सीहोर, नवदुनिया प्रतिनिधि। प्राकृतिक खेती धरती को बचाने का अभियान है, प्राकृतिक खेती नदियों को बचाने का अभियान है और यह मानव जीवन को तथा पृथ्वी के सभी जीव-जंतु, कीट-पतंगों को बचाने का अभियान है। यह बात मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने नसरुल्लागंज में आयोजित प्राकृतिक कृषि प्रशिक्षण शिविर के शुभारंभ अवसर पर किसानों को संबोधित करते हुए कही। मुख्यमंत्री चौहान ने किसानों को वर्चुअल संबोधित किया। शिविर में बड़ी संख्या में उपस्थित किसानों ने मुख्यमंत्री चौहान का संबोधन सुना। मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि खेती में बेतहाशा रासायनिक खाद और कीटनाशकों के उपयोग ने अनेकों जीव-जंतु और कीट-पतंगों को समाप्त कर दिया है, जिससे पृथ्वी का स्वास्थ्य तेजी से बिगड़ रहा है। अत्याधिक रासायनिक खाद के उपयोग से होने वाली पैदावार ने मानव स्वास्थ्य के लिए खतरा पैदा कर दिया है और कैंसर जैसी घातक बीमारियां हो रही है। उन्होंने कहा कि केंचुए जैसे अनेक पृथ्वी के मित्र कहे जाने वाले जंतु नष्ट हो रहे हैं। अब समय आ गया है कि हम प्राकृतिक खेती अपनाएं। मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देकर धरती को बचाने का अभियान शुरू किया है। अब समय आ गया है कि धीरे-धीरे रासायनिक खेती को छोड़कर प्राकृतिक खेती अपनाएं। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती से उत्पादन कम नहीं होता है। प्राकृतिक खेती से उत्पन्ना गेहूं, धान, अन्य आनाज फल, सब्जियां, मानव स्वास्थ्य के लिए सुरक्षित होती हैं। यह पौष्टिक तत्वों से भरपूर होती है तथा स्वाद भी अच्छा होता है जिससे शरीर को सभी आवश्यक पोषण तत्व मिलते हैं। मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि प्राकृतिक खेती का मतलब रासायनिक लैब से निकलकर प्रकृति की लैब में ली जाने वाली खेती है। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती अपनाने का मतलब यह है कि कम लागत और अधिक मुनाफा। उन्होंने कहा कि ज्यादा रासायनिक खाद डालने से उत्पादन अधिक होता है और उसकी लागत बढ़ जाती है किसान कर्ज में चला जाता है। मुख्यमंत्री चौहान ने किसानों से अपील की है कि यदि आपके पास पांच एकड़ खेती है तो आधा या एक एकड़ में प्राकृतिक खेती करें। प्राकृतिक खेती से भूमि की उर्वरा शक्ति बढ़ती है। प्राकृतिक खेती करने से रासायनिक खाद और कीटनाशक खरीदने में पैसा खर्च नहीं करना पड़ता और इसमें पानी भी बहुत कम लगता है, जिससे बिजली का खर्च भी घटेगा।

उत्तम स्वास्थ्य के लिए दोष रहित आहार जरूरी- श्री केवल्या स्वरूप स्वामी

प्रशिक्षण शिविर में नीलकंठ धाम गुजरात से आए मुख्य अतिथि केवल्या स्वरूप स्वामी ने कहा कि हमारे देश में खेती को उत्तम कहा गया है। लोगों का समाज का आचार विचार उत्तम हो, इसके लिए आहार भी दोष रहित व उत्तम हो। जैसा मिट्टी का स्वास्थ्य होगा वैसा ही मानव का स्वास्थ्य होगा। मिट्टी बीमार होगी तो मानव भी अस्वस्थ होगा। उन्होंने कहा कि खेती से ज्यादा उत्पादन लेने के लिए रासायनिक खाद का अत्याधिक प्रयोग किया जा रहा है, जो कि स्वयं के आर्थिक लाभ के लिए है। इसके नुकसान भी बहुत हैं। रासायनिक खेती से एक और धरती बीमार हो रही है तो दूसरी ओर मनुष्य भी अनेक बीमारियों की चपेट में आ रहा है। प्रशिक्षण शिविर में गुरू प्रसाद शर्मा, जिला भाजपा अध्यक्ष रवि मालवीय ने भी संबोधित किया। शिविर में रघुनाथ सिंह भाटी तथा कलेक्टर चन्द्र मोहन ठाकुर सहित कृषि अधिकारी व बड़ी संख्या में किसान उपस्थित थे।

किसानों ने कहा प्रशिक्षण बहुत उपयोगी है

लाड़कुई निवासी किसान लखन मालवीय, महागांव जदीद निवासी किसान गया प्रसाद कीर, टीकामोड़ निवासी हरिओम प्रजापति तथा श्यामपुर निवासी अर्जुन सिंह राजपूत सहित अनेक किसानों ने प्राकृतिक कृषि प्रशिक्षण को बहुत उपोयोगी बताते हुए प्राकृतिक खेती अपनाने की बात कही। उन्होंने कहा कि हमें भी धरती और स्वयं के तथा समाज के लोगों के बेहतर स्वास्थ्य के लिए प्राकृतिक खेती को कम जमीन से शुरू करेंगे।

Posted By: Nai Dunia News Network

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