सीहोर (नवदुनिया प्रतिनिधि)। सायबर क्राइम के नए-नए तरीके हर इजाद किए जा रहे हैं। एक तरीके को लेकर पुलिस लोगों को जागरुक करता है। इसके तुरंत बाद ठग दूसरा तरीका इजाद कर लेते हैं। अब तक तो ठग सिर्फ कैश बैक, ओटीपी, पॉलिसी रिटर्न और अन्य तरीकों से ही ठगी करते थे, लेकिन अब ठग पुलिसिया अंदाज में बात कर पुलिस के अधिकारियों के नाम से ही ठगी कर रहे हैं। जिसके जाल में लोग डरकर या संबंधों के चलते फंस जाते हैं। ऐसा ही एक मामला हाल ही में सीहोर शहर में सामने आया। जिसमें एक ठग ने एएसपी बनकर एक पेट्रोल पंप संचालक को फोनकर रुपये मांगे। पेट्रोल पंप संचालक दिए गए बैंक एकाउंट में रुपये जमा करने जा ही रहा था कि उसे सूचना मिल गई कि यह कॉल फैक था और वह ठगी से बच गया। इस ठगी से बचाने में उस अधिकारी की अहम भूमिका रही जिसके नाम से ठगी करने का प्रयास किया जा रहा था।

दरअसल मामला सीहोर के मंडी क्षेत्र का है। जहां बुधवार की दोपहर मंडी पुलिस थाने के एक आरक्षक के पास फोन आया। फोन आरक्षक ने उठाया तो उससे सामने वाले व्यक्ति ने कहा कि मैं एएसपी समीर यादव बोल रहा हूं। थाने के पास कौन सा पेट्रोल पंप है। इस पर आरक्षक ने कहा सर चांडक पेट्रोल पंप है। तो एएसपी यादव ने कहा कि जाओ और वहां मालिक से मेरी बात कराओ। आरक्षक पहुंच गया पेट्रोल पंप और मालिक से बात कराई। पेट्रोल पंप के मालिक श्री चांडक से एएसपी यादव ने कहा कि मुझे किसी पीड़ित की मदद करनी है। इसलिए मैं जो एकाउंट नंबर तुम्हे दे रहा हूं उसमें 50 हजार रुपये डाल देना। पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी की बात को टालने की हिम्मत पेट्रोल पंप संचालक नहीं कर पाया और उसने अपने एक कर्मचारी को बैंक भेज दिया रुपये डलवाने। इसी बीच पंप संचालक ने एएसपी समीर यादव के परिचित अनिल पालीवाल को फोन लगाकर यह बात बताई। तो श्री पालीवाल ने एएसपी समीर यादव से पूछा कि आपको क्या समस्या आ गई है। इस पर समीर यादव ने अनभिज्ञता जताई। तो मामला खुलकर सामने आ गया। एएसपी यादव ने बताया कि मैंने किसी से कोई बात नहीं की। इस पर पेट्रोल पंप संचालक श्री चांडक के मित्र श्री पालीवाल ने उन्हें बताया कि रुपये न डाले, क्योंकि एएसपी समीर यादव ने आपको फोन नहीं किया है। वहीं समीर यादव को यह सूचना मिलते ही उन्होंने तुरंत कार्रवाई शुरू कर दी। उन्होंने इस ठगी से श्री चांडक को तो बचा लिया, लेकिन प्रदेश में इस तरह के कई मामले उन्हें पता चल गए।

राजस्थान से चल रहा है गिरोह

एएसपी समीर यादव ने बताया कि यह शातिर गिरोह पहले तो पूरे अधिकारियों के सीयूजी नंबर निकालता है। इसके बाद उसे अधिकारियों का नाम और पदस्थापना की जगह पता चल जाती है। इसके बाद वे एक नंबर उन्हीं के नाम से तैयार करते हैं। जिसे ट्रू कॉलर पर सर्च करने पर उसी अधिकारी का नाम स्क्रीन पर आता है। फिर वे उसे अधिकारी के नाम से उसके अंडर में आने वाले थानों में फोन करते हैं। थानों के कर्मचारी डर के कारण अधिकारी से पूछताछ भी नहीं कर पाते। वहीं पीड़ित भी पुलिस के डर के कारण रुपये दे देता है। जानकारी अनुसार इस तरह के मामले अलिराजपुर, नीमच और मंदसौर में घटित हो चुके हैं। वहीं जिले के गोपालपुर, बुदनी और नसरुल्लागंज थानों में भी इस तरह के फोन पहुंचे हैं, लेकिन फिलहाल ठग इसमें कामयाब नहीं हो सके हैं। ठग जिले के एक पूर्वाधिकारी के नाम से भी कई थानों में फोन कर चुके हैं।

मेरे संज्ञान में जैसे ही मामला आया। मैंने तुरंत खोजबीन शुरू कर दी। जिसके बाद पता चला कि यह गिरोह राजस्थान के अलवर का है जो ठगी कर रहा है। हम आरोपितों तक पहुंच गए हैं। जल्द ही मामले का खुलासा हो जाएगा। इसके साथ ही इस तरह के फोन आने पर लोग तुरंत पुलिस से संपर्क करें।

समीर यादव, एएसपी सीहोर।

Posted By: Nai Dunia News Network

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