सतना। नईदुनिया प्रतिनिधि

न जाने क्या सोचकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश में आदर्श गांव की परिकल्पना की और सांसद आदर्श ग्राम योजना बनाई। इसमें सांसद से लेकर मंत्री तक को एक-एक गांव गोद लेकर विकास करने की जिम्मेदारी सौंपी थी। लेकिन मौजूदा समय में आदर्श ग्रामों की हालत बद से बदतर है। उदाहरण के लिए केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर के आदर्श गांव पालदेव को ही देख लीजिए। वर्ष 2014 में प्रकाश जावड़ेकर ने चित्रकूट से 15 किमी दूर पहाड़ों की तलछटी पर बसे दस्यु प्रभावित पालदेव गांव को आदर्श ग्राम के रूप में गोद लिया था। गोद लेने के बाद प्रकाश जावड़ेकर 15 नवंबर 2014 को पहली बार पालदेव पहुंचे थे। जहां उन्होंने कहा कि चित्रकूट का पूरा क्षेत्र नानाजी देशमुख की कर्मस्थली रही है। इसलिए मैंने पालदेव गांव को गोद लिया है।

मंत्री प्रकाश ने गांव में चौपाल लगाकर ग्रामीणों की सुनीं थीं समस्याएं-प्रकाश जावड़ेकर ने गांव के बीच चौपाल लगाकर ग्रामीणों की समस्याएं सुनी थीं और उनके निराकरण का निर्देश दिया था। उस दिन मंत्री, सांसद और अधिकारियों के वाहनों का काफिला देखकर पालदेव के पिछड़े आदिवासियों ने भी सोच लिया था कि अब उनके दिन फिरने वाले हैं। लेकिन वक्त के साथ-साथ उनके सपने धुंधले होते चले गए। आज आलम ये है कि गांव की सड़कें कीचड़ से सनी हुई हैं। यहां कोई बीमार पड़ जाए तो इलाज के लिये 50 किमी दूर मझगवां स्वास्थ्य केंद्र ले जाना पड़ता है। बिजली, पानी, शिक्षा समेत सभी प्रकार की समस्याएं आज भी आदर्श गांव का मजाक उड़ा रही हैं।

सिर्फ इतना हुआ विकास -जिला मुख्यालय से 80 किमी दूर चित्रकूट जनपद के पालदेव गांव में आदर्श ग्राम घोषित होने के बाद सिर्फ साफ-सफाई के लिये खर्च किये गए। जिनमें से कच्ची सड़कों के किनारे नालियां बनाई गई जो अब गंदगी व मिट्टी से अटी पड़ी हैं। मुख्य सड़क पर 400 मीटर का डामरीकरण कराया गया था, जो इस पहली बारिश में ही बह गया। पंचायत किराए के कमरे में लग रही है। गांव में जो नाली बनवाई गई थी वो मिट्टी से पटी हुई है। इसलिए गंदा पानी सड़क पर बहता रहता है। साफ-सफाई का अभाव होने से जगह-जगह कचरे के ढेर लगे रहते हैं।

पालदेव पंचायत के गांव -पालदेव पंचायत में आने वाले नवस्ता, बंशीपुर, जुगुलपुर, रहमानगंज, कटनी तथा बरगदहा को जोड़ने वाले सभी रास्ते कच्चे हैं।

य ये हैं समस्याएं -गांव में दर्जनों मुख्य सड़कें कच्ची हैं। जिनमें बरसात का पानी भर जाने से कीचड़ हो जाता है।

य यहां रात के समय लगभग 15 घंटे बिजली रहती है, लेकिन बाकी के 9 घंटे बिजली गुल रहती है।

य गांव में अस्पताल नहीं है। इसलिए मरीज 40 किमी दूर मझगवां या फिर 30 किमी उप्र के कर्वी अस्पताल जाते हैं।

य ग्रामीणों ने प्रकाश जावड़ेकर से गांव में छोटा सा अस्पताल खोलने की मांग की थी जो आज तक पूरी नहीं हुई।

य प्राथमिक स्कूल के सामने प्राइवेट जमीन है। जिससे स्कूल का रास्ता बंद है।

य किसानों के पास खेत तो है। लेकिन सिंचाई का साधन नहीं है।

रोजगार न होने से 90 फीसदी शिक्षित युवा बेरोजगार हैं।

फैक्ट फाइल

य कुल जनसंख्या - 4309

य कुल परिवार - 795

य निर्माणाधीन पक्की सड़क - 01

य कच्ची सड़क- 12

य कुआं - 10

य तालाब- 02

य हैंडपंप- 25

Posted By: Nai Dunia News Network