उचेहरा (सतना)। नईदुनिया प्रतिनिधि

ग्राम पंचायत में काम नहीं मिलने के कारण मजदूर पलायन कर रहे हैं। वही प्रशासन के जिम्मेदारों के द्वारा मनरेगा के तहत मशीनों से काम कराया जा रहा है और जनभागीदारी का नाम दिया जा रहा है। प्रशासन के बैठे जिम्मेदार इस तरह का काम कराने से भी पीछे नहीं हट रहे हैं। जिसका परिणाम यह हो रहा है कि मजदूरों से उनकी रोजी-रोटी छिन रही है। सरकार मजदूरों को कई तरह के रोजगार उनके ही गांव में देने का वादा कर रही है। लेकिन गांवों के हालात इससे उलट हैं। जनपद पंचायत उचेहरा में बैठे उपयंत्री और सहायक यंत्री की मिलीभगत से मजदूरों की रोजी-रोटी छीनी जा रही है। मजदूरी के कार्यों में अब जेसीबी की आवाज सुनाई दे रही है। दरअसल जिले भर में बन रहे 117 तालाबों को जल्दबाजी में पूरा करने के लिए अब पूरी तरह से मशीनों से कार्य कराया जाने लगा है। जिले में लगभग 75 फीसद तालाब बन गए हैं लेकिन अभी भी 25 फीसद तालाबों में 50 फीसद से अधिक काम बचा हुआ है।

यह है मामला : दरअसल मामला ग्रामीण क्षेत्रों में तालाब का मरम्मतीकरण और निर्माण का है। गर्मी में पेयजल संकट से निपटने के लिए केंद्र और प्रदेश सरकार ने प्रत्येक जिले के ग्रामीण इलाकों में नवीन तालाब और पुराने तालाबों की मरम्मत कार्य किए जाने का फैसला लिया है। इसके तहत सतना जिले में भी 117 नए तालाब बनाए जा रहे हैं। इन तालाबों के निर्माण में मनरेगा मजदूरों की जगह खुदाई के लिए मशीनों का जमकर उपयोग हो रहा है। कोविड के दौरान खुद प्रदेश के गृह मंत्री ने विकास कार्यों में मशीनों से खुदाई पर रोक लगाई थी। लेकिन अब सतना में हालत इसके उलट दिखाई दे रहे हैं।

मशीनों के हवाले हुई मजदूरों की मनरेगा : मजदूरों की मनरेगा अब मशीन के हवाले हो गई है। मजदूरों की जगह खुदाई के लिए मशीनों का पूरी तरह उपयोग हो रहा है और गांव में मजदूर काम पाने के लिए भटक रहे हैं। तालाबों के निर्माण में अधिक से अधिक काम गांव के ही मजदूरों से कराने का निर्णय किया गया था। ग्राम पंचायत पोड़ी में जेसीबी मशीन के जरिए हो रही तालाब की खुदाई की कुछ तस्वीरें सामने आई हैं। मशीनों के जरिए कार्य कराने की वजह से मनरेगा मजदूरों को खुदाई का कार्य नहीं मिल पा रहा है। यहां मनरेगा के तहत काम हो रहा है और मनरेगा के नियमों के तहत मशीनों से कार्य नहीं कराया जा सकता। वहीं जिम्मेदारों का कहना है कि निर्माण के लिए इस बार शासन ने ग्रामीण विकास विभाग के तहत मनरेगा योजना में मशीनरी उपयोग के लिए सीमित व्यवस्था की है। इसलिए अन्य योजनाओं के माध्यम से जन सहयोग और सीएसआर फंड्स को समाहित करने का फैसला लिया है। चूंकि मनरेगा में मजदूरी खर्चों में बदलाव या कमी नहीं की जा सकती है। इसलिए मैटेरियल कम्पोनेंट में मशीनरी के लिए सीमित व्यवस्था का प्रावधान किया है। ऐसे में भुगतान के लिए अन्य योजनाओं और जनसहयोग को समाहित किया जा रहा है

इनकी देखरेख में हो रहा है काम : जनपद पंचायत उचेहरा की ग्राम पंचायत पोड़ी में उपयंत्री रामदयाल महलवंशी और सहायक यंत्री सलिल सिंह की देखरेख में मशीनों से तालाब की खुदाई का काम चल रहा है। जनपद पंचायत उचेहरा की कई ग्राम पंचायतों में धड़ल्ले से मशीनों से काम हो रहा है, तो मनरेगा के माध्यम से मजदूरों को मिलने वाले काम में ग्रहण लगता हुआ नजर आ रहा है और मजदूर पलायन करने को मजबूर हो रहे हैं। मगर इसके बावजूद भी मस्टररोल में सैकड़ों मजदूर काम करते हुए दिखाई दे रहे हैं। इस पूरे मामले में जनपद पंचायत उचेहरा की ग्राम पंचायत पोड़ी के रोजगार सहायक की भूमिका संदिग्ध मानी जा रही है।

Posted By: Nai Dunia News Network

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