भैरुंदा (भैरुंदा (नसरुल्लागंज)। कोरोना काल में निजी स्कूल संचालकों ने स्कूल खोलने तथा आरटीआई की राशि लेने तथा स्कूल शुल्क माफ करने को लेकर शासन प्रशासन पर लगातार दबाव बनाया था। इसी का नतीजा यह निकला की शिक्षा विभाग ने निजी स्कूलों पर नकेल कसने के लिए एक नया आदेश जारी कर दिया। जिसमें निजी स्कूल संचालक अब मान्यता को लेकर अभिभावकों और विद्यार्थियों को भ्रमित नहीं कर सकेंगे। स्कूलों को मान्यता की अवधि व बोर्ड का नाम सूचना बोर्ड पर लिखना होगा। ऐसा नहीं करने पर स्कूलों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के निर्देश लोक शिक्षण संचालनालय ने दिए है। निजी स्कूलों में निर्देशों का पालन हो रहा है या नहीं इसकी जिम्मेदारी संकुल प्राचार्यों को दी गई है। संकुल प्राचार्य स्कूलों का निरीक्षण कर इसकी रिपोर्ट सीधे जिला शिक्षा अधिकारी को पेश करेंगे। जिन स्कूलों में सूचना बोर्ड पर स्कूलों की मान्यता का विवरण नहीं होगा। उन स्कूलों को अनाधिकृत मानकर उनके खिलाफ वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। बीते दिनों लोक शिक्षण संचालनालय के द्वारा समस्त स्कूल संचालकों के साथ जबावदारों को निर्देश जारी किए गए है। हालांकि डीपीसीआई ने इस वर्ष स्कूल संचालकों की सुविधा के अनुसार स्कूलों का निरीक्षण करने के आदेश अधिकारियों को दिए है। आदेश में स्पष्ट बताया गया है कि स्कूल संचालक जो अभी निरीक्षण नही कराना चाहते उनको तत्काल निरीक्षण कराए जाने के लिए बाध्य न किया जाए। स्कूल खुलने के बाद ही इन स्कूलों का निरीक्षण किया जाए। कोरोना संक्रमण के कारण निजी स्कूलों की मान्यता शासन द्वारा एक साल के बड़ा दी गई थी। अब 2022-23 की मान्यता के लिए स्कूलों का निरीक्षण किया जाना है। नोटिफिकेशन के तहत स्कूलों में खेल मैदान का होना आवश्यक है। स्कूल संचालक आवेदन में अन्य खेल मैदान को दिखाकर मान्यता नहीं ले पाएंगे। वहीं स्कूल खोलने के लिए स्कूल संचालकों को अन्य सुविधाएं भी दिखाना होंगी। शाला परिसर में पक्की और पर्याप्त जगह के साथ बाऊंड्रीवाल न होने पर मान्यता रोकी जा सकती है। ज्ञात हो कि गत वर्ष जिले भर के साथ प्रदेश भर में निरीक्षण के दौरान ऐसे स्कूल संचालित होते मिले थे जिनकी मान्यता रद्द हो चुकी थी। उसके बाद भी यह स्कूल संकुल प्रभारियों की मदद से संचालित हो रहे थे। साथ ही मान्यता के लिए फर्जी खेल मैदान दिखाकर मान्यता तो प्राप्त कर ली थी, लेकिन खेल मैदान का कोई अता-पता नहीं था। ऐसे स्कूलों पर प्रशासन ने अर्थ दंड लगातार मान्यता के लिए आवेदन मांगा था, लेकिन स्कूल संचालकों ने मान्यता के लिए आवेदन ही नहीं किए थे।

पूर्व में भी इस तरह के आदेश थे, जिसके तहत स्कूल संचालकों को कहा गया था कि स्कूलों में उचित स्थानों पर बोर्ड लगाकर मान्यता से संबंधित सारी जानकारी का उल्लेख करें।

भूपेश शर्मा, बीआरसीसी भैरुंदा (नसरुल्लागंज)

Posted By: Nai Dunia News Network

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