आष्टा। मकर संक्रांति इस बार भी दो दिन मनेगी। 14 जनवरी की दोपहर 2.29 बजे सूर्य का मकर राशि में प्रवेश होने के कारण यह स्थिति बनी है। इस पर्व पर तिल-गुड़ के साथ पतंग का भी महत्व है। पहले गुल्ली-डंडा बहुत खेलते हैं।

पंडितों का कहना है कि 15 जनवरी को सूर्योदय के समय उदया तिथि पूर्ण काल में संक्रांति रहेगीए। इसलिए इस दिन ही पुण्य काल रहेगा। कई पंचांगों में सूर्य का मकर राशि में प्रवेश दोपहर 2.40 पर होना बताया है। समय को लेकर पंचांग भेद के चलते शैव संप्रदाय से जुड़े कई लोग 14 जनवरी को नदियों में स्नान कर मकर संक्रांति मनाएंगे, लेकिन वैष्णव शनिवार को ही सूर्य आराधना करेंगे। खास बात यह है कि सूर्य इसी दिन से उत्तरायण होंगे और बुध के भी इसी राशि में रहने से बुधादित्य योग और शनि प्रदोष भी रहेगा। इस दिन भगवान सूर्य अपने पुत्र शनि के स्वामित्व वाली राशि मकर में जाते हैं। यहां वे करीब एक महीने रहेंगे। इसी कारण इसे मकर संक्रांति कहा जाता है।

समय को लेकर एक मत नहीं

पंडित मनीष पाठक ने बताया कि लोक विजय, भुवन विजय, चिंताहरण और पुष्पांजलि पंचांगों में 14 जनवरी को सूर्य के मकर राशि में प्रवेश का समय अलग-अलग बताया गया है। इस कारण संभावना है कि इस बार दो दिन संक्रांति मन सकती है, लेकिन सूर्य उदया तिथि में संक्रांति 15 जनवरी को ही रहेगी। इसलिए इसी दिन संक्रांति का पुण्य काल अधिक फलदायी रहेगा। इस दिन सूर्योदय से दोपहर 1.15 बजे तक विशेष पुण्य काल रहेगा, जिसमें स्नान-दान और सूर्य आराधना की जानी जाहिए। इसके बाद सूर्यास्त तक सामान्य पुण्य काल रहेगा।

पतंग उड़ेगी, पेंच लड़ाएंगे

मकर सक्रांति पर्व पर आसमान में पतंग उड़ाने और पैच लड़ाने का सिलसिला प्रारंभ होता है। तरह-तरह की पतंग बाजार में उपलब्ध है। पतंग के व्यापारी कैलाश कुशवाह के अनुसार तिरंगा पतंग 10-150, कपड़े वाली पतंग 70-250 रुपये में बिक रही है।

भीष्म ने इसी दिन त्यागे थे प्राण

ज्योतिषाचार्य पंडित डॉक्टर दीपेश पाठक के अनुसार भीष्म पितामह को इच्छा मृत्युु का वरदान प्राप्त था। महाभारत युद्ध में अर्जुन के बाण लगने के बाद उन्होंने मकर संक्रांति को ही अपनी मृत्यु का दिन चुना था। उन्होंने इसी दिन प्राण त्यागे थे। उनका मानना था कि इससे उन्हें मोक्ष प्राप्त होगा। भीष्म ने इसी दिन त्यागे थे प्राण पंडित पाठक के अनुसार भीष्म पितामह को इच्छा मृत्युु का वरदान प्राप्त था। महाभारत युद्ध में अर्जुन के बाण लगने के बाद उन्होंने मकर संक्रांति को ही अपनी मृत्यु का दिन चुना था, उन्होंने इसी दिन प्राण त्यागे थे। उनका मानना था कि इससे उन्हें मोक्ष प्राप्त होगा।

Posted By: Nai Dunia News Network

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