आष्टा। भगवान का हर विधान जीव के कल्याण के लिए होता है, भगवान यदि मनुष्य को दुख भी देते हैं तो उसमें कहीं न कहीं जीव का ही भला होता है। भगवान सब के रक्षक है। करही सदा तीन के रखवारी। जिमी बालक राखव महतारी। जिस प्रकार मां अपने बच्चों की रक्षा करती है, ऐसे ही भगवान सृष्टि के सभी जीवो की रक्षा करते हैं।

उक्त विचार श्री श्यामा श्याम चैरिटेबल ट्रस्ट द्वारा आयोजित सात दिवसीय संगीतमय श्रीमद् भागवत कथा में व्यास पीठ पर विराजित भागवत कथाकार संत मिट्ठूपुरा सरकार द्वारा व्यक्त किए गए। अंजनी नगर आष्टा में श्री हनुमान मंदिर में चल रही कथा में आज संत श्री ने बताया कि जब पृथ्वी पर राक्षसों का बहुत अत्याचार बढ़ गया तब पृथ्वी ने गाय का रूप धारण कर भगवान से प्रार्थना की तब भगवान ने राम कृष्ण के रूप में अवतार लेकर संपूर्ण सृष्टि को भय से मुक्त किया। विप्र धेनु सुर संत हित लीन मनुज अवतार। निज इक्छा निर्मित तनु माया गुन गोपार । कथा में श्री राम जन्म की कथा सुनाते हुए महाराज श्री ने बताया कि त्रेता युग में अयोध्या के राजा दशरथ जी के यहां कोई संतान नहीं थी, तो महाराज दशरथ अपने गुरु वशिष्ठ के पास गए उनसे प्रार्थना की तब गुरुदेव ने पुत्र कामेष्टि यज्ञ का आयोजन किया, जिसमें से अग्नि देवता खीर लेकर प्रकट हुए उसी खीर को तीनों रानियों कोशल्या, केकई, सुमित्रा को खिलाया और भगवान की कृपा से तीनों रानियां ने गर्भधारण किया और हरि इच्छा से चैत्र मास शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को दिन के 12 बजे भगवान श्रीराम का जन्म हुआ। जन्म की खुशी में सुंदर भजन बधाइयां गाई गई ,इसके पश्चात भगवान श्री कृष्ण के जन्म की कथा को बड़े विस्तार से सुनाया गया। मथुरा के राजा उग्रसेन के पुत्र का नाम कंस था कंस की एक चचेरी बहन महाराज देवक की पुत्री कंस की चचेरी बहन देवकी जिसे कंस बहुत प्रेम करता था, जिसका विवाह महाराज वसुदेव जी के साथ संपन्ना हुआ कंस अपनी बहन बहनोई को विदा करने जा रहा था उसी समय आकाशवाणी हुई अरे कंस जिस बहन को तो इतने प्रेम से छोड़ने जा रहा है इसका आठवां पुत्र तेरा काल होगा तब कंस ने अपने बहन देवकी और बहनोई वासुदेव जी को अपने जेल खाने में डाल दिया कालांतर में देवकी के गर्भ से 6 पुत्र हुए उन सभी को कंस ने मार डाला सातवे पुत्र के रूप में भगवान बलराम जी शेष अवतार में प्रकट हुए और आठवें पुत्र के रूप में साक्षात नारायण भगवान का श्री कृष्ण भादों मास कृष्ण पक्ष अष्टमी के रात्रि 12 बजे मथुरा के कारागृह में जन्म हुआ।

जन्म होते ही खुल गए जेल के दरवाजे

भगवान का जन्म होते ही जेल खाने के दरवाजे खुल गए। माता -पिता के हाथ की हथकड़ी, पांव की बेड़ियां कट गई। पहरेदार सो गए, जिसके जीवन में भगवान आते हैं उसके सारे बंधन अपने आप खुल जाते है। जन्म के साथ ही सुंदर बधाई गीत गाए गए। सारा पांडाल भाव विभोर होकर भगवान के जन्म उत्सव में नृत्य करने लगा। इसके पूर्व आज श्री हनुमान मंदिर समिति के प्रेमनारायण गोस्वामी, भीमा कुशवाह, प्रकाश पटेल, सुरेंद्र सिंह, द्वारका प्रसाद बैरागी और समिति के सदस्यों द्वारा कथावाचक संत श्री मिट्ठूपुरा सरकार, संगीतकार, संचालक गजेंद्र सिंह ठाकुर ,और आचार्य आशीष शर्मा का साफा बांधकर श्रीफल और पुष्प माला से स्वागत किया।

Posted By: Nai Dunia News Network

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