नीलाबुंज पांडे

सीधी नईदुनिया प्रतिनिधि। बेटियां समाज के लिए प्रेरणा बनती जा रही है। शिक्षा, राजनीति, खेल और नौकरी में पहुंचकर प्रदेश ही नहीं देश का नाम रोशन कर रही है। जी हां आज हम मध्य प्रदेश के सीधी जिले में रहने वाली अंशिका गुप्ता के बारे में बात कर रहे हैं। यह बेटी 12 वर्ष की उम्र में एयर राइफल हाथों में थाम लिया और 17 वर्ष की में निशानेबाजी में हिस्सा लेकर प्रदेश ही नहीं देश के लिए मेडल जीता है अब तो यह महिला बाल विकास सीधी, स्वच्छता अभियान सीधी की ब्रांड एंबेसडर भी है। बेटियों के लिए यह प्रेरणा बनती जा रही है। अंशिका का लक्ष्य ओलंपिक जीतना है।

बता दें कि अंशिका गुप्ता बचपन से ही टीवी पर खेल देखा करती थी। जब वह वर्ष 2015 में कक्षा सातवीं की पढ़ाई करने के लिए इंदौर पहुंची तो वह एयर राइफल निशानेबाजी सीखना शुरू किया। कड़ी मेहनत का नतीजा रहा कि वह कई गेम खेल चुकी है। विश्व कप ट्रायल, दो बार खेलो इंडिया, ओपन नेशनल ट्रायल जैसे कई मौके पर खेल कर स्वर्ण, रजत और कांस्य पदक जीता है। इस खेल में 12 सौ से अधिक खिलाड़ी हिस्सा लेते लिया है। 25 नवंबर से 10 दिसंबर 2021 तक नेशनल निशानेबाजी भोपाल में आयोजित किया गया था। जिसमें भारत के सभी राज्यों से खिलाड़ी आए हुए थे।

घर में बना लिया निशानेबाजी हाल : अंशिका के पिता छोटू गुप्ता बताते हैं कि वर्ष 2020 मार्च का महीना था लाकडाउन लगा। अंशिका घर वापस आ गई। ऐसे में उसकी रियाज के लिए 10 बाइ 50 का एक हाल बनाया जिसमें उसका पूरा सेटअप तैयार किया। तब से वह जब घर छुट्टी पर आती है तो उसका रियाज इसी हाल में चलता है। घर में रोजाना चार से 5 घंटे प्रैक्टिस करती हैं। लक्ष्य ओलंपिक है इसके लिए हमने निशानेबाजी के एयर राइफल, जैकेट, जूता सहित कई सामान करीब 5 लाख से अधिक रुपये का खरीदा गया है।

कैसे होती है दिनचर्या : अंशिका गुप्ता बताती हैं कि पढ़ाई के साथ निशानेबाजी रियाज का समय रोजाना डेढ़ घंटे होता है। इसे और बेहतर करने के लिए हम एक घंटे अधिक समय देते हैं।

इसमें मिली जीत : ओपन नेशनल ट्रायल 2021, नेशनल ओपन ट्रायल में 10 मीटर एयर राइफल यूथ कैटेगरी में स्वर्ण मिला है। एक लाख रुपये मिला है। इसके अलावा पचहत्तर मिला था। खेलो इंडिया 2020- रजत जीती है। जिसमें केंद्र सरकार ने पांच लाख रुपये प्रतिवर्ष 8 साल तक दिया जाएगा। यह स्कालरशिप 40 लाख की है।

क्या कहती हैं अंशिका : अंशिका गुप्ता कहती हैं कि बेटी आज हर क्षेत्र में आगे हैं। पुरुषों से कंधे में कंधा मिलाकर चल रही है। जरूरत बस इस बात की है कि अभिभावक बेटी का सपोर्ट करें ताकि वह कुछ बेहतर कर सकें। बेटी और बेटे में कोई भेद नहीं करना चाहिए।

क्या कहते हैं पिता : विश्वनाथ गुप्ता ने बताया कि उनकी तीन बेटियां हैं। बड़ी बेटी वर्तिका जो बिजनेस संभालती है, अवंतिका साफ्टवेयर इंजीनियर है, अंशिका पढ़ाई के साथ निशानेबाजी कर रही है। मुझे कभी ऐसा नहीं लगा कि बेटा होना चाहिए।

Posted By: Nai Dunia News Network

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