सीहोर। बड़ा बाजार स्थित अग्रवाल धर्मशाला में चल रही श्री शिव महापुराण एवं पार्थिव शिवलिंग निर्माण के 6वे दिन पंडित हर्षित शास्त्री के द्वारा भगवान के गंगावतरण के रहस्य को बताया गया कि गंगा कब अवतरित हुई और भगवान शिव ने उन्हें अपनी जटाओं में धारण किया और फिर भगवान शिव ने अपनी जटा से एक धारा मृत्यु लोक में भेज दी जीव मात्र के प्राणी मात्र के कल्याण के लिए। इसके बाद विभिन्ना रूपों में अवतरित होने वाले भगवान की कथा कही जिसमें गुरुदेव ने बताया वैसे तो भगवान के असंख्य अवतार हैं, लेकिन मुख्यतः भगवान के 48 अवतार जाने गए हैं।

पंडित शास्त्री ने बताया कि प्रत्येक कल्प के अलग ब्रह्मा होते हैं और जब ब्रह्मा सृष्टि की कल्पना करते हैं तब भगवान शिव का प्राकट्य होता है और वह उनकी उपासना करके तपस्या करके सृष्टि के रहस्य को जान लेते हैं भगवान शिव 19 वा कल्प जो श्वेतलोहित नाम से विख्यात था उसमें भगवान शिव जी का सद्योजत नामक अवतार हुआ। तदनंतर विश्वकप में रक्त वर्ण का शरीर धारण किए हुए एक बालक जन्म हुआ यह बालक भी साक्षात भगवान शिव था इसके बाद 21 विकल्प में विश्वास नाम से कल्प कहा जाता था उसमें पीत वस्त्र धारी भगवान शंकर जी का प्राकट्य हुआ इन्हीं से शंकर जी का गायत्री मंत्र निकला तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि तन्नाो रुद्र प्रचोदयात शंकरी गायत्री से प्रकट हुई। इसके बाद जब अगला कल हुआ उसमें एक बालक उत्पन्ना हुआ जो काला रंग का था उसका रूप भी काला तिलक भी काला जनेऊ भी काली सब कुछ काला था ब्रह्मा जी ने इस बालक को अघोर जाना और अघोरेश्वर भगवान का यह चौथा अवतार हुआ इसके जब दूसरा कल्प प्रारंभ हुआ विश्वरूप नाम से विख्यात यह कल्प इसमें ब्रह्मा जी ने तपस्या की इससे विश्वरूपा सरस्वती जी का प्राकट्य हुआ उसी से परमेश्वर ईशान का प्रादुर्भाव हुआ यह भगवान शिव के पांचवे अवतार हुए इसके बाद भगवान शिव की अष्ट मूर्तियां हुई और अर्धनारीश्वर रूप का वर्णन किया गया है। शर्व सर्वत्र उग्र भीम पशुपति ईशान श्रीविधा और महादेव शंकर जी की अष्ट मूर्तियां हैं और अष्टमूर्ति शंकर जी ही समूचे संसार की आत्मा है अष्ट मूर्तियों के रूप में भगवान समस्त जीवो की आत्मा कहे गए भगवान शिव के प्रथम से नवम ऋषभ अवतार का वर्णन किया गया, जिसमें 28 में योगेश्वर अवतार का वर्णन हुआ है।

महाकाल के दस अवतारों का किया वर्णन

भगवान शिव के महाकाल आदि 10 अवतारों का वर्णन किया गया है। महाकाल, तार, बाल भुवनेश, षोडश श्री विद्या, श्री भैरव, छिन्नामस्तर , धूमवन, बंगलारमुख, मातंग, कमल यह भगवान के प्रमुख 10 अवतार हुए। भगवान शिव के दुर्वासा ऋषि भी अवतार हैं और हनुमान जी भी अवतार है। ऐसी कथा भी गुरुदेव ने सुनाएं। रविवार को बड़ी संख्या में मातृशक्ति ने उपस्थित होकर पार्थिव शिवलिंग का निर्माण किया एवं अभिषेक किया साथ ही दिन में कथा को श्रवण कर जीवन को कृतार्थ किया ब्राह्मण समाज महिला मंडल उपस्थित रहा और आरती में भाग लिया। पं. शास्त्री ने कथा में 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस के उपलक्ष में आजादी के अमृत महोत्सव 75 वर्ष पूरे होने पर गुरु जी ने घर-घर में हिंदू राष्ट्र का ध्वज एवं सनातनी भगवा ध्वज लहराने का भी आग्रह किया।

00000000

Posted By: Nai Dunia News Network

NaiDunia Local
NaiDunia Local
  • Font Size
  • Close