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कई गांवों में गहराया जलसंकट, दो-तीन किमी दूर से पानी ढोकर ला रहे ग्रामीण

सहेज लो हर बूंदः आजादी के 70 साल बाद भी ग्रामीण पेयजल आपूर्ति को मोहताज

फोटो 24 दौलतपुर। ग्राम आर्या में खेत पर बने कुए से बैलगाड़ी सहित अन्य साधनों से पानी ले जाते हुए ग्रामीण। नवदुनिया

सीहोर/दौलतपुर (नवदुनिया प्रतिनिधि)। आजादी के 70 साल बाद भी ब्लाक के कई गांवों के लोग पेयजल जैसी मूलभूत सुविधा से वंचित है। आलम यह है कि इन गांवों में गर्मी के शुरुआत से ही गंभीर जलसंकट गहरा गया है। ग्रामीण दूरस्थ खेतों में स्थित कुए, ट्यूवबेल से पानी ढोकर ला रहे हैं। जलसंकट की यह समस्या गांव में दशकों से बनी हुई है, लेकिन शासन-प्रशासन द्वारा इस ओर ध्यान नहीं दिया जा रहा है, वहीं ग्रामीण भी पानी को सहेजने को लेकर जागरूक नहीं है, जिससे हर साल पानी के लिए मशक्कत करनी पड़ती है।

ब्लाक के दीवड़िया, दौलतपुर, ब्रिजीसनगर, आर्या सहित आसपास के गांवों में इस समय जलसंकट की समस्या गहराती जा रही है। स्थिति यह है कि ग्रामीणों को दो से ढाई किमी दूर खेतों में स्थित कुए, ट्यूवबेल से पानी की व्यवस्था करना पड़ रही है। जबकि शासन द्वारा हर घर में नल से पानी पहुंचाने के लिए जल जीवन मिशन चलाया जा रहा है, लेकिन यह योजना क्षेत्र में प्रशासन की लापरवाही के कारण कारगर साबित नहीं हो पा रही है। करीब 18 सौ की आबादी वाले गांव दौलतपुर के ग्रामीणों को पानी की आपूर्ति के लिएं इधर-उधर भटकना पड़ रहा है। अनुसूचित जाति, जनजाति बाहुल्य इस गांव में ग्रामीणों को जलापूर्ति की सुविधा के लिएं शासन के इंतजामों के नाम पर चंद हैंडपंप हैं, जो कि गर्मी आरंभ होने के पूर्व ही सूख जाते हैं। गर्मी के लगभग चार महीनें ग्रामीणों को गंभीर जलसंकट का सामना करना पड़ता है। हालात यह रहते हैं कि लोगों को बूंद-बूंद पानी के लिएं जद्दोजेहद करना पड़ती है। महिलाओं और बच्चों को गर्मी की चिलचिलाती धूप में दो-ढाई किमी दूर खेतों में स्थित कुए, ट्यूबवेल से पानी ढोकर लाना पड़ता है। इस समय से निजात दिलाने के लिएं ग्रामीण अक्सर जनप्रतिनिधि और प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों से मांग करते हैं, तो हर बार आश्वासन मिलता है, लेकिन समस्या का समाधान अभी तक नहीं किया जा सका है।

झिरों से बूंद -बूंद पानी उलीचकर करते है व्यवथा

तापमान बढ़ने के साथ ही गांव में जलसंकट की समस्या भी भयवहा हो जाती है। स्थिति यह रहती है कि तालाब में झिरियां खोदकर लोग एक घड़ा पानी भरने के लिएं घंटो बूंद -बूंद उलीचने को मजबूर रहते है। कई बार दूषित पानी पीने के चलते लोग बीमारी की चपेट में भी आ चुके है। गांव के धरमसिंह , भगवती प्रसाद , मोहन , मांगीलाल आदि ग्रामीणों का कहना है कि कई छोटे -छोटे गांवो में शासन नलजल योजना , जल जीवन मिशन आदि के माध्यम से ग्रामीणों को जलापूर्ति की सुविधा उपलब्ध करवा रही है। जबकि दौलतपुर की आबादी 18 सौ के लगभग होने के साथ ही अनुसूचित जाती, जनजाती बाहुल्य है इसके बाद भी यहां पर पेयजल सुविधा के नाम पर काई इंतजाम नही है। यह दुर्भाग्यपूर्ण है।

की जा रही है व्यवस्था

ब्रिजिसनगर और दीवड़िया में तीन महीने में योजना का 50 फीसद कार्य पूर्ण हो चुका है। बाजार में डीआइ पाइप उपलब्ध नहीं होने के कारण ठेकेदार ने काम बंद कर दिया था, लेकिन वैकल्पिक तौर पर अन्य पाइप लगाने की अनुमति दे दी गई है। जल्दी ही ठेकेदार द्वारा कार्य आरंभ कर दिया जाएंगा। इसके साथ ही दौलतपुर को भी जल जीवन मिशन योजना में शामिल कर लिया गया है।

-एमसी अहिरवार, ईई पीएचई विभाग सीहोर

Posted By: Nai Dunia News Network

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