इछावर (नवदुनिया न्यूज)। गो संरक्षण की मुहिम के तहत सरकार द्वारा लाखों की लागत से गौशालाओं का निर्माण विभिन्ना पंचायतों में किया, यह सभी गोशाला खस्ताहाल में है। कई गोशालाओं में तो आलम यह है कि ताला डला है, तो कईयों में गाय के खाने के लिए भूसा तक नहीं है। इन सभी गोशालाओं में पंचायत के जिम्मेदारों की लापरवाही सामने आ रही है।

ब्लाक के अंतर्गत आने वाली पंचायत आमला रामजीपुरा में 37 लाख 85 हजार की लागत से गोशाला का निर्माण कराया गया, जिसका फीता आज से 18 महीने पहले क्षेत्रीय सांसद रमाकांत भार्गव तथा स्थानीय विधायक करण सिंह वर्मा, मुख्यमंत्री के बेटे कार्तिकेय चौहान सहित कई जनप्रतिनिधियों द्वारा एक कार्यक्रम का आयोजन कर काटा था, लेकिन तब से लेकर आज तक गो0शाला में ताला ही डला हुआ है। गोशाला बंद पड़ी है। इससे क्षेत्र का गोवंश दर-दर भटक रहा है तथा आए दिन दुर्घटना का शिकार हो रहा है, लेकिन इस ओर कोई भी जिम्मेदार ध्यान नहीं दे रहा है। मालूम हो कि गोशाला का निर्माण सरकार द्वारा बहुउद्देशीय योजनाओं के साथ किया गया था, जिसमें देश के गोवंश संरक्षण से लेकर युवाओं को रोजगार, तथा स्थानीय ग्रामीणों की आय बढ़ाने तक की योजनाएं शामिल थी, लेकिन पंचायत के जिम्मेदारों की लापरवाही के चलते यह सब अधर में पड़े हुए हैं। जिसका खामियाजा गोवंश को अपना जीवन सड़कों पर गुजार कर भुगतना पड़ रहा है।

नहीं है पानी की व्यवस्था

पंचायत सचिव से बात करने पर पता चला कि सारी व्यवस्थाएं हैं। सिर्फ जल व्यवस्था न होने के गोशाला नहीं खोली जा रही। पंचायत के पास गोशाला में बोर लगाने के लिए फंड नहीं है। जबकि ग्रामीणों का कहना है कि यह पंचायत के जिम्मेदारों की लापरवाही के चलते सरकारी पैसे का दुरुपयोग साफ देखा जा रहा है। जब 37 लाख की लागत से गोशाला बन सकती है, तो 50 हजार की लागत से एक बोर नहीं लगवाया जा सकता। पंचायत में हो रही कई लापरवाही में से एक बनकर खड़ी गोशाला का प्रारंभ न हो पाना भी है।

कई गोशालाओं का काम अभी भी अधूरा

ब्लाक के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत मूंडला व तोरनिया, बबडिया में भी गोशाला का निर्माण होना स्वीकृत किया गया था, जिसमें से तोरनिया और मूंडला में काम अभी भी कछुए की चाल से चल रहा है तथा बबडिया का काम अभी शुरू ही नहीं हुआ है। लगभग आधे से ज्यादा फंड सभी गोशालाओं के लिए सरकार द्वारा उपलब्ध करा दिया गया है, लेकिन अभी तक इनमें से एक गोशाला का काम पूर्ण नहीं हो पाया है। जबकि बनकर पूर्ण हो चुकी ग्राम पंचायत आमला रामजीपुरा की गोशाला का शुभारंभ होने के बाद भी गोशाला में ताला डाला हुआ है। ग्रामीणों ने पंचायत के जिम्मेदारों पर आरोप लगाते हुए बताया कि गोशाला के शुभारंभ में इतने भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें हजारों रुपए खर्च किए गए। यदि पंचायत चाहती तो इतने में गोशाला के लिए पेयजल की व्यवस्था कर सकती थी, लेकिन पंचायत के जनप्रतिनिधियों को अपनी राजनीति चमकाने की चिंता थी जिसका परिणाम आज पंचायत गोशाला में ताला डालकर भुगत रही है।

गो भक्त होना और गो भक्त होने का दिखावा करना इन दोनों में बहुत अंतर है। शिवराज सरकार दिखावटी। जबकि गो भक्त हमारे प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ जी ने कांग्रेस सरकार के दौरान एक हजार से ज्यादा गोशाला पूरे मध्यप्रदेश में बनवाई थी, जिन्हें यह शिवराज सरकार ठीक तरीके से दाना पानी भी उपलब्ध नहीं करा पा रही है। यह सरकार सिर्फ गाय के नाम पर वोट मांगना जानती है। जबकि गाय का असली संरक्षण और संवर्धन कांग्रेस पार्टी हमेशा से करती आई है और इसी के अंतर्गत हमने गोशालाओं का निर्माण कराया था।

-शैलेंद्र पटेल, पूर्व विधायक इछावर

जल्द ही इन सभी गोशालाओं का निरीक्षण कर व्यवस्थाएं दुरुस्त की जाएगी एवं जिन गोशालाओं में जिम्मेदारों की लापरवाही सामने आती है उन पर उचित कार्रवाई की जाएगी।

-विष्णु प्रसाद यादव, एसडीएम इछावर

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