सीहोर। जिले में इस बार बरसात कम हुई है और 15 सितंबर तक ही बरसात का समय माना जाता है, इसके बाद वर्षाकाल समाप्त माना जाता है। ऐसे में अब आगामी दिनों में पानी का संकट नहीं हो, इसके लिए बरसात के पानी को सहेजने की कवायदें शुरू हो गई है, स्टाप डैमों के शटर लगाए जा रहे हैं। इससे स्टापडैमों में अधिक से अधिक पानी को सहेजा जा सके। वहीं पानी सहज भी लिया तो उससे सिर्फ पेयजल की आपूर्ती ही हो पाएगी। जबकि हर डैम

गौरतलब है कि जिले में 01 जून से 15 सितंबर तक 835.1 मिलीमीटर औसत वर्षा दर्ज की गई। जो कि गत वर्ष इसी अवधि में औसत वर्षा 1305.2 मिलीमीटर थी। जिले की वर्षा ऋतु में सामान्य औसत वर्षा 1148.4 मिलीमीटर है। 1 जून से 15 सितंबर तक जिले के वर्षामापी केन्द्र सीहोर में 808.5 मिलीमीटर, श्यामपुर में 763.9, आष्टा में 722.0 जावर में 704.7, इछावर में 825.3, नसरुल्लागंज में 852.0, बुदनी में 1013.0, रेहटी में 991.6 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई है।

पानी की चोरी रोकना होगा चुनौती

जिले में बरसात के पानी को सहेजने के लिए जिले में करीब 250 से अधिक स्टापडेम बनाए गए हैं। जिले में बरसात की स्थिति को देखते हुए स्टापडैमों में गेट लगाए जा रहे हैं, गौर तलब है कि जिले में स्टापडैमों में जब तक पानी रहता है, तब तक स्टापडैमों के आसपास का जल स्तर बना रहता है, लेकिन इन स्टापडैमों से पानी की चोरी रोकना भी प्रशासन के लिए बडी चुनौती बनेगी।

सहेजना होगा पानी

जिले में इस बरसात अभी तक 33 इंच हो चुकी है, बरसात कम होने के कारण हालात यह है कि इस बार सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी कई किसानों के पास नहीं है। इस कारण से उन्हें पलेवा की सिंचाई के लिए भी मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है। हालात यह है कि यदि समय बरसात के पानी को नहीं सहेजा गया तो आगामी दिनों में काफी मुश्किल हो सकती है। सिंचाई और पेयजल की स्थिति भी प्रभावित हो सकती है।

Posted By: Nai Dunia News Network

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