाए थे। हालांकि अधिकारियों ने कलेक्टर को अपनी रिपोर्ट तो सौंप दी थी, लेकिन खनन अभी तक रोका नहीं जा सका है। अवैध खनन के कार्य ज्यादातर गुंडे बदमाशों की देखरेख में होते हैं, इसलिए स्थानीय ग्रामीण उनके खिलाफ आवाज भी नहीं उठा पाते। लिहाजा दिन रात बेशकीमती पत्थरों की खुदाई चल रही है।

देवरी में पत्थर खनन

बदेरा तहसील अंतर्गत ग्राम देवरी में भी अवैध खनन तेजी के साथ हो रहा है। यहां पर एक सीमेंट फैक्टरी द्वारा जेसीबी मशीन लगाकर दिन रात खनन कराया जा रहा है। इस पत्थर को ट्रकों में लोडकर फैक्ट्री ले जाया जाता है। सबकुछ स्थानीय नेताओं के सरंक्षण में चल रहा है, जिसे प्रशासन देखकर भी अनदेखा कर रहा है। जिससे खनन माफियाओं के हौसले बुलंद हैं। मैहर क्षेत्र में जहां-जहां अवैध उत्खनन चल रहा है , सभी जगह राजनेताओं का हस्ताक्षेप है और माफिया धड़ल्ले के साथ अपने काम को अंजाम दे रहे हैं। यहां शिकायत करने के बाद भी खनिज विभाग या प्रशासनिक अमला कार्रवाई करने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा है।

मंदाकिनी से निकल रही रेत

देश के करोड़ों श्रद्घालुओं की आस्था का केंद्र चित्रकूट की जीवनदायिनी मंदाकिनी नदी से रेत का अवैध खनन किया जा रहा है। हर रोज सुबह से लेकर शाम तक कई ट्रक रेत नदी से निकालकर बाजार में बेची जा रही है। यह सबकुछ प्रशासनिक अमले की देखरेख में हो रहा है, जिसके चलते माफियाओं पर कार्यवाही नहीं हो पा रही है। रेत खनन की वजह से मंदाकिनी नदी का अस्तित्व खतरे में पड़ता जा रहा है। लेकिन अधिकारी सबकुछ जानकर भी अंजान बने हुए हैं।

ऐसे होता है खनन

चित्रकूट में अपनी जड़े जमाए खनन माफियाओं द्वारा मंदाकिनी नदी के तट पर मजदूरों की मदद से रेत को निकालकर एक जगह ढेर लगाया जाता है। इसके बाद गधों की पीठ पर बंधी बोरियों में रेत भर कर बस्ती के बीच से होते हुए अंतराज्यीय बस स्टैंड तक पहुंचाया जाता है। जहां बस स्टैंड के पीछे एक स्थान पर रेत पलटी कर दी जाता है। यहां पर अवैध रूप से निकाली गई रेत का भारी स्टॉक किया जाता है। रेत ढुलाई के लिए लगभग 50 गधे लगे हुए हैं जो सुबह से लेकर शाम तक लगभग सैकड़ों ट्राली रेत एकत्रित कर लेते हैं।

रातभर होती है सप्लाई

बस स्टैंड के पीछे स्टॉक किए गए रेत को रात होते ही ट्रैक्टर ट्राली में भरकर चित्रकूट से लगे ग्रामीण इलाकों में बेच दिया जाता है। इसके लिए उप्र के कर्वी, मानिकपुर जैसे कई उप नगरों तक भी सतना जिले की रेत की सप्लाई की जा रही है। यह सबकुछ स्थानीय प्रशासन के देखरेख में हो रहा है। इसमें खनन माफिया मालामाल हो रहे हैं और उनके साथ सरंक्षण देने वाले अधिकारियों की भी मोटी कमाई हो रही है, लेकिन खनन माफियाओं पर अंकुश लगाने का काम नहीं हो पा रहा है।

अभी तक नहीं हुई कार्रवाई

मंदाकिनी नदी से रेत खनन का मामला हो या मोहकमगढ़ से पत्थर व मुरूम खनन का मामला हो, प्रशासन को इसकी पूरी जानकारी ग्रामीणों द्वारा दी जा चुकी है। वहीं प्रदेश के मुखिया शिवराज सिंह चौहान ने प्रदेश भर में खनन माफियाओं के खिलाफ कार्यवाही करने के निर्देश भी जारी किए है। यहां तक कि सतना जिले के दूसरे ब्लॉकों में भी अवैध खनन व परिवहन के खिलाफ अभियान चलाया जा रहा है। लेकिन चित्रकूट में अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है। यहां छलनी हो रहे नदी के सीने और मशीनों से नष्ट किए जा रहे पहाड़ों को देखकर लगता है जैसे प्रशासन ने चित्रकूट में खनन माफियाओं को विशेष छूट दे रखी है।

खनन माफियाओं के खिलाफ समय-समय पर कार्रवाई की जाती है। परेशानी इस बात की है कि हमारी टीम पहुंचने से पहले ही खनन कारोबारी वहां से भाग जाते हैं।

पीपी राय, खनिज अधिकारी

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