सीहोर। शहर के विश्रामघाट मां चौसठ योगिनी मरी माता मंदिर में स्कंद माता की आराधना के अलावा यहां पर उपस्थित श्रद्धालुओं ने एक साथ 12 पार्थिव ज्योतिर्लिंग के दर्शन, पूजन और आराधना की। इसके अलावा मंदिर में जारी दुर्गा सप्त शती का पाठ और हवन आदि का आयोजन किया गया। इस मौके पर पंडित उमेश दुबे ने पूर्ण विधि-विधान से सुबह मां देवी के मंत्रों के हवन कराया और उसके बाद आरती की गई। इस मौके पर जिला संस्कार मंच की ओर से गोविन्द मेवाड़ा, मनोज दीक्षित मामा, राकेश शर्मा, सुभाष कुशवाहा, रितेश अग्रवाल, कृष्णा मेवाड़ा आदि शामिल थे।

इस संबंध में जानकारी देते हुए मंदिर के व्यवस्थापक रोहित मेवाड़ा ने बताया कि नवरात्रि में एक साथ शिव और शक्ति की आराधना का सौभाग्य बहुत कम मिलता है। इन ज्योतिर्लिंग के दर्शन, पूजन, आराधना से भक्तों के जन्म-जन्मातर के सारे पाप समाप्त हो जाते हैं। उन्होंने बताया कि शक्ति उपासना का बड़ा महत्व है। शक्ति ही संसार का संचालन कर रही है। शक्ति के बिना शिव भी शव की तरह चेतना शून्य माना गया है। स्त्री और पुरुष शक्ति और शिव के स्वरूप ही माने गए हैं। भारतीय उपासना में स्त्री तत्व की प्रधानता पुरुष से अधिक मानी गई है। नारी शक्ति की चेतना का प्रतीक है। साथ ही यह प्रकृति की प्रमुख सहचरी भी है जो जड़ स्वरूप पुरुष को अपनी चेतना प्रकृति से आकृष्ट कर शिव और शक्ति का मिलन कराती है। साथ ही संसार की सार्थकता सिद्ध करती है। उन्होंने बताया कि सोमवार को सुबह माता जी की आरती आदि के बाद 12 पार्थिव ज्योतिर्लिंग का निर्माण कर अभिषेक किया गया। इस मौके पर पंडित श्री दुबे ने बताया कि नवरात्रि पर्व पर हर दिन देवी के नौ अलग-अलग स्वरूपों की आराधना की जाती है। आषाढ पंचमी है। इस तिथि को मां स्कंदमाता की पूजा-अर्चना का विधान है। स्कंदमाता का स्वरुप बेहद सौम्य और मनमोहक है। इनका वास पहाड़ों पर माना गया है। इनकी चार भुजाएं हैं, जिसमें से दो हाथों में कमल का फूल थामे दिखती हैं। एक हाथ में स्कंदजी (भगवान कार्तिकेय) बालरूप में बैठे हैं और दूसरा हाथ वरद मुद्रा में हैं। मां स्कंदमाता कमल के आसन पर विराजमान रहती हैं, इसीलिए इन्हें पद्मासना देवी के नाम से भी जाना जाता है। मां का वाहन सिंह है। इन्हें मोक्ष के द्वार खोलने वाली देवी के रूप में भी जा जाता है। पौराणिक ग्रंथों में मां स्कंदमाता की आराधना का बेहद महत्व बताया गया है। इनकी उपासना से भक्त की सारी मनोकामनाएं पूरी होती है। कहते हैं मां की उपासना से साधक को संतान सुख की प्राप्ति होती है।

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