नसरुल्लागंज, Urea Crisis in Madhya Pradesh। बर्बाद हो चुकी खरीफ फसल की पीड़ा से अभी भी अन्नदाता उबर नहीं पाया हैं। ऐसे में रबि फसल में लगने वाले यूरिया की कमी से भी किसानों को जूझना पड़ सकता है। हकीकत में यह आंकड़े प्रशासन के द्वारा मांग एवं आपूर्ति के आधार पर उपलब्ध कराए गए यूरिया को देखकर ही सामने आ रहे हैं। यह आंकड़े कह रहे हैं कि आने वाले समय में यूरिया खाद की कमी अन्नदाता की परेशानी को बढ़ाने वाली हो सकती है। प्रशासन के द्वारा मांग और आपूर्ति के आंकड़ों में भारी अंतर होने से ऐसी स्थिति निर्मित हो रही हैं। वहीं प्रशासन भी सरकार की बात को आधार मानते हुए कह रहा है कि अभी यूरिया की आवश्यकता प्रारंभ नहीं हुई है और जब इसकी आवश्यकता लगेगी तब तक डिमांड की पूर्ति हो जाएगी। इसलिए अन्नदाता यूरिया कमी की चिंता न करें और वह रबि फसल की तैयारी में जुट जाए।

दूसरी तरफ किसान प्रशासन के आश्वासन पर यकीन न करते हुए शासकीय एजेंसियों की जगह बाजार से महंगे दामों पर यूरिया खाद की आपूर्ति कर रहा हैं। वही अन्नदाता का कह रहा है कि पहले भी हम प्रशासन के दावे को देख चुके हैं। जिसमें सरकारी एजेंसियों के हाथ खाली रहे। वहीं दूसरी और व्यापारियों के पास कभी भी इसकी कमी नहीं आई और कमी का फायदा उठाते हुए निजी व्यापारियों के द्वारा मुंह मांगे दामों पर प्रशासन की आंख के नीचे खाद की आपूर्ति की गई।

डिमांड से आधा मिला यूरिया

प्रशासन ने बीते वर्ष की आपूर्ति के आधार पर 12.656 मिट्रिक टन को ध्यान रखते हुए इस बार 13 हजार मिट्रिक टन यूरिया की मांग शासन के पास पहुंचाई। लेकिन अभी तक प्रशासन से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार 6 मिट्रिक टन यूरिया सेवा सहकारी समितियों के पास पहुंच पाया हैं। जहां से अंश धारी किसान इसे प्राप्त कर सकते हैं। वहीं 100 मैट्रिक टन यूरिया उन किसानों के लिए अलग से दिया गया, जो समितियों से जुड़े नहीं हैं और वह नगद में यूरिया खरीद सकते हैं। वहीं प्राइवेट सेक्टर के लिए 18 मिट्रिक टन तथा 9.30 मिट्रिक टन यूरिया बीएमओ गोडाउन को नगदी विक्रय के लिए दिया गया है। ताकि डिफाल्टर किसान नगदी में इसे खरीद सके। वैसे सभी उपलब्ध आंकड़ों को जोड़ा जाए तो यह डिमांड से कुछ ज्यादा होता है। जबकि यूरिया की आवश्यकता वमुश्किल से 1 सप्ताह बाद शुरू हो जाएगी। ऐसे में किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें साफ देखी जा सकती है। इसके पीछे पुख्ता कारण यह भी है कि विगत तीन-चार सीजन में किसान यूरिया की कमी से रूबरू हो चुका हैं। हालांकि प्रदेश के मुखिया शिवराज सिंह चौहान ने अन्नदाता की चिंता को ध्यान में रखते हुए 18 लाख मैट्रिक टन यूरिया की पहले की मांग को बढ़ाकर 22 लाख मैट्रिक टन यूरिया देने की मांग केंद्रीय मंत्री से की है। जो अन्नदाता के लिए राहत भरी खबर है, लेकिन यह राहत कब तक मिलती है। इसका इंतजार किसानों को करना पड़ेगा।

शासकीय की जगह निजी एजेंसियों पर ज्यादा भरोसा

हर रवि सीजन में यूरिया की कमी से किसानों को दो-चार होना पड़ता है। फिर भी शासन प्रशासन समय रहते यूरिया की आपूर्ति नहीं कर पाता। जिसके चलते अन्नदाता शासकीय एजेंसी की जगह निजी एजेंसियों को अधिक दाम चुकाने के बाद भी इसलिए संतुष्ट रहता है कि उसे समय पर खाद की आपूर्ति हो जाती है। जिससे उसके उत्पादन पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता। वही किसान शासकीय एजेंसियों पर विश्वास करें तो उसे समय पर खाद भी उपलब्ध ना हो पाए और उसका उत्पादन प्रभावित हो वह अलग। अन्नदाता का एक वर्ग प्रशासन पर यह भी आरोप लगा रहा है कि जब किसान को खाद की आवश्यकता रहती है। तब सरकारी गोदाम खाली रहते हैं। जबकि निजी दुकानदार जरूरत को पूरा करते है ऐसे में प्रशासन पर सवाल उठना लाजमी हैं। और प्रशासन ने कभी भी इस भ्रम को दूर करने का प्रयास नहीं किया।

रेक आने पर होगी पूर्ति

डिमांड की आपूर्ति के लिए काफी हद तक खाद का वितरण विभिन्न संस्थाओं के माध्यम से किया जा चुका है। शेष आपूर्ति शीघ्र हो जाएगी इसके लिए आए दिन रेक के माध्यम से पूर्ति हो रही है।- बीएस राज, एसएडीओ कृषि विभाग

Posted By: Prashant Pandey

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