आष्टा। जैन धर्म में चारित्र की पूजा की जाती है, यहा व्यक्ति को नहीं बल्कि व्यक्तित्व को प्राथमिकता दी गई है। भगवान की भक्ति ओर पूजन के लिए आमंत्रण की अपेक्षा नहीं की जा सकती। यदि आप भक्ति के लिए भी आमंत्रण की आवश्यकता महसूस करते है, तो यह आपकी भव्यता पर प्रश्नचिन्ह खड़ा करता है। वीतराग देव तथा चरित्र साधुओं की आराधना के लिए पूर्वाग्रह का त्याग करना होगा। पंचकल्याणक महोत्सव धर्म की प्रभावना ओर आत्मा की शुद्धि के लिए आयोजित किए जाते है। धर्म का प्रत्यक्ष संबंध आत्मा के कल्याण से है। धार्मिक आयोजनों में आत्माभिमान ओर मायाचारिता को छोड़कर निशल्य होकर श्रद्धापूर्वक शामिल होना चाहिए। इस कोरोना काल में जहां हम अपनी सुरक्षा के लिए सैनिटाइज होकर आ रहे हैं, वही सभी प्रकार के सांसारिक द्बंद को छोड़कर अपनी मन ओर आत्मा को भी सैनिटाइज अर्थात शुद्ध भावों से निर्मल करना आवश्यक है।

उक्त बातें ग्राम मैना स्थित पंचकल्याणक प्रतिष्ठा समारोह के पहल दिन अपने आशीष वचन के दौरान अयोध्या नगरी में मुनि श्री अजीत सागर महाराज ने कहीं। इसकेे साथ ही अयोध्या नगरी मैना में आज से प्रतिमा की प्राण प्रतिष्ठा के लिए आवश्यक पंचकल्याणक में से प्रथम गर्भ कल्याणक की क्रियाएं मुनिश्री अजीत सागर जी महाराज के सानिध्य में ब्रह्मचारी विनय भैय्या द्वारा शुरू की गई। संकल्पी पात्र गण, इंद्र-इंद्राणी, भगवान के माता-पिता, यज्ञनायक, धनपति कुवेर, अष्टकुमारियों आदि ने सभी धार्मिक क्रियाओं में भाग लिया। पंचकल्याणक महोत्सव को लेकर आष्टा, शुजालुपरए अकोदिया, तिलावद, कालापीपल के जैन बंधुओ तथा ग्रामीणों में उल्लास का वातावरण है। पंचकल्याणक समिति के अध्यक्ष मयूर जैन तथा मैना जैन समाज के अध्यक्ष राजेश जैन ने जानकारी दी कि मुनि श्री की आहरचर्या के साथ ही आगंतुक अतिथियों के भोजन एवं आवास की समुचित व्यवस्था भी की गई हे। सभी कार्यक्रम मुनि श्री के सानिध्य में निश्चित समय पर धार्मिक विधि पूर्वक संपादित किए जा रहे हैं। विधायक रघुनाथ सिंह मालवीय, जिला पुलिस अधीक्षक एसएस चौहान एवं एसडीएम विजय मंडलोई, मोहन सारवान आदि पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव में शामिल हुए।

आज गर्भ कल्याणक उत्तर रुप, माता की गौर भराई होगी

पंच कल्याणक महोत्सव के दूसरे दिन 26 नवंबर को गर्भ कल्याणक उत्तर रुप के दिन सुबह 6.30 बजे नित्य मय अभिषेक, शांतिधारा, गर्भकल्याणक पूजन, शांति हवन, 8.30 बजे मुनि श्री के प्रवचन, दोपहर 12.30 बजे सीमांतनी क्रियाएं, माता की गोद भराई, शाम 6 बजे गुरु भक्ति, 7 बजे मंगल आरती, शास्त्र प्रवचन, रात 8 बजे महाराजा नाभिराज का राज दरबार में आगमन, 16 स्वप्न फलादेश, गीत, नृत्य, छप्पनकुमारियों द्वारा माता मरु देवी को भेंट समर्पण एवं प्रश्न उत्तर तथा माता के 16 स्वप्नों का सचित्र वर्णन किया जाएगा।

Posted By: Nai Dunia News Network

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