आष्टा। शारदीय नवरात्र इस बार 8 दिन में समाप्त हो गई। गुरुवार को महानवमी मनाई। महानवमी इस बार रवि योग में मनाई, वहीं विजया दशमी को सर्वार्थ सिद्धि योग रहेगा। 13 अक्टूबर को अष्टमी तिथि रात 11.20 तक रही। नवमी तिथि 14 अक्टूबर को रात 9.27 तक रही। इसलिए नवमी पर होने वाली देवी महापूजा गुरुवार को की गई। नवमी का आरंभ 13 अक्टूबर की रात 11.21 बजे प्रारंभ हुआ।

नवरात्र के आखिरी दिन यानी महानवमी को समस्त सिद्धि प्रदान करने वाली मां सिद्धिदात्री का पूजन किया गया। अष्टमी तिथि की तरह ही नवरात्र में नवमी तिथि का भी विशेष महत्व माना गया है। सर्वार्थ सिद्धि योग सुबह 6.40 से 9.15 बजे तक, अभिजीत मुहूर्त सुबह 11.38 बजे से 12.26 बजे तक रहा। इसी दौरान मां के दरबार में हवन पूजन किया गया। मां राजराजेश्वरी दुर्गा मंदिर गंज चौराहा पर मां पार्वती परमार्थिक ट्रस्ट के अध्यक्ष महेंद्र मूंदडा सहित अनेक श्रद्धालुओं ने कोरोना व डेंगू से मुक्ति दिलाने के लिए मां से कामना करते हुए हवन में आहुतियां दी। नवरात्र की महाष्टमी का पर्व बुधवार को तथा नवमी का पर्व गुरुवार को आस्था और उल्लास के साथ मनाया गया। शहर के अति प्राचीन श्री कालिका माता व दुर्गा मंदिर परिसर में हवन हुआ। घर-घर में परिवार के सभी सदस्यों ने मिलकर हवन कर, पूजा-अर्चना की और मां दुर्गा की महाआरती की। शहर के अधिकांश मां दुर्गा के पंडालों में आराधिकाओं ने गरबा कर मां की आराधना की। सुबह से ही माता मंदिर में भक्तों की आवाजाही काफी संख्या में रही। सुबह 10 बजे राज राजेश्वरी देवी मंदिर में पंडित गणेश व्यास आदि ने मंत्रोच्चार के साथ मां पार्वती परमार्थिक ट्रस्ट अध्यक्ष महेंद्र मूंदड़ा की मौजूदगी में समिति के पदाधिकारियों ने हवन में आहुतियां देना शुरू की थी। दोपहर 1 बजे हवन की पूर्णाहुति हुई। श्रद्धालुओं व नव दुर्गा समितियों ने महाअष्टमी व नवमी को कन्या भोज के साथ हवन-यज्ञ तथा भंडारा भी किया। शहर में कई स्थानों पर भंडारे का आयोजन किया गया, लेकिन इस बार भंडारे का प्रसाद स्टॉल लगाकर लोगों को बांटा गया, बैठाकर भंडारा इस बार कम ही संख्या में हुए। शहर के देवी मंदिरों में हवन भी किए गए। इसके साथ हवन कर कन्या भोज भी कराया। वहीं जहां पंडालों में देवी प्रतिमा स्थापित की गई है, उनका विसर्जन दशहरे को किया जाएगा। बंगाली समाज के श्रद्धालुओं द्वारा देवी प्रतिमा स्थापित की गई है। यहां देवी षष्ठी से प्रतिदिन पूजन किया जा रहा है। बुधवार को महाअष्टमी की पूजा के साथ ही संधि पूजा भी की गई। देवी की आराधना में श्रद्धालुओं ने धुनुची नृत्य भी किया। इस मौके पर अनेक भक्तगण मौजूद थे।

Posted By: Nai Dunia News Network

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