सीहोर। शहर के बीचोंबीच बहने वाली सीवन नदी आज दुर्दशा का शिकार हो गई है। नदी उथली होती जा रही है साथ ही उसमें गंदगी बढ़ती जा रही है। नदी में इन दिनों जलकुंभी इस कदर छाई हुई हो मानो नदी नहीं कोई हरा मैदान हो। गर्मी के कारण अधिकांश जगहों पर नदी सूख चुकी है। कीचड़ में जलकुंभी फैली है जिसमें फूल भी आने लगे हैं। इसे देखकर लगता ही नहीं कि यह नदी है। नदी की हालत को देख नागरिक लगातार गहरीकरण और नदी की सफाई को लेकर मांग कर रहे थे। नवदुनिया ने भी इस समाचार को 9 मई के अंक में प्रमुखता प्रकाशित किया था और नदी के वर्तमान हाल को बताया था। इसके बाद नदी के गहरी करण का काम किया जा रहा है। वर्तमान में नदी के गहरीकरण का काम नदी चौराहे पर किया जा रहा है।

लोगों को भी रखना होगा नदी का ख्याल

सीवन नदी पर दोनों तरफ के घाट बने हैं, जिसमें से कुछ खराब हो चुके हैं। मंदिर परिसर की तरफ से घाट टूट चुके हैं। कुछ समय पहले इन घाटों की मरम्मत कराई गई थी। यदि तेज बहाव से नदी में उफान आता है तो यह घाट क्षतिग्रस्त हो सकता है। खास बात यह है कि इन घोटों की सफाई करने की जगह लोग यहां पूजन सामग्री फूल, हवन, झंडे सहित पालीथिन आदि नदी में विसर्जित किए जाते हैं, जिससे नदी में गंदगी के साथ ही पुराव होता है। वहीं कई जगह नदी के पास नपा ने पूजन सामग्री के लिए बड़े-बड़े ड्रम रखे हैं, लेकिन इनकी समय पर सफाई नहीं होने से ये भर जाते हैं और पूजन सामग्री नीचे फेली रहती है। इसके चलते लोग इनमें पूजन सामग्री नहीं डालते और नदी में ही विसर्जित कर देते हैं।

सीवन नदी पर एक नजर

सीवन का कैचमेंट एरियाः 10662 हेक्टेयर

शहर में सीवन का क्षेत्रः शहर में सीवन नदी बड़ियाखेड़ी क्षेत्र में प्रवेश करती है। इसके बाद बकरीपुल, हनुमान फाटक, करबला और गणेश मंदिर के पास से होती पार्वती नदी में मिलती है।

इन क्षेत्रों को होगा लाभः सीवन गहरीकरण से बड़ियाखेड़ी, गंगा आश्रम, आफीसर कालोनी, प्रफोसर कालोनी, इंदौर नाका क्षेत्र, कस्बा और गणेश मंदिर के क्षेत्र का जलस्तर बढ़ता है। इस क्षेत्र में करीब करीब 40 हजार की आबादी निवास करती है।

Posted By: Nai Dunia News Network

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