सीहोर। लगातार गिर रहे जल स्तर से पानी पाताल में पहुंच रहा है, जिसके बाद आमजन सहित नपा व जिला पंचायत ने पहल कर पानी सहेजने की पहल की है। नपा ने जहां जिला अस्पताल परिसर में हार्वेस्टिंग सिस्टम तैयार किया है, वहीं शहर में 300 लोगों की सूचि वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम बनाने के लिए ड्रीम हाइट कंसलटेंट को सौंपी है। जबकि जिला पंचायत की आइडब्ल्यूएमपी योजना के तहत 119 खेत तालाब, दो चेक डैम, पांच नाले मिट्टी के नाले, 12 नाला गहरीकरण और आष्टा क्षेत्र में 150 हेक्टेयर वाटर लेबल बढ़ाने के लिए कंटीन्यूअस खोदी गई, जिसमें लाखों घन मीटर पानी रोककर बंजर पड़ी हजारों हेक्टेयर भूमि में सिंचाई होने के साथ ही जल स्त्रोत रीचार्ज होंगे। वहीं महात्मा गांधी नरेगा के तहत वित्तीय वर्ष 2021-22 में जल संरक्षण व संवर्धन के लगभग 1080 कार्य किए गए हैं।

बारिश के बाद पानी रुकने से बंजर भूमि में होगी खेती

जिला पंचायत सीइओ हर्ष सिंह ने बताया कि लोगों ने पानी सहेजने में रुचि दिखाई है। वहीं जिला पंचायत के डब्ल्यूएमपी समंव्यक राजेश राय ने इस बार जिले में 119 खेत तालाब बनाए हैं, जिनमें पांच लाख 28 हजार घन मीटर वर्षा जल संग्रहित होगा, वहीं 352 हेक्टेयर अतिरिक्त कृषकों को सुरक्षात्मक सिंचाई उपलब्ध होगी। इन खेत तालाबों से 135 किसान लाभांवित होंगे। वहीं दो चेक डैम बनाए गए, जिनमें 16 हजार 110 घन मीटर सतही जल के संग्रहण से 12 हेक्टेयर अतिरिक्त सिंचाई व 25 किसानों को लाभ होगा। जबकि पांच मिट्टी के नाला बंधान बनाए गए, जिसमें जल संग्रहण क्षमता 80 हजार घन मीटर है। इसमें 55 हेक्टेयर क्षेत्र को सुरक्षात्मक सिंचाई तथा लगभग 120 कृषकों को लाभ होगा। साथ ही 12 किमी नाला गहरीकरण किया गया है, जिसमें दो लाख 80 हजार घन मीटर जल संग्रहित होगा तथा 250 किसानों को लाभ होगा। 200 हेक्टेयर क्षेत्र को अतिरिक्त सिंचाई प्राप्त होगी। वहीं आष्टा जनपद क्षेत्र के तहत ग्राम छायनखुर्द, बमुलियारायमल, कजलास में 150 हेक्टेयर में कंटींयूअस खोदी गई, जिसमें जिसमें दो लाख 40 हजार घन मीटर वर्षों जल रिचार्ज होगा, जिससे 120 कृषक लाभांवित होंगे। बारिश का पानी इनमें संग्रहण शुरू हो गया है। इसके बाद निश्चित ही हजारों किसानों की बंजर भूमि को पानी मिल सकेगा। वहीं महात्मा गांधी नरेगा के तहत वित्तीय वर्ष 2021-22 में जल संरक्षण व संवर्धन के लगभग 1080 कार्य किए गए हैं, जिसमें 295 पोखर, 175 रूफ वाटर हार्वेस्टिंग, 138 सोक पिट, 64 नाला विस्तारीकरण, 74 तालाब जीर्णोद्धार, 25 गैवियन, 31 फार्म पोंड, 59 कंटूर ट्रेंच आदि के कार्य शामिल है। उक्त कार्यों पर 4.82 लाख मानव दिवस सृजित किए गए हैं। उक्त निर्माण कार्यों से जल संचयन क्षमता में वृद्धि के साथ-साथ किसानों को सिंचाई सुविधा प्राप्त होगी।

17 लाख 85 हजार लीटर होगा संग्रहित

नगर पालिका सीएमओ संदीप श्रीवास्तव ने कहा कि शहर के जिन 300 लोगों की नपा द्वारा एफडीआर की गई थी, उनकी सूचि बनाकर वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम तैयार करने के लिए ड्रीम हाइट कंसलटेंट को काम दिया गया है, वहीं जिला अस्पताल परिसर में 25 वाय 70 मीटर का वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम तैयार किया गया है, जो पूरे परिसर का 17 लाख 85 हजार लीटर पानी संग्रहित हो गया, जिससे पूरे साल अस्पताल परिसर सहित आसपास के 200 मकानों के बोर रीचार्ज करेगा। इसे आठ दिन में पानी सहेजने के लिए तैयार किया गया है।

Posted By: Nai Dunia News Network

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