भैरुंदा, नसरुल्लागंज। श्रावण के अंतिम सोमवार को मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के पुत्र कार्तिक सिंह चौहान के सानिध्य में प्रसिद्ध नर्मदा घाट नीलकंठ से भारतीय जनता युवा मोर्चा इकाई नसरुल्लागंज ने शिव साधना कावड़ यात्रा का आयोजन किया। जिसका नेतृत्व खुद कार्तिकेय सिंह ने किया। इस अवसर पर उनके साथ भाजपा जिलाध्यक्ष रवि मालवीय, मंडल अध्यक्ष धीरज पटेल, दिनेश शर्मा, युवा नेता ललित शर्मा, मारूती शिशिर, महेंद्र परिहार, राजेश पंवार, आशीष शर्मा, अजय पालीवाल, बसंत अग्रवाल, रिषभ जैन सहित युवा मोर्चा नगराध्यक्ष राजेंद्र सोनी मौजूद थे। कांवड यात्रा में हजारों भाजपा नेता व युवा मोर्चा कार्यकर्ता सम्मिलित हुए। सर्व प्रथम कार्तिकेय सिंह ने नीलकंठ नर्मदा तट पर मां नर्मदा का विधिपूर्वक पूजन अर्चना व महाआरती कर प्रदेशवासियों की खुशहाली की कामना कर मां नर्मदा का आशीर्वाद प्राप्त किया। वहीं हर हर महादेव के जयकारों से नर्मदा क्षेत्र गूंज उठा। इसके बाद कांवड यात्रा नसरुल्लागंज की और रवाना हुई। नीलकंठ में सरपंच संतोष वर्मा, उप सरपंच मोनिका केवट, सचिव रामकृष्ण पंवार सहित ग्राम चींच, मंडी, बोरखेडी, सोठिया के ग्राम वासियो ने कांवड यात्रा पर पुष्प वर्षा कर ऐतिहासिक स्वागत किया। इसी क्रम मे नसरुल्लागंज में भी भाजपा नेताओं ने कई जगह पुष्प वर्षा कर यात्रा का स्वागत किया। चौहान ने मां नर्मदा का जल लेकर करीब आठ किलोमीटर की यात्रा तय कर पातालेश्वर मंदिर सुदामपुरी में अभिषेक किया। इसके बाद चौहान नसरुल्लागंज तहसील के ग्राम बाबरी से निकलने वाली कावड़ यात्रा में सम्मिलित हुए जिले के सबसे प्राचीन व अलौकिक दर्शनीय स्थल टपकेश्वर महादेव कावड़ यात्रा के समापन पर भगवान टपकेश्वर शिवलिंग का रुद्राभिषेक व महाआरती मे शामिल हुए।

नर्मदा घाटों की हुई साफ-सफाई

कांवड़ यात्रा प्रारंभ होने से पूर्व नर्मदा स्नान के लिए नीलकंठ नर्मद घाट आए श्रद्धालु नर्मदा घाट को चकाचक साफ सुधरा देख आश्चर्यचकित हो उठे। शिव साधना कांवड़ यात्रा में कार्तिकेय सिंह चौहान के आने की जानकारी लगते ही स्वतः ही कह उठे भैया नर्मदा नर्मदा क्षेत्र मे साल भर में दो-चार बार आ जाया करो। जिससे नर्मदा के स्नान घाटों पर साफ-सफाई भी हो और रेत माफियाओं सहित असमाजिक तत्वों से भी स्नानार्थियों को कोई परेशानी भी नहीं हो। वर्ष भर नर्मदा क्षेत्र में स्नान घाटों पर रेत माफियाओं सहित असमाजिक तत्वों का जमावड़ा लगा रहता है। इन्हें राजनैतिक व प्रशासनिक संरक्षण प्राप्त होने से श्रद्धालुओं को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

Posted By: Nai Dunia News Network

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