आष्टा। श्री श्यामा श्याम चैरिटेबल ट्रस्ट के तत्वावधान में आयोजित श्री खेड़ापति हनुमान मंदिर अंजनी नगर आष्टा में सप्त दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा का भव्य शुभारंभ किया गया। शुभारंभ के पहले खेड़ापति हनुमान मंदिर से श्रीमद् भागवत महापुराण को श्रद्धालुगण अपने माथे पर लेकर जुलूस के रूप में कथा स्थल पर कथावाचक के साथ पहुंचें। बुधवार को कथा में परमपूज्य गुरुदेव मालव माटी के संत मिट्ठूपुरा सरकार के मुखारविंद से ज्ञान, भक्ति, वैराग्य की कथा का विस्तार से समझाया कि जब शुकदेव मुनि ने राजा परीक्षित राजा को भागवत कथा सुना रहे थे तब यह बात देवताओं को पता चली तो ,वह सब शुकदेव मुनि के पास आए और कहा यह कथा हमे दे दो ,बदले में अमृत कलश ले लो परंतु शुकदेव मुनि ने कहा कि यह कथा हरि और हर कि इच्छा से प्राप्त होती हैं, बिनु सत्संग विवेक न होई और राम कृपा बिनु सुलभ न सोई। बिना सत्संग के विवेक नहीं होता है और सत्संग भगवान की इच्छा के बिना नहीं होता।

सत्संग की महिमा का वर्णन करते हुए संत श्री द्वारा शुकदेव जी के जन्म की कथा बडे विस्तार से वर्णन करते हुए बताया कि भगवान शंकर के मुख से अमरनाथ में अमर कथा सुनकर जो तोते का बच्चा भगवान शंकर के त्रिशूल के भय से भागा और वेद व्यास जी की पत्नी पिंगला जी के गर्भ में मुख द्वार से प्रवेश कर गया और 12 वर्ष तक अपनी मां के गर्भ में ही रहा। पिता व्यास जी के कहने पर शुकदेव जी का जब जन्म हुआ तो जन्म के साथ ही वह भगवान की तपस्या करने जंगल में चले गए तब पिता वेदव्यास जी द्वारा श्रीमद् भागवत के श्लोक को श्रवण कर वापस आए और व्यास जी द्वारा शुकदेव जी को संपूर्ण भागवत जिसमें 18000 श्लोक है, उसको सुनाया और फिर परीक्षित जी ने यही भागवत राज ऋषि परीक्षित जी को सुनाई इसके अलावा नारद जी के पूर्व जन्म की कथा मैं बताया कि नारद जी पूर्व जन्म में दासी के पुत्र थे और संतों की सेवा के कारण उस दासी पुत्र हरिदास का नारद जी के रूप में जन्म हुआ इसके साथ ही सुंदर और मधुर भजनों पर सभी श्रोता प्रसन्ना होकर नृत्य करने लगे ।कथा के मंदिर समिति के अध्यक्ष प्रकाश पटेल के द्वारा व्यास पीठ पर विराजित संत श्री मिठ्ठुपुरा सरकार का ओर प्रेमनारायण गोस्वामी वरिष्ठ समाजसेवी ,कथा यजमान भीमा कुशवाह का साफा बांधकर श्रीफल भेंट कर सम्मान किया।

Posted By: Nai Dunia News Network

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