अक्षय शर्मा, इछावर। सीहोर के इछावर स्थित गांव नरसिंह खेड़ा के ग्रामीण जान जोखिम में डालकर कड़ाही का उपयोग कर नदी पार करने को मजबूर हैं। नरसिंह खेड़ा गांव के 25 से 30 परिवार सहित छह गांव के लोग पुल न होने से 20 से 25 मीटर चौड़ी इस नदी को बड़ी लोहे की कड़ाही में बैठकर पार करते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि जब से हमने होश संभाला है तब से ही हमें बावलियाअजनाल नदी को लोहे की कड़ाही के माध्यम से ही पार करना पड़ता है। इस समस्या से सांगली, दुर्गापुरा, बिशन खेड़ी, मोलगा जैसे गांव के ग्रामीणों का जीवन प्रभावित है।

साल के 12 में से 8 महीने इस नदी में पानी रहता है। इससे एक गांव से दूसरे गांव जाने में काफी असुविधा होती है और कई बार तो नदी का बहाव तेज होने के कारण कई दिनों तक एक गांव से दूसरे गांव का संपर्क भी टूट जाता है। ग्रामीणों द्वारा कई बार समस्या से अधिकारियों को अवगत भी करा चुके हैं, लेकिन जिम्मेदार कर्मचारी व अधिकारी चुप्पी साधे हुए हैं। घाट पर एक व्यक्ति को रहना ही पड़ता है, ताकि महिलाएं व बच्चे सुरक्षित इस नदी को पार कर उस पार जा सकें।

हर साल लानी पड़ती दस हजार रुपये की नई कड़ाही

ग्रामीणों का कहना है कि साल भर में लगभग आठ महीने नदी में पानी रहता है जिसे पार करने के लिए दस हजार रुपये की हर साल एक नई कड़ाही खरीदनी पड़ती है। क्योंकि एक कड़ाही एक साल ही चल पाती है, जो कि पूरे समय पानी में रहने के कारण जंग खाकर खराब हो जाती है। नदी के रास्ते में पड़ने वाले हर खेत के लोगों को अपने लिए अलग ही एक कड़ाही खरीदनी ही पड़ती है।

करेंगे चुनाव का बहिष्कार

ग्रामीणों का कहना है कि नेता सिर्फ वोट मांगने आते हैं और फिर जीत कर इस समस्या से मुंह फेर लेते हैं। कोई हमारी सुनने को तैयार नहीं। इसलिए जब तक इस नदी पर पुल नहीं बन जाता है तब तक हर चुनाव का बहिष्कार करेंगे।

मामला मेरे संज्ञान में लाया गया है, लेकिन अब आदर्श आचार संहिता लागू हो चुकी है, जिससे कोई भी नव निर्माण कार्य की अनुमति नहीं है। जैसे ही नया कार्यकाल प्रारंभ होगा मैं इस कार्य को प्राथमिकता दूंगा। -आरडी पटेल, सीईओ इछावर

Posted By: Nai Dunia News Network

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