सीहोर। नर्मदा तटके के प्रसिद्ध आंवली घाट सहित अन्य घाटों पर कलेक्टर ने 11 गोताखोरों को नियुक्त किया है, जो पर्व व विशेष आयोजनों पर घाटों पर तैनात किए थे। जिन्होंने अपनी पैनी नजर रखकर स्नानों के दौरान साल भर में 80 जाने बचाकर किसी को भी नहीं डूबने दिया, लेकिन कलेक्टर के द्वारा जो 10-10 हजार रुपये की राशि देने की बात कही थी, वह डूबती नजर आ रही है। क्योंकि एक साल से यह गोताखोर राशि के लिए कलेक्टर को ज्ञापन दे-देकर थक गए हैं, लेकिन राशि नहीं मिली है। कलेक्टर हर बार आश्वासन देते हैं। वहीं रेहटी से सीहोर आने में गोताखोरों के 30 हजार रुपये खर्च हो चुके हैं।

जानकारी के अनुसार नर्मदा तटों पर नवरात्र, अमावस्या आदि पर्वों पर बड़ी संख्या में लोग नर्मदा में स्नान करने पहुंचे जाते हैं, जिससे कई बार श्रद्धालुओं की डूबने से मौत हो जाती है, जिन्हें रोकने के लिए कलेक्टर अजय गुप्ता ने एक साल पहले क्षेत्र के गोताखोरों का टेस्ट करवाकर माहिर 11 गोतोखोरों को तैनात किया था, जिन्हें 10-10 हजार रुपये देने का वादा किया था। इस दौरान गोताखोरों ने पिछले एक साल में 80 लोगों की जान बचाई, जिनके प्रशासन ने उन्हें प्रमाण पत्र भी दिए, लेकिन वह एक साल से मेहनताना के रूप में मिलने वाली 11 गोतोखोरों को 1 लाख 10 रुपये राशि के लिए कलेक्ट्रेट के चक्कर काट रहे है, जिसमें वह रेहटी से सीहोर कलेक्ट्रेट 8 बार आने में खुद 30 हजार रुपये खर्च कर चुके हैं, लेकिन हर बार आश्वासन ही हाथ लग रहा है। यही कारण है कि गोतोखोर परेशान होते नजर आ रहे हैं।

रेस्क्यू आपरेशन को सफल बनाने में माहिर हैं गोताखोर

ग्राम आंवलीघाट सहित अन्य नर्मदा घाटों पर गोताखोर के रूप में प्रशासन के द्वारा राधेश्याम, वंशीलाल, केदार केवट, कांता केवट, रामविलाश, मोहन केवट, रामविलाश, पुरुषोत्तम, घासीराम, बृज केवट, रामविलाश, रामकिशन, बाबूलाल, राकेश, महेश केवट, मिश्रीलाल, गुलाबचंद, विजय केवट, रामाधार, शुभम, संतोष, श्याम केवट को नियुक्ति प्रदान की थी। उक्त गोताखोरों को प्रशासन और पुलिस के द्वारा कभी भी बुला लिया जाता है। जिन शवों को कोई नर्मदा से निकालने तैयार नहीं होता है। प्रशासन सभी रेस्क्यू आपरेशन में लगे शासकीय सेवक असफल हो जाते हैं तब क्षेत्र के गोताखोरों को मदद के लिए बुलाया जाता है।

जान बचाने वालों के लिए भगवान बन जाते हैं गोताखोर

गोताखोरों ने अबतक कितने शव नर्मदा नदी से निकाले हैं इस की सही गिनती उन्हें नहीं मालूम है, लेकिन स्थानीय प्रशासन के द्वारा गोताखोरों को अबतक 100 से अधिक हस्तलिखित प्रमाण पत्र जान बचाने पर दिए जा चुके हैं। नर्मदा में डूबने से बचने वाले लोगों और उनके परिजन गोताखोरों को देवदूत से कम नहीं मानते हैं। नर्मदा स्नान करते वक्त डूबकर जान गवाने वाले लोगों के परिजन अंतिम संस्कार के लिए शव मिलने पर भी गोताखोर को धन्यवाद देते नहीं थकते हैं। कलेक्ट्रेट पहुंचे गोताखोरों ने आष्टा विधायक रघुनाथ मालवीय और पूर्व जनपद सदस्य रामभजन मालवीय के साथ डिप्टी कलेक्टर रवि वर्मा को मामले से संबंधित ज्ञापन देकर कलेक्टर के द्वारा घोषित प्रोत्साहन राशि प्रत्येक गोताखोर दस हजार रुपये दिलाने की मांग की है।

Posted By: Prashant Pandey

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