सीहोर (नवदुनिया प्रतिनिधि)। जिले में कृषि विभाग के अनुसार 10 लाख क्विंटल से अधिक मूंग का उत्पादन हुआ है, लेकिन अब तक सिर्फ 2 लाख क्विंटल ही मूंग की खरीदी हो सकी है। हालांकि कई किसानों ने पंजीयन नहीं कराया है, लेकिन पोर्टल बंद होने के 15 दिन बाद फिर सोमवार से मूंग की खरीदी शुरू की गई, लेकिन एमएमएस कम छोड़ने व बारिश के चलते किसानों के नहीं पहुंचने से दोपहर में ही कई केंद्र बंद हो गए। हालत यह रही कि कई केंद्र जहां खुले ही नहीं तो कई केंद्रों पर 3 से 4 किसान ही समर्थन मूल्य पर मूंग बेचने पहुंचे, वहीं पांच एकड़ से कम रकबे वाले किसानों को पास एसएमएस नहीं पहुंचने से वह इधर-उधर भटक रहे हैं।

जानकारी के अनुसार जिले में बनाए गए 26 खरीदी केंद्र में पंजीकृत 26 हजार 200 किसानों में से 15 दिन पहले तक 10 हजार 166 किसानों से 2 लाख 79 हजार क्विंटल मूंग खरीदी जा चुकी है, जो 149 करोड़ 60 लाख 82 हजार 509 की है। इसमें से 53 करोड़ 68 लाख 76 हजार 897 रुपये का ही भुगतान हुआ है। जबकि किसानों की 95 करोड़ 92 लाख 5 हजार 612 रुपये अभी भी बकाया। जबकि सोमवार को शेष 15 हजार से अधिक किसानों की मूंग खरीदी में कई अव्यवस्थाएं नजर आई। कहीं 15 एसएमएस भेजने के बाद 3 से 4 किसान ही उपज लेकर पहुंचे, तो कहीं एसएमएस ही नहीं पहुंचे, जिससे किसान परेशान होते नजर आए।

नहीं पहुंचे किसानों के एसएमएस

भैरुंदा के शिवानी वेयरहाउस फुल होने के बाद अब कमला वेयरहाउस में मूंग की तुलाई होना है, लेकिन प्रशासन से स्पष्ट आदेश नहीं होने के कारण किसानों को एसएमएस नहीं छोड़ गए हैं, जिससे चींच व सोठिया के किसान खरीदी शुरू होने के बाद भी तुलाई केंद्र पर नहीं पहुंचे। यही हाल अन्य केंद्रों के भी रहे, जिससे किसानों की मूंग की खरीदी नहीं हो सकी। हालांकि कुछ केंद्रों पर तुलाई हुई, लेकिन किसानों की संख्या बेहद कम रही। ललता वेयर हाउस के प्रभारी अरुण यादव ने बताया कि 15 किसानों को एसएमएस छोड़ा गया था, जिसमें से अधिकांश किसान मूंग तुलाकर चले गए।

छोटे किसानों के पास नहीं आ रहे एसएमएस

बाबरी के सुनील यदुवंशी ने बताया कि क्षेत्र में बड़े किसानों को एसएमएस भेजकर कई ट्राली मूंग खरीद ली गई है, लेकिन छोटे किसानों के पास अब तक एसएमएस नहीं आए हैं, जिसको लेकर किसान यहां-वहां भटक रहे हैं। अग्रवाल वेयर हाउस यूनिट 2 पर चार ही किसानों की उपज तुल सकी। क्योंकि किसानों के पाए एसएमस नहीं पहुंचे। भगत सिंह ने बताया कि 15 दिन से पोर्टल बंद था, जिसके बाद सोमवार से शुरू हुई समर्थन पर मूंग की खरीदी से लग रहा था कि अब एसएमएस आएंगे, लेकिन अभी तक नहीं आए हैं, जिससे छोटे किसानों की मूंग को समर्थन मूल्य नहीं मिल पा रहा है। जबकि बारिश का समय होने से नुकसान होने की आशंका है, वहीं मनीश यादव बरखेड़ा का कहना है कि जगह-जगह भटकने के बाद भी समर्थन पर तुलाई नहीं हो रही है। मजबूरी में मंडी में मनमाने दाम पर मूंग बेचनी पड़ेगी।

दूसरे गांव में तुलाई केंद्र होने से हो रहा भेदभाव

डिमावर सोसायटी पर समर्थन मूल्य पर मूंग की खरीदी की जा रही है, जिसमें बाबरी, खड़गांव के किसानों की भी तुलाई हो रही है, लेकिन स्थानीय सोसायटी वालों को अधिक महत्व देते हुए भेदभाव किया जा रहा है। किसानों ने बताया कि डिमावर के 90 फीसद किसानों की मूंग की तुलाई हो चुकी है। जबकि बाबरी और खड़गावं के पांच एकड़ वाले किसानों के पास अब तक एसएमएस नहीं पहुंचे हैं।

किसान नहीं आए तो वेयर हाउस बंद कर हो गए गायब

कोशमी वेयरहाउस पर सोमवार को 15 संदेश किसानों को भेजे थे, जिसमें से सिर्फ तीन किसान ही मूंग की उपज वेयरहाउस लेकर पहुंचे। संस्था के सेक्रटी तेज सिंह ठाकुर ने बताया कि बड़ी संख्या में किसानों ने पंजीयन तो करा रखे हैं, लेकिन मूंग की उपज उनके पास नहीं है। यही कारण है कि 15 में से तीन किसान ही तीन ट्राली मूंग समर्थन मूल्य पर बेचने लाए थे। पोर्टल बंद होने के कारण 15 दिन खरीदी नहीं हो सकी। ऐसे में ज्यादा किसान आने की उम्मीद थी, लेकिन किसान मूंग लेकर नहीं आए तो वेयरहाउस बंद करके चले गए। रेहटी में करीब आठ केंद्र पर समर्थन मूल्य पर मूंग की तुलाई की जा रही है।

मौसम की वजह से नहीं पहुंचे किसान

जिले में बनाए गए सभी समर्थन केंद्र से एसएमएस छोड़ने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन केंद्रों पर शायद मौसम खराब होने की वजह से कम ही किसान पहुंचे हैं, जिनकी तुलाई की गई है। आगामी समय में किसानों की संख्या बढ़ने की उम्मीद है।

आरएस जाट, प्रभारी उपसंचालक कृषि विभाग सीहोर

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Posted By: Nai Dunia News Network

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